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ग्रेड सिस्टम खत्म होने का मिला फायदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 30 May 2018 12:25 AM IST
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खुशी का इजहार करते एएन इंटरनेशनल के छात्र छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में सीबीएसई में पहली बार विद्यार्थियों को कक्षा दस में नंबर दिए गए हैं। अब तक विद्यार्थियों को सीजीपीए के आधार पर रैंक दी जाती थी। सीजीपीए 10 सर्वोत्तम रैंक होती थी। लेकिन नंबर सिस्टम लागू होते ही विद्यार्थियों पर नंबरों की बरसात हुई है।
विद्यार्थी अच्छे से अच्छे नंबर पाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। पहले सीबीएसई में कक्षा 12 के लिए तो परीक्षाफल में नंबरों के आधार पर परीक्षाफल घोषित होता था, लेकिन कक्षा दस में रैंक दी जाती थी। कक्षा दस में सीजीपीए(कुमुलेटिव ग्रेड प्वॉइंट एव्रेज) के आधार पर रैंक दी जाती थी। अधिकतम रैंक सीजीपीए 10 तक होती थी। एक सीजीपीए में 9.5 प्रतिशत अंक तक होते थे। यानि अगर किसी को सीपीपीए 9.2 मिली होती तो इसका मतलब होता कि विद्यार्थी को 87.4 प्रतिशत अंक मिले हैं। सीजीपीए 10 रैंक के आधार पर माना जाता था कि विद्यार्थी को अधिकतम अंक मिले हैं जो 95 प्रतिशत तक के आसपास हैं। लेकिन नंबर की व्यवस्था शुरू होते ही नंबरों की बरसात विद्यार्थियों पर हुई है। जिले की बेटी रिमझिम अग्रवाल ने तो 500 में से 499 अंक प्राप्त कर बोर्ड ही टॉप कर दिया है। विद्यार्थियों का भी कहना है कि बोर्ड में ग्रेड के बजाए नंबर ही मिलने चाहिए। यह विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक है।
ट्रॉफी चूमने का एहसास काफी सुखद ः रिमझिम
नजीबाबाद। तहसील की सीमा से सटे उत्तराखंड के शहर कोटद्वार निवासी कारोबारी नीरज अग्रवाल की पुत्री रिमझिम अग्रवाल ने छोटी उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। रिमझिम ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा को ऑल इंडिया स्तर पर टॉप किया। अपने साथ साथ स्कूल को बड़ी उपलब्धि दिलाने पर स्कूल के प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने होनहार रिमझिम को ट्राफी देकर सम्मानित किया। कुछ ही पलों में शिक्षक-शिक्षिकाओं, परिजनों, शुभचिंतकों, सहपाठियों और मीडिया ने रिमझिम की एक झलक पाने और बात करने के लिए घेर लिया। बगैर ट्यूशन उपलब्धि हासिल करने वाली रिमझिम ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपनी मेहनत से ज्यादा पिता नीरज अग्रवाल, मां अनामिका अग्रवाल, बड़े भाई नमन अग्रवाल, प्रधानाचार्य अजीत सिंह के प्रोत्साहन को दिया।
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सेना में अधिकारी बनना चाहता है आरूष
धामपुर। प्रियंका सीनियर सेकेंड्री स्कूल के टॉपर और जिले में द्वितीय स्थान पाने वाले सीबीएसई 10वीं के छात्र आरूष प्रताप सिंह का कहना है कि वह सेना का अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहता है। उसका सपना मुरादाबाद टीएमयू की क्रिकेट अकादमी में एक अच्छा क्रिकेटर बन कर देश के लिए खेलना भी है।स्योहारा क्षेत्र के गांव सिपाहियोवाला निवासी आरूष प्रताप सिंह का कहना है कि वह एनडीए में बड़ा अधिकारी बन कर देेश की सेवा करना चाहता था। उसने इसके लिए तैयारी शुरू कर रखी है। वह मुरादाबाद में एक अकादमी में क्रिकेट का प्रशिक्षण भी ले रहा है। आरूष के पिता संजीव कुमार मुकुरपुरी के इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। जबकि माता कुसुम चौहान कादराबाद खुर्द के प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका हैं। उसका छोटा भाई देवांश प्रताप सिंह पांचवीं कक्षा में प्रियंका स्कूल का छात्र है। आरूष ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुओं को दिया।
आईएएस अधिकारी बनना चाहती है अनुष्का
बिजनौर। सीबीएसई में जिले में 98.4 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली अनुष्का सिंह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। अनुष्का सिंह के अनुसार सिस्टम में रहकर ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है। अनुष्का के अनुसार आईएएस अधिकारी योजनाओं को सही तरीके से चलाते और चलवाते हैं। इससे ही जनता को योजनाओं का लाभ मिलता है। अनुष्का का कहना है कि वह हर दिन स्कूल से अलग पांच घंटे पढ़ती है। अनुष्का के पिता गांव आदमपुर निवासी कामेंद्र सिंह परिषदीय विद्यालय में हैड मास्टर हैं। अनुष्का के अनुसार उसके पिता उसे पढ़ाई के लिए बहुत प्रेरित करते हैं, लेकिन कभी किसी तरह का दबाव नहीं डालते हैं। जिसकी वहज से उसके मन पर परीक्ष्ाा को लेकर किसी भी तरह का दबाव नहीं रहा। प्रसन्न मन से उसने हमेशा पढ़ाई की, उसी की वजह से उसे सफलता मिली है।
विद्यार्थी अच्छे से अच्छे नंबर पाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। पहले सीबीएसई में कक्षा 12 के लिए तो परीक्षाफल में नंबरों के आधार पर परीक्षाफल घोषित होता था, लेकिन कक्षा दस में रैंक दी जाती थी। कक्षा दस में सीजीपीए(कुमुलेटिव ग्रेड प्वॉइंट एव्रेज) के आधार पर रैंक दी जाती थी। अधिकतम रैंक सीजीपीए 10 तक होती थी। एक सीजीपीए में 9.5 प्रतिशत अंक तक होते थे। यानि अगर किसी को सीपीपीए 9.2 मिली होती तो इसका मतलब होता कि विद्यार्थी को 87.4 प्रतिशत अंक मिले हैं। सीजीपीए 10 रैंक के आधार पर माना जाता था कि विद्यार्थी को अधिकतम अंक मिले हैं जो 95 प्रतिशत तक के आसपास हैं। लेकिन नंबर की व्यवस्था शुरू होते ही नंबरों की बरसात विद्यार्थियों पर हुई है। जिले की बेटी रिमझिम अग्रवाल ने तो 500 में से 499 अंक प्राप्त कर बोर्ड ही टॉप कर दिया है। विद्यार्थियों का भी कहना है कि बोर्ड में ग्रेड के बजाए नंबर ही मिलने चाहिए। यह विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक है।
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ट्रॉफी चूमने का एहसास काफी सुखद ः रिमझिम
नजीबाबाद। तहसील की सीमा से सटे उत्तराखंड के शहर कोटद्वार निवासी कारोबारी नीरज अग्रवाल की पुत्री रिमझिम अग्रवाल ने छोटी उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। रिमझिम ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा को ऑल इंडिया स्तर पर टॉप किया। अपने साथ साथ स्कूल को बड़ी उपलब्धि दिलाने पर स्कूल के प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने होनहार रिमझिम को ट्राफी देकर सम्मानित किया। कुछ ही पलों में शिक्षक-शिक्षिकाओं, परिजनों, शुभचिंतकों, सहपाठियों और मीडिया ने रिमझिम की एक झलक पाने और बात करने के लिए घेर लिया। बगैर ट्यूशन उपलब्धि हासिल करने वाली रिमझिम ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपनी मेहनत से ज्यादा पिता नीरज अग्रवाल, मां अनामिका अग्रवाल, बड़े भाई नमन अग्रवाल, प्रधानाचार्य अजीत सिंह के प्रोत्साहन को दिया।
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सेना में अधिकारी बनना चाहता है आरूष
धामपुर। प्रियंका सीनियर सेकेंड्री स्कूल के टॉपर और जिले में द्वितीय स्थान पाने वाले सीबीएसई 10वीं के छात्र आरूष प्रताप सिंह का कहना है कि वह सेना का अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहता है। उसका सपना मुरादाबाद टीएमयू की क्रिकेट अकादमी में एक अच्छा क्रिकेटर बन कर देश के लिए खेलना भी है।स्योहारा क्षेत्र के गांव सिपाहियोवाला निवासी आरूष प्रताप सिंह का कहना है कि वह एनडीए में बड़ा अधिकारी बन कर देेश की सेवा करना चाहता था। उसने इसके लिए तैयारी शुरू कर रखी है। वह मुरादाबाद में एक अकादमी में क्रिकेट का प्रशिक्षण भी ले रहा है। आरूष के पिता संजीव कुमार मुकुरपुरी के इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। जबकि माता कुसुम चौहान कादराबाद खुर्द के प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका हैं। उसका छोटा भाई देवांश प्रताप सिंह पांचवीं कक्षा में प्रियंका स्कूल का छात्र है। आरूष ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुओं को दिया।
आईएएस अधिकारी बनना चाहती है अनुष्का
बिजनौर। सीबीएसई में जिले में 98.4 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली अनुष्का सिंह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। अनुष्का सिंह के अनुसार सिस्टम में रहकर ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है। अनुष्का के अनुसार आईएएस अधिकारी योजनाओं को सही तरीके से चलाते और चलवाते हैं। इससे ही जनता को योजनाओं का लाभ मिलता है। अनुष्का का कहना है कि वह हर दिन स्कूल से अलग पांच घंटे पढ़ती है। अनुष्का के पिता गांव आदमपुर निवासी कामेंद्र सिंह परिषदीय विद्यालय में हैड मास्टर हैं। अनुष्का के अनुसार उसके पिता उसे पढ़ाई के लिए बहुत प्रेरित करते हैं, लेकिन कभी किसी तरह का दबाव नहीं डालते हैं। जिसकी वहज से उसके मन पर परीक्ष्ाा को लेकर किसी भी तरह का दबाव नहीं रहा। प्रसन्न मन से उसने हमेशा पढ़ाई की, उसी की वजह से उसे सफलता मिली है।