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फोरलेन हाईवे निर्माण में हीलाहवाली रही तो निरस्त हो जाएगा टेंडर
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फोरलेन हाईवे निर्माण में हीलाहवाली रही तो निरस्त हो जाएगा टेंडर
बिजनौर। हरिद्वार से नगीना तक नेशनल हाईवे को फोरलेन किए जाने की बेहद धीमी रफ्तार पर दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। इसमें हाईवे प्राधिकरण के अफसरों ने निर्माण कंपनी को तीन महीने की मोहलत दी है। अगर काम में सुधार नहीं हुआ तो टेंडर भी निरस्त हो सकता है। दरअसल हाईवे का निर्माण बरसात के पहले से ही बंद है।
हरिद्वार से काशीपुर नेशनल हाईवे 74 को दो हजार करोड़ की लागत से फोरलेन में तब्दील किया जाना था। हालांकि नगीना से काशीपुर तक काम पूरा कर लिया गया। इस हिस्से में टोल की वसूली भी हो रही है जबकि हरिद्वार से नगीना तक काम की रफ्तार बेहद धीमी रही।
साल 2018 में काम चालू हुआ, जिसे 2020 तक पूरा करना था। लेकिन अभी तक फोरलेन का काम आधा अधूरा ही पड़ा है। कहीं कंकरीट डाल कर छोड़ दी गई तो कहीं मिट्टी डालने के बाद सड़क बनाने का काम नहीं हुआ।
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विभागीय सूत्रों की मानें तो नेशनल हाईवे प्राधिकरण के दिल्ली कार्यालय में इसी सप्ताह बृहस्पतिवार को मीटिंग हुई, जिसमें अफसरों ने हाईवे का निर्माण अभी तक पूरा नहीं होने पर चिंता जाहिर की। वहीं निर्माण कंपनी को चेेतावनी दी गई। निर्माण कंपनी को तीन महीने का वक्त दिया गया है, इन तीन महीनों में निर्माण की गति मेें तेजी दिखानी होगी। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो टेंडर भी तलवार लटक जाएगी। बता दें कि नगीना से काशीपुर तक एक कंपनी पहले भी काम छोड़कर जा चुकी है।
सड़क से नहीं जुड़े पुल
निर्माण का आलम ऐसा है कि रवासन, कोटावाली और पीलीनदी का पुल तैयार है, लेकिन पहुंच मार्ग नहीं बनने की वजह से सड़क से नहीं जुड़ पाया। कुछ पुलों के पिलर बन गए हैं। यानि काम आधा अधूरा है।
लोगों ने बना लिए अवैध कट
66 किमी लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण करना था, अब तक 46 किमी हो चुका है। उधर, जहां हाईवे बनाकर डिवाइडर भी बना दिया है, वहां कुछ जगहों पर ढाबे वालों या ग्रामीणों ने डिवाइडर तोड़कर अवैध कट बना लिए हैं। तीन दिन पहले भी मंडावली के पास जेसीबी से रात में डिवाइडर को तोड़कर अवैध कट बनाने का प्रयास हुआ था। आधे अधूरे निर्माण के बीच डायवर्जन के लिए लगाए गए बोर्ड अब गायब हैं, जिससे लोगों का पता नहीं चल रहा कि कौन सी लेन या सड़क पर चलना है।
वर्जन...
पहले वन विभाग की एनओसी की वजह से काम बंद रहा, अब काम तो चल रहा है लेकिन तेजी नहीं है। जिसके चलते दिल्ली में मीटिंग हो चुकी है। निर्माण कंपनी को तीन महीने का वक्त दिया गया है।
-बीपी पाठक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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बिजनौर। हरिद्वार से नगीना तक नेशनल हाईवे को फोरलेन किए जाने की बेहद धीमी रफ्तार पर दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। इसमें हाईवे प्राधिकरण के अफसरों ने निर्माण कंपनी को तीन महीने की मोहलत दी है। अगर काम में सुधार नहीं हुआ तो टेंडर भी निरस्त हो सकता है। दरअसल हाईवे का निर्माण बरसात के पहले से ही बंद है।
हरिद्वार से काशीपुर नेशनल हाईवे 74 को दो हजार करोड़ की लागत से फोरलेन में तब्दील किया जाना था। हालांकि नगीना से काशीपुर तक काम पूरा कर लिया गया। इस हिस्से में टोल की वसूली भी हो रही है जबकि हरिद्वार से नगीना तक काम की रफ्तार बेहद धीमी रही।
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साल 2018 में काम चालू हुआ, जिसे 2020 तक पूरा करना था। लेकिन अभी तक फोरलेन का काम आधा अधूरा ही पड़ा है। कहीं कंकरीट डाल कर छोड़ दी गई तो कहीं मिट्टी डालने के बाद सड़क बनाने का काम नहीं हुआ।
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विभागीय सूत्रों की मानें तो नेशनल हाईवे प्राधिकरण के दिल्ली कार्यालय में इसी सप्ताह बृहस्पतिवार को मीटिंग हुई, जिसमें अफसरों ने हाईवे का निर्माण अभी तक पूरा नहीं होने पर चिंता जाहिर की। वहीं निर्माण कंपनी को चेेतावनी दी गई। निर्माण कंपनी को तीन महीने का वक्त दिया गया है, इन तीन महीनों में निर्माण की गति मेें तेजी दिखानी होगी। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो टेंडर भी तलवार लटक जाएगी। बता दें कि नगीना से काशीपुर तक एक कंपनी पहले भी काम छोड़कर जा चुकी है।
सड़क से नहीं जुड़े पुल
निर्माण का आलम ऐसा है कि रवासन, कोटावाली और पीलीनदी का पुल तैयार है, लेकिन पहुंच मार्ग नहीं बनने की वजह से सड़क से नहीं जुड़ पाया। कुछ पुलों के पिलर बन गए हैं। यानि काम आधा अधूरा है।
लोगों ने बना लिए अवैध कट
66 किमी लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण करना था, अब तक 46 किमी हो चुका है। उधर, जहां हाईवे बनाकर डिवाइडर भी बना दिया है, वहां कुछ जगहों पर ढाबे वालों या ग्रामीणों ने डिवाइडर तोड़कर अवैध कट बना लिए हैं। तीन दिन पहले भी मंडावली के पास जेसीबी से रात में डिवाइडर को तोड़कर अवैध कट बनाने का प्रयास हुआ था। आधे अधूरे निर्माण के बीच डायवर्जन के लिए लगाए गए बोर्ड अब गायब हैं, जिससे लोगों का पता नहीं चल रहा कि कौन सी लेन या सड़क पर चलना है।
वर्जन...
पहले वन विभाग की एनओसी की वजह से काम बंद रहा, अब काम तो चल रहा है लेकिन तेजी नहीं है। जिसके चलते दिल्ली में मीटिंग हो चुकी है। निर्माण कंपनी को तीन महीने का वक्त दिया गया है।
-बीपी पाठक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई