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Bijnor News: वेद मंत्रों की गूंज से तीन हाथी शिशुओं के नामकरण की साक्षी बनी हाथीशाला

Sat, 21 Feb 2026 01:41 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 01:41 AM IST
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The elephant stable witnessed the naming ceremony of three baby elephants amidst the chanting of Vedic mantras.
कालागढ़। कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला को आठ वर्ष में वेद मंत्रों की गूंज के साथ तीन हाथी के शिशुओं के नामकरण की साक्षी बनने का गौरव मिला है। यहां तीन हाथी शिशुओं का नामकरण विधिवत किया गया।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क की कालागढ़ स्थित हाथीशाला वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए बनाई गई है। हाथीशाला में हाथियों को भरपूर प्यार दुलार के साथ कुशल व प्रशिक्षित महावतों की निगरानी में रखा जाता है। वन अधिकारी व कर्मी यहां वन्यजीवों के साथ अपने बच्चों जैसा व्यवहार करते हैं। इनके स्वास्थ्य के लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व के चिकित्साधिकारी समय समय पर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करते हैं, जिसके चलते यहां रहने वाले हाथी उनके प्रति स्नेह का भाव रखते हैं। वह बाहरी लोगों को देखकर छिप जाते हैं, शर्मा जाते हैं। उनसे दूरी बनाए रखते हैं। सुरक्षा के लिए वन कर्मी यहां तैनात रहते हैं। वन्यजीव बीमारी/वायरस आदि से बचे रहें, इसके लिए प्रवेश द्वार पर पानी रास्ते में जमा किया गया है। उस पानी को पार कर ही अंदर आते हैं।
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सावन, खुशी व मालिनी दूध पीते शिशुओं को यहां मिला नाम

हाथी शाला में कर्नाटक से आई हथिनी कन्चनभा ने शिशु को जन्म दिया। जिसका नाम दो अगस्त 2018 को सावन, 14 मई 2012 को गंगा की शिशु को खुशी व अब 18 फरवरी 2026 को मालिनी का नाम विधिवत रूप से दिया गया। सावन और खुशी का लालन पालन महावत सुभाष राभा ने किया। अब मालिनी का लालन पालन रूप्पन बासुमतारी कर रहे हैं। सावन को वन दरोगा शादाब आलम, खुशी को प्रकाश चंद मठपाल व अब मालिनी को भारत सिंह रावत का दामन पकड़कर बचपन जीने का अवसर मिला है। यह जीव इन्हें अपना सबसे निकट हितैशी मानते हैं।
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रूठने मनाने और डांट खाकर चुप रहने व जिद करना भी दिखता है

पार्क वार्डन बिंदरपाल/वनक्षेत्राधिकारी एनके रूवाली का कहना है कि हाथीशाला में हाथियों के शावक मानव शिशु के समान रूठते हैं। उन्हें मनाने का प्रयास किया जाता है। कई बार जिद करने पर डांट खाकर चुप बैठ जाते हैं। अपने महावत और रोज सेवा करने वाले वन कर्मी इनके खास दोस्त हैं। दौड़कर उनके पास आ जाते हैं। दुलार और प्यार का संगम आंखों को नम करने को काफी है। हर्षोल्लास की चिंघाड़ भी सुनाई देती है।
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