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Bijnor News: किस्सों में बाकी रह गया सियासत के ‘नगीना’ का फसाना

Sat, 07 Jan 2023 04:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Jan 2023 04:30 AM IST
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The trap of 'Nagina' of politics remained in the stories
बिजनौर में पूर्व मंत्री स्वर्गीय अजीजुर्रमान को फूल लगाते परवेज आदिल। (फाइल फोटो) - फोटो : BIJNOR
किस्सों में बाकी रह गया सियासत के ‘नगीना’ का फसाना
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गौरव गोयल
नगीना। अजीजुर्रहमान एक ऐसा नाम जो नगीना के बाशिंदे ही नहीं रहे, बल्कि सियासत में भी नगीना बनकर चमक बिखेरी। इनकी ईमानदारी का फसाना किस्सों में बाकी रह गया है। उनकी तमाम मिसाल अब तक दी जाती हैं। आजादी की जंग में कदमताल करने से लेकर स्वतंत्र भारत की राज्य सरकार में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। ये वही अजीजुर्रहमान थे, जिन्होंने विधानसभा भंग होने की खबर रेडियो पर मिलते ही रास्ते में सरकारी गाड़ी छोड़कर बैलगाड़ी पकड़ ली थी।
पूर्व मंत्री स्वर्गीय अजीजुर्रहमान ने 11 साल पहले इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। एक जून 1925 को महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व अविभाजित पंजाब के गवर्नर रहे नगीना के मोहल्ला काजी सराय निवासी हाफिज मोहम्मद इब्राहिम के घर जन्मे अजीजुर्रहमान की 11वीं पुण्यतिथि पर नगीना उन्हें याद कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा है। सात जनवरी 2012 को दिल्ली एम्स में अंतिम सांस लेने वाले मशहूर राजनीतिज्ञ अजीजुर्रहमान को राजनीति और ईमानदारी विरासत में मिली। अजीजुर्रहमान की प्रारंभिक शिक्षा नगीना के हिंदू इंटर कॉलेज से हुई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद एमए तथा एलएलबी की शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्राप्त की। अपने भाई अतीकुर्रहमान के आकस्मिक निधन के बाद 1972 में सक्रिय रूप से राजनीति में आए।
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इलाहाबाद में किया था छात्र जुलूस का नेतृत्व
1942 में ब्रिटिश सरकार ने उनके पिता हाफिज मोहम्मद इब्राहिम, मामू मौलाना हिफजुरहमान स्योहारवी, फूफा अब्दुल लतीफ गांधी बिजनौरी और छोटे भाई अतिकुर्रहमान को जेल में डाल दिया था। इसके बाद भी बिना विचलित हुए अजीजुर्रहमान ने पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, हेमवती नंदन बहुगुणा के साथ मिलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में निकाले गए छात्र जुलूस का नेतृत्व किया था।
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नगीना को दिलाई थी कताई मिल की सौगात
अजीजुर्रहमान 1973 में नगीना विधानसभा के हुए उपचुनाव में विधायक चुने जाने के बाद प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। बाद में नगीना सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद बिजनौर सीट के कई बार विधायक रहे। उनके पड़ोसी रहे शिक्षाविद परवेज आदिल बताते हैं कि जनपद बिजनौर को बैराज पुल, चांदपुर चीनी मिल, नगीना सहकारी कताई मिल, पॉलिटेक्निक बिजनौर जैसे महत्वपूर्ण संस्थान दिलवाने में अजीजुर्रहमान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

खंडहर हो चुका है मकान
आदिल बताते हैं कि अजीजुर्रहमान पूरे राजनीति के कॅरिअर में अपना एक मकान भी नहीं बना सके। जब इस दुनिया से रुखसत हुए तो उनके पास रहने के लिए मात्र एक छोटा सा कमरा था। वह कहते हैं कि अजीजुर्रहमान की ईमानदार राजनीति का उदाहरण आज भी नगीना के मोहल्ला काजी सराय में खड़ा क्षतिग्रस्त मकान बयां करने के लिए काफी है।
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