{"_id":"5bf456e7bdec2269774f18cc","slug":"three-daughters-giving-free-training-for-self-defense-in-bijnor","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्मरक्षा की मुफ्त ट्रेनिंग दे रहीं तीन बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आत्मरक्षा की मुफ्त ट्रेनिंग दे रहीं तीन बेटियां
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Wed, 21 Nov 2018 12:18 AM IST
विज्ञापन
नेहरू स्टेडियम में छात्राओं को ताइक्वांडो सिखाती युवतियां।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर में बेटियां अगर फूलों की तरह कोमल होती हैं तो वक्त आने पर फौलाद की तरह मजबूती भी दिखाती हैं। बस, इन्हें मजबूती का अहसास कराने की जरूरत है। जिले की तीन बेटियां ताइक्वांडो के जरिए महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। पुलिस की कार्यशालाओं में भी इन्हें बतौर ट्रेनर बुलाया जाता है। ये तीनों बिना किसी शुल्क के छात्राओं को ट्रेनिंग देती हैं।
गृहणी शालिनी, बीएससी की छात्रा दीपिका और कक्षा 11 की शिवानी सिंह बिजनौर की रहने वाली हैं। तीनों ने करीब दो साल पहले ताइक्वांडो सीखना शुरू किया था। इसी दौरान महसूस किया कि महिला सुरक्षा के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन महिलाएं व छात्राएं खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं हैं। अगर छात्राएं ताइक्वांडो जैसी विधाओं की जानकारी रखेंगी तोउन्हें आत्मरक्षा के लिए किसी का मोहताज नहीं होना होगा। छेड़खानी करने वालों को भी खुद ही सबक सिखा सकती हैं। इसी सोच के साथ तीनों ने खुद ही स्कूल-कॉलेज में जाकर कार्यक्रम करने शुरू कर दिए। कॉलेज प्रबंधन के पदाधिकारियों ने भी इनके प्रस्ताव को स्वीकार किया। तीनों ने स्कूल-कॉलेजों में जाकर ताइक्वांडो की ट्रेनिंग देनी शुरू की। दो छात्राएं हैं, लेकिन शालिनी दो बच्चों की मां हैं। अपने व्यस्त जीवन के बावजूद तीनों ताइक्वांडो ट्रेनिंग दे रही हैं। धीरे-धीरे इनका प्रयास रंग ला रहा है। कई स्कूलों ने छात्राओं को ताइक्वांडो सिखाने का इनसे आग्रह किया है। ये छात्राओं को तलवारबाजी भी करके दिखाती हैं और टाइल्स आदि भी एक ही मुक्के के वार से तोड़ती हैं। इनमें शिवानी ताइक्वांडो में ब्लेक बैल्ट हैं। अक्तूबर माह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा मिशन साहसी का आयोजन किया था। छात्राओं को जागरूक करने के लिए स्कूल-कॉलेज में कैंप लगाए गए। शालिनी, दीपिका और शिवानी ने प्रशिक्षित किया। तीनों ने करीब पांच हजार छात्राओं को आत्मरक्षा गुर सिखाए।
विज्ञापन
गृहणी शालिनी, बीएससी की छात्रा दीपिका और कक्षा 11 की शिवानी सिंह बिजनौर की रहने वाली हैं। तीनों ने करीब दो साल पहले ताइक्वांडो सीखना शुरू किया था। इसी दौरान महसूस किया कि महिला सुरक्षा के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन महिलाएं व छात्राएं खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं हैं। अगर छात्राएं ताइक्वांडो जैसी विधाओं की जानकारी रखेंगी तोउन्हें आत्मरक्षा के लिए किसी का मोहताज नहीं होना होगा। छेड़खानी करने वालों को भी खुद ही सबक सिखा सकती हैं। इसी सोच के साथ तीनों ने खुद ही स्कूल-कॉलेज में जाकर कार्यक्रम करने शुरू कर दिए। कॉलेज प्रबंधन के पदाधिकारियों ने भी इनके प्रस्ताव को स्वीकार किया। तीनों ने स्कूल-कॉलेजों में जाकर ताइक्वांडो की ट्रेनिंग देनी शुरू की। दो छात्राएं हैं, लेकिन शालिनी दो बच्चों की मां हैं। अपने व्यस्त जीवन के बावजूद तीनों ताइक्वांडो ट्रेनिंग दे रही हैं। धीरे-धीरे इनका प्रयास रंग ला रहा है। कई स्कूलों ने छात्राओं को ताइक्वांडो सिखाने का इनसे आग्रह किया है। ये छात्राओं को तलवारबाजी भी करके दिखाती हैं और टाइल्स आदि भी एक ही मुक्के के वार से तोड़ती हैं। इनमें शिवानी ताइक्वांडो में ब्लेक बैल्ट हैं। अक्तूबर माह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा मिशन साहसी का आयोजन किया था। छात्राओं को जागरूक करने के लिए स्कूल-कॉलेज में कैंप लगाए गए। शालिनी, दीपिका और शिवानी ने प्रशिक्षित किया। तीनों ने करीब पांच हजार छात्राओं को आत्मरक्षा गुर सिखाए।
विज्ञापन