{"_id":"682cd7944b5ce847cd0c8a57","slug":"the-house-where-the-daughters-palanquin-was-to-be-lifted-the-fathers-bier-was-lifted-from-there-bijnor-news-c-27-1-smrt1025-150366-2025-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: जिस घर में उठनी थी बेटी की डोली, वहां से उठ गई पिता की अर्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: जिस घर में उठनी थी बेटी की डोली, वहां से उठ गई पिता की अर्थी
Wed, 21 May 2025 12:57 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Wed, 21 May 2025 12:57 AM IST
विज्ञापन
शेरकोट। जिस घर में बेटी शादी की तैयारी चल रही थी। कुछ ही दिनों में बेटी की डोली उठनी थी उस घर में आज मातम पसरा है। बेटी की डोली से पहले पिता की अर्थी उठ गई।
मामला थाना क्षेत्र के उमरपुर गांव का है। सात जून को गांव निवासी कृष्णपाल सिंह चौहान की बेटी रूपा की बरात आनी थी। सोमवार को बेटी की शादी की खरीदारी के लिए कृष्णपाल सिंह बैंक से पैसे निकालने गए थे जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के पुत्र रुपेंद्र ने बताया कि उनकी मां का देहांत बचपन में ही हो गया था। लंबे समय के बाद घर में खुशियां का समय आया था। लेकिन पिता की आकस्मिक मौत से भाई बहन के सर से मां के बाद पिता का भी साया उठ गया। रुपेंद्र का कहना है कि अगर बैंक स्टाफ परिजनों के आने का इंतजार न करके उनके पिता को समय से उपचार दिलाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। मंगलवार को गमगीन माहौल के बीच कृष्णपाल सिंह के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विज्ञापन
मामला थाना क्षेत्र के उमरपुर गांव का है। सात जून को गांव निवासी कृष्णपाल सिंह चौहान की बेटी रूपा की बरात आनी थी। सोमवार को बेटी की शादी की खरीदारी के लिए कृष्णपाल सिंह बैंक से पैसे निकालने गए थे जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के पुत्र रुपेंद्र ने बताया कि उनकी मां का देहांत बचपन में ही हो गया था। लंबे समय के बाद घर में खुशियां का समय आया था। लेकिन पिता की आकस्मिक मौत से भाई बहन के सर से मां के बाद पिता का भी साया उठ गया। रुपेंद्र का कहना है कि अगर बैंक स्टाफ परिजनों के आने का इंतजार न करके उनके पिता को समय से उपचार दिलाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। मंगलवार को गमगीन माहौल के बीच कृष्णपाल सिंह के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विज्ञापन