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पर्यटक चखेंगे बथुए का स्वाद, अर्जुन की छाल से बनेगी चाय

Fri, 02 Jul 2021 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jul 2021 12:33 AM IST
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Tourists will taste Bathua, tea will be made from the bark of Arjuna
पर्यटक चखेंगे बथुए का स्वाद, अर्जुन की छाल से बनेगी चाय
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। बथुआ से यूं तो हर कोई परिचित होगा, लेकिन बिजनौर की धरती पर इसका अलग ही महत्व है। खासतौर से महात्मा विदुर की कुटी में महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों के पकवान छोड़कर बथुए का साग खाना पसंद किया था। वहीं, आयुर्वेद की दृष्टि से कई बीमारियों में बथुआ रामबाण औषधि का काम भी करता है। पौराणिक और आयुर्वेदिक महत्व को देख प्रशासन ने विदुरकुटी पर पर्यटकों को बथुए का साग खिलाने की व्यवस्था करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके अलावा वहां अर्जुन के पेड़ की छाल की चाय तैयार कर पर्यटकों को दी जाएगी। इसका मकसद यहां की विशेषताओं से देशभर के पर्यटकों को परिचित कराना है। इससे रोजगार के अवसर बढे़ंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा।
बिजनौर जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित महात्मा विदुर कुटी महाभारत सर्किट में शामिल है। विदुरकुटी के बथुए को भगवान श्रीकृष्ण का वरदान होना बताया जाता है, इसलिए ही यह 12 महीने यहां उगता है। हाल ही में जिला प्रशासन की ओर से विदुरकुटी से पर्यटकों को जोड़ने की मुहीम शुरू की गई है। इसके तहत अब प्रशासन विदुरकुटी पर बथुए की खेती करने और यहां उगने वाले बथुए को तमाम प्रारूप में पैक कर पर्यटकों को उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। इस काम में यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं पर्यटक भगवान श्रीकृष्ण के नाम के साथ जुड़े यहां के बथुए का स्वाद भी चख सकेंगे। यहां अर्जुन के पेड़ भी खड़े हैं, इसके साथ ही और भी पौधे अर्जुन के लगाए जाएंगे। अर्जुन की छाल से आयुर्वेदिक टी बैग तैयार कराए जाएंगे। माना जाता है कि अर्जुन की छाल दिल की बीमारियों में रामबाण औषधि का काम करती है। (संवाद)
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बथुआ के सेवन के यह हैं फायदे
आयुर्वेद से जुड़े लोगों की माने तो बथुए के सेवन से दांतों की समस्या दूर होती है। इसके अलावा बथुए की पत्तियों को कच्चा चबाने से सांस की बदबू, पायरिया और दांतों से जुड़ी अन्य समस्याओं में फायदा होता है। वहीं, कब्ज से राहत दिलाने में बथुआ बेहद कारगर है। आयरन का अच्छा स्रोत है और पाचन शक्ति को बढ़ाने का काम भी करता है। पीलिया, खून साफ करने, पेट के कीड़े खत्म करने, चर्म रोग दूर करने में फायदेमंद होता है।
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पर्यटकों को महात्मा विदुर की कुटी से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। अर्जुन की छाल से टी बैग तैयार कराने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसी तरह बथुए को किस तरह पैकेजिंग के जरिए पर्यटकों को उपलब्ध कराया जा सकता है, उस पर मंथन चल रहा है। इनके जरिये हम लोगों को यहां आकर्षित कर सकते हैं - उमेश मिश्रा, डीएम
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