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यूपी बोर्ड ने मार्कशीट देने से खड़े किए हाथ
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यूपी बोर्ड ने मार्कशीट देने से खड़े किए हाथ
बिजनौर। जिले के हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों से यूपी बोर्ड ने फीस लेने के बाद भी मार्कशीट व प्रमाणपत्र देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिले के छात्रों से अंकपत्र फीस लाखों रुपये ली गई है। विद्यालय मार्कशीट डाउनलोड करने के लिए फंड नहीं होने की बात कहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड ने फीस ली है, इसलिए मार्कशीट दे।
जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय है। इस साल 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने हाईस्कूल तथा 40 हजार से अधिक ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। बोर्ड ने हाईस्कूल के संस्थागत छात्रों से 500 रुपये परीक्षा शुल्क तथा एक रुपया अंकपत्र फीस मिलाकर कुल 501 रुपये वसूले थे। इसी प्रकार इंटरमीडिएट के छात्रों से 600 रुपये परीक्षा शुल्क तथा एक रुपया अंकपत्र शुल्क मिलाकर कुल 601 रुपये लिया गया था। प्राइवेट छात्रों से परीक्षा फीस अधिक थी, परंतु अंकपत्र फीस एक रुपया ही था। इस प्रकार जिले के संस्थागत तथा व्यक्तिगत छात्रों से अंकपत्र फीस करीब एक लाख रुपये ली गई है। यूपी बोर्ड का रिजल्ट 27 जून को आ गया था। बोर्ड ने घोषणा की थी कि इस साल बोर्ड मार्कशीट व प्रमाणपत्र नहीं भेजेगा। स्कूल बोर्ड की वेबसाइट से मार्कशीट डाउनलोड करेंगे। प्रधानाचार्य उस पर अपने हस्ताक्षर करेंगे। वही अधिकृत मार्कशीट होगी। दाखिलों तथा नौकरी में मान्य होगी। रिजल्ट आए 20 दिन हो गए हैं। आरोप है कि अनेक स्कूलों में मार्कशीट नहीं मिली है। इस बारे में स्कूलों का अपना तर्क है। स्कूलों का कहना है कि एक छात्र की मार्कशीट डाउनलोड करने में करीब दस रुपये खर्च आता है। इसमें साइबर कैफे का इंटरनेट, बिजली व मजदूरी आदि खर्च शामिल है। स्कूलों के पास इस मद का कोई फंड नहीं है। अभिभावक भी बोर्ड के इस फैसले से खफा हैं।
अभिभावक अर्जुन सिंह खेड़ा का कहना है कि हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के शैक्षिक अभिलेख प्रमुख होते हैं। हायर शिक्षा में दाखिला लेने से लेकर नौकरी पाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। डाउनलोड की गई मार्कशीट की क्वालिटी घटिया होती है। बोर्ड हर साल की तहर इस साल भी मार्कशीट दें।
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होशियार सिंह का कहना है कि बोर्ड ने मार्कशीट तथा प्रमाणपत्र देने की फीस छात्रों से पहले ही वसूल ली है। ऐसे में बोर्ड को नियमानुसार मार्कशीट देनी चाहिए।
धर्मेंद्र सिंह के अनुसार यूपी बोर्ड एशिया का सबसे बड़ा बोर्ड है। हर साल लाखों छात्र परीक्षा देते है। ऐसा कभी नहीं हुआ है कि फीस लेकर मार्कशीट नहीं दी गई हो। यह अभिभावकों व छात्रों के साथ धोखा है।
प्रीतम सिंह का कहना है कि यूपी बोर्ड ने जिले के छात्रों से लाखों रुपये अंकपत्र फीस वसूली है। प्रदेश भर में यह रकम करोड़ों में बैठती है। अभिभावकों की मेहनत की कमाई है। छात्र हित में मार्कशीट दें।
भोले सिंह के मुताबिक सरकार फैसले पर पुन: विचार करे। छात्रों की परेशानी देखनी चाहिए। एक रुपये की भी बड़ी कीमत है।
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बिजनौर। जिले के हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों से यूपी बोर्ड ने फीस लेने के बाद भी मार्कशीट व प्रमाणपत्र देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिले के छात्रों से अंकपत्र फीस लाखों रुपये ली गई है। विद्यालय मार्कशीट डाउनलोड करने के लिए फंड नहीं होने की बात कहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड ने फीस ली है, इसलिए मार्कशीट दे।
जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय है। इस साल 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने हाईस्कूल तथा 40 हजार से अधिक ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। बोर्ड ने हाईस्कूल के संस्थागत छात्रों से 500 रुपये परीक्षा शुल्क तथा एक रुपया अंकपत्र फीस मिलाकर कुल 501 रुपये वसूले थे। इसी प्रकार इंटरमीडिएट के छात्रों से 600 रुपये परीक्षा शुल्क तथा एक रुपया अंकपत्र शुल्क मिलाकर कुल 601 रुपये लिया गया था। प्राइवेट छात्रों से परीक्षा फीस अधिक थी, परंतु अंकपत्र फीस एक रुपया ही था। इस प्रकार जिले के संस्थागत तथा व्यक्तिगत छात्रों से अंकपत्र फीस करीब एक लाख रुपये ली गई है। यूपी बोर्ड का रिजल्ट 27 जून को आ गया था। बोर्ड ने घोषणा की थी कि इस साल बोर्ड मार्कशीट व प्रमाणपत्र नहीं भेजेगा। स्कूल बोर्ड की वेबसाइट से मार्कशीट डाउनलोड करेंगे। प्रधानाचार्य उस पर अपने हस्ताक्षर करेंगे। वही अधिकृत मार्कशीट होगी। दाखिलों तथा नौकरी में मान्य होगी। रिजल्ट आए 20 दिन हो गए हैं। आरोप है कि अनेक स्कूलों में मार्कशीट नहीं मिली है। इस बारे में स्कूलों का अपना तर्क है। स्कूलों का कहना है कि एक छात्र की मार्कशीट डाउनलोड करने में करीब दस रुपये खर्च आता है। इसमें साइबर कैफे का इंटरनेट, बिजली व मजदूरी आदि खर्च शामिल है। स्कूलों के पास इस मद का कोई फंड नहीं है। अभिभावक भी बोर्ड के इस फैसले से खफा हैं।
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अभिभावक अर्जुन सिंह खेड़ा का कहना है कि हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के शैक्षिक अभिलेख प्रमुख होते हैं। हायर शिक्षा में दाखिला लेने से लेकर नौकरी पाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। डाउनलोड की गई मार्कशीट की क्वालिटी घटिया होती है। बोर्ड हर साल की तहर इस साल भी मार्कशीट दें।
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होशियार सिंह का कहना है कि बोर्ड ने मार्कशीट तथा प्रमाणपत्र देने की फीस छात्रों से पहले ही वसूल ली है। ऐसे में बोर्ड को नियमानुसार मार्कशीट देनी चाहिए।
धर्मेंद्र सिंह के अनुसार यूपी बोर्ड एशिया का सबसे बड़ा बोर्ड है। हर साल लाखों छात्र परीक्षा देते है। ऐसा कभी नहीं हुआ है कि फीस लेकर मार्कशीट नहीं दी गई हो। यह अभिभावकों व छात्रों के साथ धोखा है।
प्रीतम सिंह का कहना है कि यूपी बोर्ड ने जिले के छात्रों से लाखों रुपये अंकपत्र फीस वसूली है। प्रदेश भर में यह रकम करोड़ों में बैठती है। अभिभावकों की मेहनत की कमाई है। छात्र हित में मार्कशीट दें।
भोले सिंह के मुताबिक सरकार फैसले पर पुन: विचार करे। छात्रों की परेशानी देखनी चाहिए। एक रुपये की भी बड़ी कीमत है।