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Bijnor News: शिव मंदिर को नुकसान पहुंचा रही गंगा की धार
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चंदक। थाना क्षेत्र के बालावाली गंगा घाट पर सैकड़ों गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र शिव मंदिर गंगा के मुहाने पर आ गया है। विभाग ने मंदिर के पीछे पक्का तटबंध बना दिया, जिससे गंगा की तेज धार मंदिर के पास बह रही है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के चलते गंगा में जलस्तर बढ़ गया है।
पहले मंदिर की पूर्व दिशा में खुला मैदान था। जलस्तर बढ़ने पर पानी मंदिर से होता हुआ खुले मैदान में चला जाता था। इससे मंदिर को कोई नुकसान नहीं होता था। तटबंध बन जाने से गंगा की मुख्य धारा मंदिर के सामने आ गई है। इसके चलते मंदिर को नुकसान पहुंच रहा है। तटबंध निर्माण के दौरान मंदिर में जाने के लिए संपर्क मार्ग भी नहीं छोड़ा गया है। ग्रामीण वीरेंद्र, अजय पाल, प्रदीप कुमार ने मांग की कि जिला प्रशासन को तटबंध से मंदिर में जाने के लिए रास्ता और मंदिर को तेज पानी से होने वाले नुकसान से बचाव के उपाय करने चाहिएं। ग्रामीण अमित कुमार ने बताया के मंदिर की पश्चिम दिशा में गंगा नदी की ओर से एक सुरक्षा दीवार बनानी चाहिए थी, जिससे मंदिर को नुकसान होने से बचाया जा सकता है। मुकेश कुमार ने बताया के मंदिर से सैकड़ों गांव के लोगों की आस्था जुड़ी है। हरिद्वार के बाद गंगा किनारे पक्का घाट बालावाली में ही है। यहां त्योहारों पर सैकड़ों लोग स्नान के लिए जाते हैं। पौराणिक मंदिर को बचाने के लिए जिला प्रशासन को कदम उठाने चाहिएं।
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पहले मंदिर की पूर्व दिशा में खुला मैदान था। जलस्तर बढ़ने पर पानी मंदिर से होता हुआ खुले मैदान में चला जाता था। इससे मंदिर को कोई नुकसान नहीं होता था। तटबंध बन जाने से गंगा की मुख्य धारा मंदिर के सामने आ गई है। इसके चलते मंदिर को नुकसान पहुंच रहा है। तटबंध निर्माण के दौरान मंदिर में जाने के लिए संपर्क मार्ग भी नहीं छोड़ा गया है। ग्रामीण वीरेंद्र, अजय पाल, प्रदीप कुमार ने मांग की कि जिला प्रशासन को तटबंध से मंदिर में जाने के लिए रास्ता और मंदिर को तेज पानी से होने वाले नुकसान से बचाव के उपाय करने चाहिएं। ग्रामीण अमित कुमार ने बताया के मंदिर की पश्चिम दिशा में गंगा नदी की ओर से एक सुरक्षा दीवार बनानी चाहिए थी, जिससे मंदिर को नुकसान होने से बचाया जा सकता है। मुकेश कुमार ने बताया के मंदिर से सैकड़ों गांव के लोगों की आस्था जुड़ी है। हरिद्वार के बाद गंगा किनारे पक्का घाट बालावाली में ही है। यहां त्योहारों पर सैकड़ों लोग स्नान के लिए जाते हैं। पौराणिक मंदिर को बचाने के लिए जिला प्रशासन को कदम उठाने चाहिएं।
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