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कैसे होगी कुपोषण से जंग, अभी बंटा है केवल मई का ही पोषाहार का खाद्यान्न
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कुपोषण की लड़ाई में शासन ही कर रहा ढिलाई
बिजनौर। जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को शासन द्वारा ही पलीता लगाया जा रहा है। हाल ये है कि अभी तक बच्चों को अभी मई माह का ही पोषाहार खाद्यान्न वितरित किया गया है। जो बच्चा अगस्त में कुपोषित मिला है, उसे खाद्यान्न दो से तीन महीने बाद मिलेगा।
बच्चों, महिलाओं, किशोरियों को हर महीने गेहूं, चावल वितरित किए जाते हैं। यह चावल अब कोटेदार के माध्यम से बांटा जा रहा है। शासन की मंशा है कि इनसे मिलने वाले अतिरिक्त पोषण से बच्चों का स्वास्थ्य ठीक होगा। हर महीने आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों का वजन किया जाता है। उसी के अनुसार अगले महीने बच्चों को पोषाहार का खाद्यान्न दिया जाता है। जिले में हर महीने दो हजार 277 क्विंटल चावल, दो हजार 605 क्विंटल गेहूं, दो हजार क्विंटल से अधिक दाल और 94 हजार किग्रा से अधिक रिफाइंड ऑयल बांटा जाता है। शासनादेश के अनुसार हर महीने पात्रों को यह राशन मिलना चाहिए लेकिन शासन की ओर से ही बांटने के लिए पोषाहार का खाद्यान्न नहीं भेजा जाता है। अब तक पात्रों को केवल मई महीने तक का ही खाद्यान्न बांटा गया है जबकि सितंबर का पहला सप्ताह खत्म होने वाला है। जब तक शासन खाद्यान्न नहीं देगा, कोटेदार भी पात्रों को खाद्यान्न नहीं दे पाते हैं।
इतना मिलता है पोषाहार
छह माह से तीन साल तक के बच्चों को एक-एक किग्रा गेहूं, दाल व चावल, 455 ग्राम तेल, तीन से छह साल तक के बच्चे को 500-500 ग्राम चावल, गेहूं, दाल, गर्भवती व धात्री महिलाओं को एक-एक किग्रा चावल व दाल, डेढ़ किग्रा गेहूं व 455 ग्राम तेल, अतिकुपोषित बच्चों को डेढ़-डेढ़ किग्रा चावल व गेहूं, दो किग्रा दाल, 455 ग्राम तेल, 11 से 14 साल तक किशोरियों को एक-एक किग्रा चावल व दाल, डेढ़ किग्रा गेेहूं और 355 ग्राम तेल दिया जाता है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा के अनुसार कुपोषण के खिलाफ जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। शासन की योजनाओं का लाभ पात्रों को दिया जा रहा है।
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बिजनौर। जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को शासन द्वारा ही पलीता लगाया जा रहा है। हाल ये है कि अभी तक बच्चों को अभी मई माह का ही पोषाहार खाद्यान्न वितरित किया गया है। जो बच्चा अगस्त में कुपोषित मिला है, उसे खाद्यान्न दो से तीन महीने बाद मिलेगा।
बच्चों, महिलाओं, किशोरियों को हर महीने गेहूं, चावल वितरित किए जाते हैं। यह चावल अब कोटेदार के माध्यम से बांटा जा रहा है। शासन की मंशा है कि इनसे मिलने वाले अतिरिक्त पोषण से बच्चों का स्वास्थ्य ठीक होगा। हर महीने आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों का वजन किया जाता है। उसी के अनुसार अगले महीने बच्चों को पोषाहार का खाद्यान्न दिया जाता है। जिले में हर महीने दो हजार 277 क्विंटल चावल, दो हजार 605 क्विंटल गेहूं, दो हजार क्विंटल से अधिक दाल और 94 हजार किग्रा से अधिक रिफाइंड ऑयल बांटा जाता है। शासनादेश के अनुसार हर महीने पात्रों को यह राशन मिलना चाहिए लेकिन शासन की ओर से ही बांटने के लिए पोषाहार का खाद्यान्न नहीं भेजा जाता है। अब तक पात्रों को केवल मई महीने तक का ही खाद्यान्न बांटा गया है जबकि सितंबर का पहला सप्ताह खत्म होने वाला है। जब तक शासन खाद्यान्न नहीं देगा, कोटेदार भी पात्रों को खाद्यान्न नहीं दे पाते हैं।
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इतना मिलता है पोषाहार
छह माह से तीन साल तक के बच्चों को एक-एक किग्रा गेहूं, दाल व चावल, 455 ग्राम तेल, तीन से छह साल तक के बच्चे को 500-500 ग्राम चावल, गेहूं, दाल, गर्भवती व धात्री महिलाओं को एक-एक किग्रा चावल व दाल, डेढ़ किग्रा गेहूं व 455 ग्राम तेल, अतिकुपोषित बच्चों को डेढ़-डेढ़ किग्रा चावल व गेहूं, दो किग्रा दाल, 455 ग्राम तेल, 11 से 14 साल तक किशोरियों को एक-एक किग्रा चावल व दाल, डेढ़ किग्रा गेेहूं और 355 ग्राम तेल दिया जाता है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा के अनुसार कुपोषण के खिलाफ जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। शासन की योजनाओं का लाभ पात्रों को दिया जा रहा है।