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Bijnor News: बिजनौर में 140 पुराना है आर्य समाज का इतिहास, मजिस्ट्रेट बने थे अध्यक्ष

Sat, 02 Dec 2023 11:16 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 11:16 PM IST
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The history of Arya Samaj in Bijnor is 140 years old, magistrate became the president
- 1883 में बिजनौर मुख्यालय पर हुई थी आर्य समाज की स्थापना
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- सत्यार्थ प्रकाश के प्रकाशन के लिए बिजनौर से दिया गया था आर्थिक सहयोग


संवाद न्यूज एजेंसी

कोतवाली देहात। महर्षि दयानंद का 200वां जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। बिजनौर में आर्य समाज का इतिहास 140 पुराना है। वर्ष 1883 में आर्य समाज की बिजनौर में स्थापना हुई। उस वक्त आर्य समाज का पहला अध्यक्ष यहां तैनात रहे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को बनाया गया था। सत्यार्थ प्रकाश के प्रकाशन के लिए भी बिजनौर ने आर्थिक सहयोग मुहैया कराया था।
महर्षि दयानंद सरस्वती ने वैदिक धर्म पुनरोद्धार आंदोलन चलाया। 1881 में बिजनौर के कुछ लोग उनके आंदोलन से जुड़े।1883 में आर्य समाज के विद्वान स्वामी सहजानंद जनपद बिजनौर आए। उस समय राजा जय कृष्ण दास जनपद में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात थे। राजा जय कृष्ण दास स्वामी दयानंद के अनुयायी थे। उन्हें अपना गुरु मानते थे।
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स्वामी सहजानंद के जनपद में आने पर उन्होंने स्वामी सहजानंद के भ्रमण तथा धर्म प्रचार की व्यवस्था की। स्वामी सहजानंद ने बिजनौर, मोहम्मदपुर देवमल, नगीना और नहटौर में आर्य समाज केंद्रों की स्थापना की। इसका जिक्र हल्दौर निवासी लाला भवानीप्रसाद द्वारा लिखित पुस्तक बिजनौर मंडल आर्य समाज का इतिहास में मिलता है।
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दयानंद सरस्वती को विदेश से मंगा कर दिए थे ग्रंथ
महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश के प्रकाशन में जनपद के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर राजा जय कृष्ण दास ने सहयोग किया था। उन्होंने दयानंद सरस्वती को विदेश से मंगाकर कई ग्रंथ भी भेंट किए थे।




सामाजिक कुरीतियों की लड़ी लड़ाई
जनपद में आर्य समाज द्वारा सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया गया। कई स्थानों पर सहभोज का आयोजन किया गया, जिससे ऊंच नीच की भावना कम हुई। बाल विवाह, विधवा विवाह, सती प्रथा का भी विरोध किया गया।









हैदराबाद सत्याग्रह में शामिल हुए थे जनपद के आर्यसमाजी बिजनौर के इतिहासकार इंजीनियर हेमंत कुमार ने अपनी पुस्तक ‘बिजनौर की बातें’ और ‘डायरी के पदचिह्न’ में कई बातें दर्ज की है। बताया है कि 1938 में हैदराबाद में अंग्रेजों तथा वहां के शासकों के अत्याचारों के विरुद्ध आर्य समाज द्वारा आंदोलन छेड़ दिया गया था। इसमें जनपद के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाला ठाकुरदास के नेतृत्व में कई लोग हैदराबाद गए थे। उनके साथ हरीपाल भटनागर, रघुवीर सिंह, पंडित बारूमल, रामचंद्र सहाय, स्वामी नित्यानंद, लक्ष्मण देव सहित दर्जनों लोग शामिल हुए थे। बिजनौर के कुछ अन्य सेनानी जैसे डॉ. धर्मदेव आत्रेय भी गए थे।






पुलिस की नौकरी छोड़ आर्य समाज को अपनाया
कोतवाली देहात स्थित दयानंद इंटर कॉलेज के प्रबंधक चौधरी अमन सिंह ने 1970 में पुलिस की नौकरी छोड़कर आर्य समाज के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। आज भी प्रत्येक रविवार को विद्यालय में हवन यज्ञ का आयोजन किया जाता है।






आर्य समाज का प्रचार कर रहे हैं विनोद आर्य
ग्राम हीमपुर दीपा निवासी विनोद आर्य आज भी आर्य समाज की सेवा कर रहे हैं। वे पूरे जनपद में वैदिक रीति-रिवाज से हवन यज्ञ संपन्न करते हैं। विनोद आर्य जनपद के अतिरिक्त उत्तराखंड तथा दूसरे जनपदों में भी आर्य समाज पद्धति के प्रचार प्रसार में सक्रिय हैं।
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