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Bijnor News: जमीन का बैनामा और दाखिल खारिज का खर्च भी कर्ज में जोड़ा
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धारा मोटर फाइनेंस कंपनी के द्वारा दिए गए कर्ज के खाते में जोड़ा गया दाखिल खारिज का खर्च। (लाल
- बिजनौर की धारा मोटर फाइनेंस के मकड़जाल में फंसा किसान
- फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर ने कर्ज देने से पहले कराया जमीन का बैनामा, अब किसी और बेच दी
- दाखिल खारिज में आया 12 हजार का खर्च भी किसान के लोन खाते में चढ़ाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। साहूकार हो फाइनेंस कंपनी इनसे कर्ज लेने वाला बर्बाद होना तय है। दरअसल बिजनौर की धारा मोटर फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने का मामला पुलिस की जांच के दायरे में है। उक्त कंपनी ने किसान को कर्ज देते वक्त आठ बीघा जमीन का बैनामा कराया। बैनामा और दाखिल खारिज में आने खर्च को भी कर्ज में शामिल कर लिया। फिलहाल एक पहलू पर जांच की जा रही हैं। जांच के बाद कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
फाइनेंस कंपनी ने बतौर बैनामा गिरवी रखी जमीन को किसी अन्य को बेच दिया। जिसके बाद किसान ने कंपनी के द्वारा की धोखाधड़ी के खिलाफ एसपी से शिकायत की। गोपालपुर के रहने वाले पीड़ित किसान ने आरोप लगाया कि धारा फाइनेंस कंपनी से साल 2014 में अपनी जमीन गिरवी रखकर करीब नौ लाख रुपए का लोन लिया था। साल 2019 तक उन्होंने 30 लाख रुपये की अदायगी कर दी। 30 लाख की अदायगी कर उसे लगा कि उसका कर्ज चुकता हो गया है। इसके बाद जमीन का बैनामा लौटाने की गुहार लगाई। जिसके बाद कंपनी के डायरेक्टर गजेंद्र चौधरी बैनामा करने के लिए तारीख पर तारीख देते रहे। इसके बाद कोरोना लॉकडाउन लग गया। इसी बीच किसान का बेटा कैंसर से पीड़ित हुआ तो उसके इलाज के लिए इधर उधर भटका। कैंसर के चलते किसान के बेटे की मौत हो गई।
अब पिछले महीने किसान ने फिर से फाइनेंस कंपनी में जाकर जमीन लौटाने के लिए कहा। मगर कंपनी डायरेक्टर की नियत में कुछ और ही था। कंपनी के डायरेक्टर गजेंद्र चौधरी ने किसान की जमीन का बैनामा किसी और नाम कर दिया। जिसके बाद किसान ने कंपनी द्वारा की गई धोखाधड़ी को लेकर एसपी से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने अपर पुलिस अधीक्षक नगर को मामले की जांच सौंपी। जांच में दर्ज कराए गए बयान में कंपनी के डायरेक्टर ने एक करोड़ 24 लाख का बकाया होने की बात कही। ताज्जुब की बात तो देखिए 10 सालों में कर्ज की रकम 15 गुना तक बढ़ गई। शिकायती पत्र में दिए गए सबूतों में किसान ने बताया कि जमीन का बैनामा और दाखिल खारिज में आने वाला खर्च भी कर्ज के खाते में जोड़ा गया है। यानि उक्त खर्च पर भी कंपनी ने जमकर ब्याज जोड़ा।
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- फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर ने कर्ज देने से पहले कराया जमीन का बैनामा, अब किसी और बेच दी
- दाखिल खारिज में आया 12 हजार का खर्च भी किसान के लोन खाते में चढ़ाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। साहूकार हो फाइनेंस कंपनी इनसे कर्ज लेने वाला बर्बाद होना तय है। दरअसल बिजनौर की धारा मोटर फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने का मामला पुलिस की जांच के दायरे में है। उक्त कंपनी ने किसान को कर्ज देते वक्त आठ बीघा जमीन का बैनामा कराया। बैनामा और दाखिल खारिज में आने खर्च को भी कर्ज में शामिल कर लिया। फिलहाल एक पहलू पर जांच की जा रही हैं। जांच के बाद कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
फाइनेंस कंपनी ने बतौर बैनामा गिरवी रखी जमीन को किसी अन्य को बेच दिया। जिसके बाद किसान ने कंपनी के द्वारा की धोखाधड़ी के खिलाफ एसपी से शिकायत की। गोपालपुर के रहने वाले पीड़ित किसान ने आरोप लगाया कि धारा फाइनेंस कंपनी से साल 2014 में अपनी जमीन गिरवी रखकर करीब नौ लाख रुपए का लोन लिया था। साल 2019 तक उन्होंने 30 लाख रुपये की अदायगी कर दी। 30 लाख की अदायगी कर उसे लगा कि उसका कर्ज चुकता हो गया है। इसके बाद जमीन का बैनामा लौटाने की गुहार लगाई। जिसके बाद कंपनी के डायरेक्टर गजेंद्र चौधरी बैनामा करने के लिए तारीख पर तारीख देते रहे। इसके बाद कोरोना लॉकडाउन लग गया। इसी बीच किसान का बेटा कैंसर से पीड़ित हुआ तो उसके इलाज के लिए इधर उधर भटका। कैंसर के चलते किसान के बेटे की मौत हो गई।
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अब पिछले महीने किसान ने फिर से फाइनेंस कंपनी में जाकर जमीन लौटाने के लिए कहा। मगर कंपनी डायरेक्टर की नियत में कुछ और ही था। कंपनी के डायरेक्टर गजेंद्र चौधरी ने किसान की जमीन का बैनामा किसी और नाम कर दिया। जिसके बाद किसान ने कंपनी द्वारा की गई धोखाधड़ी को लेकर एसपी से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने अपर पुलिस अधीक्षक नगर को मामले की जांच सौंपी। जांच में दर्ज कराए गए बयान में कंपनी के डायरेक्टर ने एक करोड़ 24 लाख का बकाया होने की बात कही। ताज्जुब की बात तो देखिए 10 सालों में कर्ज की रकम 15 गुना तक बढ़ गई। शिकायती पत्र में दिए गए सबूतों में किसान ने बताया कि जमीन का बैनामा और दाखिल खारिज में आने वाला खर्च भी कर्ज के खाते में जोड़ा गया है। यानि उक्त खर्च पर भी कंपनी ने जमकर ब्याज जोड़ा।
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