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UP: बिजनौर भी रहा आतंकियों का ठिकाना, धमाके के बाद खुली थी पोल, दाऊद के खास सलीम 'कुत्ता' से भी जुड़ा कनेक्शन

Tue, 11 Nov 2025 07:43 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Tue, 11 Nov 2025 07:43 PM IST
सार

Bijnor News: साल 2013 में मध्यप्रदेश की खंडवा जेल से फरार सिमी के छह आतंकियों ने बिजनौर में ठिकाना बनाया था। 12 सितंबर 2014 को बम विस्फोट के बाद आतंकियों का ठिकाना उजागर हुआ था। 

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UP: Bijnor was also a hideout for terrorists, the truth was revealed after the blast
आतंकी। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा बिजनौर भी आंतकियों का ठिकाना रहा है। साल 2013 में मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से भागने वाले सिमी के छह आतंकियों ने बिजनौर शहर में पनाह ली थी। इनकी पोल तब खुली, जब 2014 में बम बनाते हुए विस्फोट हो गया था। हालांकि बाद में इन आतंकियों को भोपाल में ढेर किया गया था।
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बिजनौर के मोहल्ला जाटान में 12 सितंबर 2014 को लीलो देवी के मकान में बम विस्फोट हुआ। पता लगा कि इस मकान में किराए पर रहने वाले सिमी के आतंकी हैं, जिन्होंने खंडवा जेल से भागकर यहीं पर बम बनाना सीखा और बम बनाने के बाद प्रदेश में अलग अलग जगहों पर सप्लाई किए। 
 
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उस वक्त आतंकियों के कमरे से सिलिंडर बम, बम बनाने का सामान, पिस्टल, लैपटॉप बरामद हुए थे। इस विस्फोट में आतंकी महबूब घायल हुआ था। एक चिकित्सक से प्राथमिक उपचार कराने के बाद आतंकी बरुकी के पास उमरी के जंगल में भी रहे।
 
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विस्फोट के बाद आतंकी असलम, एजाज, जाकिर, अमजद, सालिम और महबूब बिजनौर से भाग निकलने में कामयाब हो गए थे। हालांकि नवंबर 2016 में भोपाल में आठ आतंकी मारे गए थे। जिनमें छह आतंकी बिजनौर में पनाह लेने वाले भी थे। उधर दाउद के करीबी बताए जाने वाले सलीम कुत्ता का नाम भी बिजनौर से जुड़ता रहा है, जोकि नजीबाबाद के कल्हेड़ी में रहा था।
 

बिजनौर में पकड़े गए थे आतंकियों के मददगार
सिमी आतंकितयों की मदद करने वाले मोहल्ला भाटान निवासी रईस, उसका पुत्र अब्दुल्ला, गांव उमरी की हुस्ना, उसके भाई झालू के फुरकान को पुलिस ने पकड़ा था। इन्हें जेल भी भेजा गया था।

2001 में भी आतंकी मुठभेड़ में शहीद हो गए थे दो पुलिसकर्मी
साल 2001 में बिजनौर में आतंकी घुस आए थे। नुमाइश ग्राउंड पर चेकिंग के दौरान कार में सवार आतंकियों ने पुलिस पर गोली चला दी थी। जिसमें एक दरोगा और एक सिपाही शहीद हो गए थे। हालांकि बाद में सेंट मैरीज चौराहे से आगे पुलिस ने घेराबंदी करते हुए चार आतंकियों को मार गिराया था।
 

आईएसआईएस से जुड़ा था नहटौर के नाजिम का नाम
काम करने के लिए मुंबई गए नहटौर के नाजिम ने अपना आतंकी गुट ही नहीं बनाया, बल्कि आईएसआईएस से भी जुड़ गया था। पुलिस ने नाजिम को दबोचकर उसके साथियों को भी पकड़ा था। नाजिम के साथ बढ़ापुर की मोती मस्जिद का इमाम मुफ्ती फैजान भी जुड़ा था। एटीएस ने फैजान समेत पांच लोगों को दबोचा था। बाद में किसी घटना में शामिल नहीं होने पर चार को छोड़ दिया गया था।

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