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Bijnor News: 19.96 लाख की फर्जी आईटीसी लेने में उत्तराखंड का आरोपी गिरफ्तार
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शेरकोट। फर्जी जीएसटी फर्म के जरिए बिना वास्तविक कारोबार के 19.96 लाख रुपये की सीजीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में शेरकोट पुलिस और बिजनौर क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
राज्य कर अधिकारी धामपुर खंड संदीप कुमार वर्मा की तहरीर पर थाना शेरकोट में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि धामपुर रोड स्थित एम.ए. ट्रेडर्स के नाम से संचालित फर्म ने बिना वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के अभिलेखों में करीब 11.09 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई। इसके आधार पर 19.96 लाख रुपये की सीजीएसटी आईटीसी प्राप्त की गई।
पुलिस के अनुसार, विवेचना में ऊधमसिंह नगर के जसपुर क्षेत्र निवासी शहनवाज पुत्र बाबू हुसैन का नाम प्रकाश में आया। गुरुवार को शेरकोट पुलिस और बिजनौर क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साथियों के साथ मिलकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और अन्य पहचान पत्र हासिल करता था। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। इसके बाद कूटरचित बिल तैयार कर बिना वास्तविक माल के खरीद-बिक्री दर्शाई जाती थी और बिल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे।
सीओ धामपुर अंजनी चतुर्वेदी ने बताया कि इस तरह कई फर्मों के जरिए फर्जी कारोबार दिखाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जाता था। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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राज्य कर अधिकारी धामपुर खंड संदीप कुमार वर्मा की तहरीर पर थाना शेरकोट में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि धामपुर रोड स्थित एम.ए. ट्रेडर्स के नाम से संचालित फर्म ने बिना वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के अभिलेखों में करीब 11.09 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई। इसके आधार पर 19.96 लाख रुपये की सीजीएसटी आईटीसी प्राप्त की गई।
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पुलिस के अनुसार, विवेचना में ऊधमसिंह नगर के जसपुर क्षेत्र निवासी शहनवाज पुत्र बाबू हुसैन का नाम प्रकाश में आया। गुरुवार को शेरकोट पुलिस और बिजनौर क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साथियों के साथ मिलकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और अन्य पहचान पत्र हासिल करता था। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। इसके बाद कूटरचित बिल तैयार कर बिना वास्तविक माल के खरीद-बिक्री दर्शाई जाती थी और बिल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे।
सीओ धामपुर अंजनी चतुर्वेदी ने बताया कि इस तरह कई फर्मों के जरिए फर्जी कारोबार दिखाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जाता था। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।