बिजनौर: कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर अड़े किसान, दी ये बड़ी चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर किसानों ने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, धरना जारी रहेगा।
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में बकाया गन्ना भुगतान, बिजली समस्या समेत कई मांगों को लेकर किसानों ने कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसान नेता सरदार वीएम सिंह भी धरना देने पहुंच गए हैं। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, धरना चलता रहेगा।
वहीं बताया गया कि सैकड़ों की संख्या में किसान कलक्ट्रेट पर जुट चुके हैं। उधर, प्रशासन किसानों से ज्ञापन लेने की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि किसानों को पिछले 12 सालों का विलंब गन्ना भुगतान का ब्याज लेने के लिए 15 जुलाई को लखनऊ कूच करना होगा। ये चुनाव का साल है। लोहा गरम है और किसानों को चोट मारनी है। योगी बाबा को किसानों के वोट चाहिए तो विलंब गन्ना भुगतान पर ब्याज देना होगा। गन्ना बोने वाले हर किसान को आराम से प्रति एकड़ जमीन पर 25 से 30 हजार रुपये का ब्याज मिल जाएगा। वहीं, प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद धरना जारी रखने का एलान कर दिया गया। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि अब डीसीओ कार्यालय पर धरना चलेगा।
कलक्ट्रेट में किसान महापंचायत में सरदार वीएम सिंह ने कहा कि कोरोना के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपये कोरोना की वजह से हुई समस्या से निपटने को रखे हैं। किसानों का मिलों पर बकाया व ब्याज सहित केवल 20-22 हजार करोड़ ही बनता है। सरकार किसानों को यह पैसा ग्रांट में नहीं केवल उधार दे दे। मिल मालिकों के पैसे देने पर किसान पैसा सरकार को दे देंगे। कहा कि बाढ़ से खादर के किसानों का बुरा हाल है। कोरोना के समय हर घर में बुखार आया। तब किसान का पैसा दबा हुआ था। ऐसे में बुखार से परिवार के किसी सदस्य की जान चली जाए तो कैसा लगेगा। कहा कि अफसरों से पूछो कि हर सोसायटी पर किसानों का कितना ब्याज बकाया है। अब ब्याज लेने को लखनऊ कूच किया जाएगा।
मिल मालिकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन तिलों में इतना तेल नहीं कि किसानों का पैसा न दें। जब दिल्ली में संगठन का धरना चल रहा था तो सरकार ने किसानों को दिल्ली जाने से रोका और जब उन्होंने धरना खत्म कर दिया तो किसी को नहीं रोका। सरकार फिर किसानों को लखनऊ जाने से रोकेगी, लेकिन किसी को रुकना नहीं है। अगर ब्याज ले लिया तो आने वाली नस्लों को गन्ना भुगतान समय से मिलेगा। प्रति एकड़ जमीन पर 25 से 30 हजार रुपये का ब्याज मिलेगा। हर किसान को डीसीओ ऑफिस से जानकारी दिलाई जाएगी कि उन्हें कितना ब्याज मिलेगा। आज किसानों के बच्चे खेती नहीं करते क्योंकि ये घाटे का सौदा हो गई है।
कहा कि योगी बाबा को नहीं दिख रहा कि चार साल से गन्ने के दाम नहीं बढ़े हैं। लखनऊ में गन्ने का दाम 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की आवाज उठाई जाएगी। 301 रुपये प्रति क्विंटल की तो लागत ही आ रही है। अगर 450 रुपये का रेट मिला तो हर एकड़ पर कम से कम 50 हजार रुपये का फायदा होगा। जिले के नहीं लखनऊ के नेताओं और अफसरों से गन्ना दाम तय होगा। 15 जुलाई को घर से निकलकर लखनऊ जाना ही होगा। किसान इस गलतफहमी में न रहें कि अखिलेश और योगी सरकार ने दाम नहीं बढ़ाए और मायावती सरकार में बढ़े थे। तब तो दाम पिछले सालों से कम कर दिए गए थे। तब वे कोर्ट गए थे और किसानों को गन्ने का सही दाम दिलाया था। लेकिन वीएम सिंह की कोशिश और कोर्ट के आदेश के बाद भी किसान के घर पैसा नहीं पहुंचे तो कोई फायदा नहीं है।
दो साल पहले हुए थे ब्याज देने के आदेश
केन कमिश्नर ने 25 मार्च 2019 को गन्ना भुगतान पर ब्याज देने के आदेश दिए हैं, जिसे किसान लेकर रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि एमएसपी था है और रहेगा, लेकिन इस पर खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने को तैयार नहीं हैं। अगर कोई उद्योगपति किसी फसल का भंडारण कर लेगा तो अगले साल व किसान से मनमाने दाम पर फसल खरीदेगा। चुटकी लेते हुए कहा कि वे किसी के साथ अलग बैठकर बात नहीं करते हैं। अगर ऐसा करते तो उन्हें भी दो गार्ड मिल जाते। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि अफसर आंकड़ों में भुगतान का हवाला देकर किसानों को ठग रहे हैं। बिलाई चीनी मिल किसानों का पैसा सालों से समय पर नहीं दे रही। महापंचायत की अध्यक्षता भीम सिंह, संचालन वेदप्रकाश सिंह ने किया। इस दौरान पश्चिमी यूपी महासचिव कैलाश लांबा, अंकुर चौधरी, गौरव कुमार, राजपाल भगत, ओमराज राठी, मनीष, विजेंद्र, भूपेंद्र राठी, कपिल राणा, राकेश आदि मौजूद रहे।
बकाया से ज्यादा अटका है ब्याज
सरदार वीएम सिंह ने कहा कि बिजनौर के गन्ने के बकाया से ज्यादा तो किसानों का ब्याज बकाया। चीनी मिलों को नियम के अनुसार किसानों को पिछले 12 सालों का ब्याज देना है। यह जिले में कम से कम 600 करोड़ बनता है। ब्याज मिलेगा तो किसान के हर घर में पैसा जाएगा। किसान को ये पैसा मिल मालिकों पर किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना है। ये पैसा तभी मिलेगा जब किसान लखनऊ जाकर आवाज उठाएंगे।
आरसी काटने पर लगाई जाए रोक
किसानों के बीच एसडीएम विक्रमादित्य सिंह मलिक, डीसीओ यशपाल सिंह व सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता मिल अफसरों के साथ बात करने पहुंचे। सरदार वीएम सिंह ने उनसे कहा कि ब्याज सहित गन्ना भुगतान न होने तक किसानों की आरसी न काटी जाए और किसानों को उसके गन्ने पर मिलने वाला ब्याज बताया जाए। कहा कि भुगतान न मिलने तक आरसी काटने पर कोर्ट ने भी रोक लगा रखी है। डीसीओ यशपाल सिंह ने बताया कि पिछले कुछ सालों का 600 करोड़ का ब्याज बकाया है। बिलाई मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह ने पांच करोड़ का भुगतान करने की बात कही तो किसानों ने इसे लेने से मना कर दिया।