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तीन चिकित्सकों का तबादला, मिले सिर्फ दो
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तीन चिकित्सकों का तबादला, मिले सिर्फ दो
बिजनौर। जिला अस्पताल अभी भी रेफर सेंटर ही बना हुआ है। तबादलों के इस दौर में अस्पताल को दो ही चिकित्सक मिले। जबकि तीन चिकित्सकों का तबादला हो गया। एक तो पहले से ही मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब तीन चिकित्सकों के तबादले के बाद समस्या घटने के बजाय बढ़ जाएगी। अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 28 पद हैं। जिनमें से 14 पदों पर चिकित्सकों की तैनाती है। बाकी पद काफी सालों से खाली चल रहे हैं। जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब जिला अस्पताल से तीन चिकित्सकों के तबादले हो गए हैं। जिनमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज सैन, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव रस्तोगी और पैथोलॉजी इंचार्ज डॉ. संजय कुमार शंकर का नाम शामिल है। तबादले के सिलसिले के बीच जिला अस्पताल को एनेस्थेटिक सबसे ज्यादा जरूरत हैं, लेकिन फिर भी अस्पताल का एनेस्थेटिक का इंतजार खत्म नहीं हुआ। अस्पताल में सर्जन तो तीन है, मगर एनेस्थेटिक एक भी नहीं है। अब तीन चिकित्सकों के तबादले के बाद जिला अस्पताल में मरीजों की परेशानी बढ़ जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग में चल रहे तबादले के दौर में चिकित्सकों की उठापटक चालू है। इस दौर में बिजनौर जिला अस्पताल से तीन चिकित्सक जाने के बाद दो ही चिकित्सक मिले हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र सिंह और फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार की बिजनौर जिला अस्पताल में तैनाती हुई है। मगर अभी तक दोनों चिकित्सक अस्पताल नहीं आए हैं।
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रुक सकते हैं चिकित्सकों के तबादले
स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों का स्थानांतरण करने पर अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से स्पष्टीकरण मांगा है। चिकित्सकों के तबादले किस तरह से किए गए हैं। क्योंकि जिस अस्पताल में चिकित्सकों की ज्यादा जरूरत हैं, वहां से भी चिकित्सकों के तबादले कर दिए गए। जिसके चलते उम्मीद लगाई जा रही है कि चिकित्सकों के तबादले रुक सकते हैं। जिससे मरीजों को राहत मिलेगी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि चिकित्सकों के तबादले का असर अस्पताल पर पड़ेगा। एक तो अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है और अब तबादलों से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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बिजनौर। जिला अस्पताल अभी भी रेफर सेंटर ही बना हुआ है। तबादलों के इस दौर में अस्पताल को दो ही चिकित्सक मिले। जबकि तीन चिकित्सकों का तबादला हो गया। एक तो पहले से ही मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब तीन चिकित्सकों के तबादले के बाद समस्या घटने के बजाय बढ़ जाएगी। अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 28 पद हैं। जिनमें से 14 पदों पर चिकित्सकों की तैनाती है। बाकी पद काफी सालों से खाली चल रहे हैं। जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब जिला अस्पताल से तीन चिकित्सकों के तबादले हो गए हैं। जिनमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज सैन, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव रस्तोगी और पैथोलॉजी इंचार्ज डॉ. संजय कुमार शंकर का नाम शामिल है। तबादले के सिलसिले के बीच जिला अस्पताल को एनेस्थेटिक सबसे ज्यादा जरूरत हैं, लेकिन फिर भी अस्पताल का एनेस्थेटिक का इंतजार खत्म नहीं हुआ। अस्पताल में सर्जन तो तीन है, मगर एनेस्थेटिक एक भी नहीं है। अब तीन चिकित्सकों के तबादले के बाद जिला अस्पताल में मरीजों की परेशानी बढ़ जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग में चल रहे तबादले के दौर में चिकित्सकों की उठापटक चालू है। इस दौर में बिजनौर जिला अस्पताल से तीन चिकित्सक जाने के बाद दो ही चिकित्सक मिले हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र सिंह और फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार की बिजनौर जिला अस्पताल में तैनाती हुई है। मगर अभी तक दोनों चिकित्सक अस्पताल नहीं आए हैं।
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रुक सकते हैं चिकित्सकों के तबादले
स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों का स्थानांतरण करने पर अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से स्पष्टीकरण मांगा है। चिकित्सकों के तबादले किस तरह से किए गए हैं। क्योंकि जिस अस्पताल में चिकित्सकों की ज्यादा जरूरत हैं, वहां से भी चिकित्सकों के तबादले कर दिए गए। जिसके चलते उम्मीद लगाई जा रही है कि चिकित्सकों के तबादले रुक सकते हैं। जिससे मरीजों को राहत मिलेगी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि चिकित्सकों के तबादले का असर अस्पताल पर पड़ेगा। एक तो अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है और अब तबादलों से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।