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बसपा से मंडल को-ऑर्डिनेटर हुए निष्कासित
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 12 Sep 2015 12:10 AM IST
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बिजनौर। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर पार्टी के मुरादाबाद मंडल के कोर्डिनेटर सत्यपाल सिंह व राम अवतार सैनी को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
राम अवतार सैनी से बसपा के सैनी समाज के नेता नाराज थे तो सत्यपाल सिंह पार्टी की ओर से सामग्री का भेजा गया ट्रक बेचने के मामले में फंसे हुए थे। दोनों से पार्टी के महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने स्पष्टीकरण भी मांगा था।
मंडल को-ऑर्डिनेटर सत्यपाल सिंह की गिनती पार्टी के पुराने नेताओं में होती थी। बसपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में सत्यपाल सिंह पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे और उनकी खूब तूती बोलती थी। बसपा सरकार के दौरान चुनाव से पूर्व पार्टी की ओर से सामग्री के भेजे गए ट्रक को सत्यपाल सिंह ने बिजनौर की एक पेपर मिल में बेच डाला था। इस बात पर पार्टी हाईकमान सत्यपाल सिंह से खफा था।
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हाईकमान को इस मामले की खूब शिकायत हुई थी। इसके बाद भी सत्यपाल सिंह पार्टी में बने रहे। राम अवतार सैनी कई दलों में हाथ निकालकर फिर से अपने पुराने घर बसपा में लौट आए थे। यह बात सैनी समाज के पार्टी के नेताओं को नागवार गुजरी।
राम अवतार सैनी इन नेताओं की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। राम अवतार सैनी की भी पार्टी हाई कमान से खूब शिकायतें की गईं। दो सितंबर को मुरादाबाद आए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सत्यपाल सिंह के सामग्री बेचने व राम अवतार सैनी की शिकायत मिलने के मामले में दोनों की जमकर खबर ली थी। दोनों नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया था। तभी से दोनों नेताओं की पार्टी से विदाई तय मानी जा रही थी।
सूत्रों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी रिपोर्ट मायावती को दे दी थी। इसके बाद दोनों को पार्टी से निकालने का फैसला हुआ। सत्यपाल सिंह व राम अवतार सैनी बसपा के मंडल को-ऑर्डिनेटर के पद पर थे। दोनों को शुक्रवार को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
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राम अवतार सैनी से बसपा के सैनी समाज के नेता नाराज थे तो सत्यपाल सिंह पार्टी की ओर से सामग्री का भेजा गया ट्रक बेचने के मामले में फंसे हुए थे। दोनों से पार्टी के महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने स्पष्टीकरण भी मांगा था।
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मंडल को-ऑर्डिनेटर सत्यपाल सिंह की गिनती पार्टी के पुराने नेताओं में होती थी। बसपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में सत्यपाल सिंह पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे और उनकी खूब तूती बोलती थी। बसपा सरकार के दौरान चुनाव से पूर्व पार्टी की ओर से सामग्री के भेजे गए ट्रक को सत्यपाल सिंह ने बिजनौर की एक पेपर मिल में बेच डाला था। इस बात पर पार्टी हाईकमान सत्यपाल सिंह से खफा था।
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हाईकमान को इस मामले की खूब शिकायत हुई थी। इसके बाद भी सत्यपाल सिंह पार्टी में बने रहे। राम अवतार सैनी कई दलों में हाथ निकालकर फिर से अपने पुराने घर बसपा में लौट आए थे। यह बात सैनी समाज के पार्टी के नेताओं को नागवार गुजरी।
राम अवतार सैनी इन नेताओं की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। राम अवतार सैनी की भी पार्टी हाई कमान से खूब शिकायतें की गईं। दो सितंबर को मुरादाबाद आए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सत्यपाल सिंह के सामग्री बेचने व राम अवतार सैनी की शिकायत मिलने के मामले में दोनों की जमकर खबर ली थी। दोनों नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया था। तभी से दोनों नेताओं की पार्टी से विदाई तय मानी जा रही थी।
सूत्रों के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी रिपोर्ट मायावती को दे दी थी। इसके बाद दोनों को पार्टी से निकालने का फैसला हुआ। सत्यपाल सिंह व राम अवतार सैनी बसपा के मंडल को-ऑर्डिनेटर के पद पर थे। दोनों को शुक्रवार को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।