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Bijnor News: जांच में शत प्रतिशत मिला बायोकेमिस्ट्री के सैंपल का परिणाम
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बिजनौर। महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की केंद्रीय प्रयोगशाला के बायोकेमिस्ट्री विभाग को ईक्यूएएस (बाह्य गुणवत्ता आश्वासन सेवाएं) प्रमाण पत्र मिला। जांच में बायोकेमिस्ट्री के सैंपल परिणाम शत प्रतिशत सटीक मिले। सीएमसी वेल्लोर, तमिलनाडु की ओर से ईक्यूएएस प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है।
सीएमसी वेल्लोर, तमिलनाडु की ओर से ईक्यूएएस के माध्यम से चिकित्सा प्रयोगशाला की जांच गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन करता है। बिजनौर मेडिकल कॉलेज ने भी इस संस्था ने टाइअप किया है। इसके बाद संस्था द्वारा गुणवत्ता परखने के लिए सैंपल भेेजे। जांच के आधार पर प्रयोगशालाओं की तकनीकी दक्षता, उपकरणों की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। डॉ. रेखा चौधरी ने बताया कि ईक्यूएएस के तहत एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, शुगर से संबंधित जांच का मूल्यांकन किया गया।
सभी परिणाम मानक के अनुरूप पाए गए। जो विभाग की उच्च स्तरीय तकनीकी क्षमता, सटीकता, विश्वसनीयता आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण का प्रमाण है। नमूनों की जांच अत्याधुनिक ऑटो विश्लेषक पर स्थापित किया। ईक्यूएएस प्रमाण पत्र के लिए बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. सूर्यकांत नागतिलक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेखा चौधरी, सहायक प्रोफेसर डॉ. अरुण नागतिलक, सहायक प्रोफेसर डॉ. पियूष कुमार सिंह, डॉ. इंद्र प्रताप सिंह आदि ने अच्छा कार्य किया।
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इस आधार पर मिला प्रमाणपत्र
सीएमसी वेल्लोर, तमिलनाडु ने अपने यहां जांच करने के बाद कुछ सैंपल बिजनौर मेडिकल कॉलेज भेजे। इन सैंपल की यहां जांच की गई। जांच रिपोर्ट ऑनलाइन बेवसाइट पर अपलोड की। दोनों जांच रिपोर्ट एक जैसी होने के बाद ही ईक्यूएएस प्रमाण पत्र जारी किया।
केंद्रीय प्रयोगशाला की पूरी तकनीकी एवं वैज्ञानिक टीम की मेहनत की वजह से ईक्यूएएस प्रमाणपत्र मिला है। मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। मरीजों को अच्छी, मानक के अनुसार जांच की जा रही हैं। आगामी समय में माह के हिसाब से ईक्यूएएस का प्रावधान भी रखा जाएगा।
....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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सीएमसी वेल्लोर, तमिलनाडु की ओर से ईक्यूएएस के माध्यम से चिकित्सा प्रयोगशाला की जांच गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन करता है। बिजनौर मेडिकल कॉलेज ने भी इस संस्था ने टाइअप किया है। इसके बाद संस्था द्वारा गुणवत्ता परखने के लिए सैंपल भेेजे। जांच के आधार पर प्रयोगशालाओं की तकनीकी दक्षता, उपकरणों की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। डॉ. रेखा चौधरी ने बताया कि ईक्यूएएस के तहत एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल, शुगर से संबंधित जांच का मूल्यांकन किया गया।
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सभी परिणाम मानक के अनुरूप पाए गए। जो विभाग की उच्च स्तरीय तकनीकी क्षमता, सटीकता, विश्वसनीयता आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण का प्रमाण है। नमूनों की जांच अत्याधुनिक ऑटो विश्लेषक पर स्थापित किया। ईक्यूएएस प्रमाण पत्र के लिए बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. सूर्यकांत नागतिलक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेखा चौधरी, सहायक प्रोफेसर डॉ. अरुण नागतिलक, सहायक प्रोफेसर डॉ. पियूष कुमार सिंह, डॉ. इंद्र प्रताप सिंह आदि ने अच्छा कार्य किया।
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इस आधार पर मिला प्रमाणपत्र
सीएमसी वेल्लोर, तमिलनाडु ने अपने यहां जांच करने के बाद कुछ सैंपल बिजनौर मेडिकल कॉलेज भेजे। इन सैंपल की यहां जांच की गई। जांच रिपोर्ट ऑनलाइन बेवसाइट पर अपलोड की। दोनों जांच रिपोर्ट एक जैसी होने के बाद ही ईक्यूएएस प्रमाण पत्र जारी किया।
केंद्रीय प्रयोगशाला की पूरी तकनीकी एवं वैज्ञानिक टीम की मेहनत की वजह से ईक्यूएएस प्रमाणपत्र मिला है। मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। मरीजों को अच्छी, मानक के अनुसार जांच की जा रही हैं। आगामी समय में माह के हिसाब से ईक्यूएएस का प्रावधान भी रखा जाएगा।
....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर