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Bijnor News: जलीलपुर/चांदपुर - दस गांव बने टापू, 13 गांव की आबादी में घुसा पानी
Thu, 17 Aug 2023 12:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 17 Aug 2023 12:54 AM IST
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चांदपुर के जलीलपुर क्षेत्र में बाड़ में फंसे लोगाें को निकालकर लाती एसडीआरएफ की टीम।
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
जलीलपुर/चांदपुर (बिजनौर)। गंगा में भारी उफान के चलते जलीलपुर क्षेत्र के 10 गांव टापू बन गए हैं। इनके अलावा 13 गांव की आबादी में पानी घुस गया है। सड़कों पर चार से छह फीट तक गंगा का पानी बह रहा है। बाढ़ प्रभावित गांव वासियों में भय बना हुआ है। लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। गांव छोड़ते लोगों को पशुओं की चिंता सता रही है।
जलीलपुर क्षेत्र में बाढ़ के हालात को एक माह से ज्यादा हो गया है। दो दर्जन गांव के हजारों किसानों की फसलों में 12 जुलाई से लगातार पानी भरा है। 35 दिन में रविवार से पहले तक पांच बार गंगा का पानी सड़कों तक फैला है, मगर सोमवार को छठी बार देर रात पहुंचे पानी ने ग्रामीणों के होश उड़ा दिए। बाढ़ प्रभावित गांव वासियों ने जागकर रात गुजारी।
मंगलवार को सुबह होने तक गंगा के रौद्र रूप ने करीब 20 किलोमीटर में बसे गांवों के रास्तों सड़कों को चपेट में ले लिया व अनेक गांवों की आबादी में पानी घुस गया। पानी के तेज प्रवाह को देख ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया। ग्रामीणों के अनुसार सन 2013 में केदारनाथ त्रासदी के समय जितना पानी आया है। लगभग वही हालात है। जिन स्थानों पर दस साल से पानी नहीं आया था वहां अबकी बार गंगा का पानी चल रहा है। गांव नारनौर की आबादी में सन 2013 के बाद अबकी बार पानी घुसा है।
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जलीलपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में 2013 के बाद मंगलवार को सबसे अधिक पानी देखा गया। सोमवार देर शाम से तेजी से बढ़ना शुरू हुए पानी ने मंगलवार सुबह होने तक गंगा के निकटवर्ती सभी गांवों को चपेट मे ले लिया। गांव सलेमपुर-विजयनगर, कल्याण, मीरापुर सीकरी, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, नारनौर, जमालुदीनपुर, दत्तियाना, मुजफ्फरपुर खादर, स्याली, सुजातपुर खादर, कुमरिया, हुसैनपुर खासा आदि 13 गांव की आबादी में पानी घुसा है। घरों में पानी घुसने से ग्रामीणों का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है।
गांव मीरापुर सीकरी, कल्याण, सलेमपुर-विजयनगर, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, दत्तियाना, स्याली, मुजफ्फरपुर खादर, सुजातपुर खादर, कुमरिया आदि 10 गांव के चारों ओर पानी ही पानी है। चारों ओर पानी होने से गांव के हालात टापू जैसे हो गए हैं। इन गांव की सभी संपर्क व मुख्य सड़कों परकार से छह फीट तक पानी चल रहा हैं। जिसके चलते सड़कों पर वाहन चलाना संभव ही नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जलीलपुर/चांदपुर (बिजनौर)। गंगा में भारी उफान के चलते जलीलपुर क्षेत्र के 10 गांव टापू बन गए हैं। इनके अलावा 13 गांव की आबादी में पानी घुस गया है। सड़कों पर चार से छह फीट तक गंगा का पानी बह रहा है। बाढ़ प्रभावित गांव वासियों में भय बना हुआ है। लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। गांव छोड़ते लोगों को पशुओं की चिंता सता रही है।
जलीलपुर क्षेत्र में बाढ़ के हालात को एक माह से ज्यादा हो गया है। दो दर्जन गांव के हजारों किसानों की फसलों में 12 जुलाई से लगातार पानी भरा है। 35 दिन में रविवार से पहले तक पांच बार गंगा का पानी सड़कों तक फैला है, मगर सोमवार को छठी बार देर रात पहुंचे पानी ने ग्रामीणों के होश उड़ा दिए। बाढ़ प्रभावित गांव वासियों ने जागकर रात गुजारी।
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मंगलवार को सुबह होने तक गंगा के रौद्र रूप ने करीब 20 किलोमीटर में बसे गांवों के रास्तों सड़कों को चपेट में ले लिया व अनेक गांवों की आबादी में पानी घुस गया। पानी के तेज प्रवाह को देख ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया। ग्रामीणों के अनुसार सन 2013 में केदारनाथ त्रासदी के समय जितना पानी आया है। लगभग वही हालात है। जिन स्थानों पर दस साल से पानी नहीं आया था वहां अबकी बार गंगा का पानी चल रहा है। गांव नारनौर की आबादी में सन 2013 के बाद अबकी बार पानी घुसा है।
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जलीलपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में 2013 के बाद मंगलवार को सबसे अधिक पानी देखा गया। सोमवार देर शाम से तेजी से बढ़ना शुरू हुए पानी ने मंगलवार सुबह होने तक गंगा के निकटवर्ती सभी गांवों को चपेट मे ले लिया। गांव सलेमपुर-विजयनगर, कल्याण, मीरापुर सीकरी, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, नारनौर, जमालुदीनपुर, दत्तियाना, मुजफ्फरपुर खादर, स्याली, सुजातपुर खादर, कुमरिया, हुसैनपुर खासा आदि 13 गांव की आबादी में पानी घुसा है। घरों में पानी घुसने से ग्रामीणों का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है।
गांव मीरापुर सीकरी, कल्याण, सलेमपुर-विजयनगर, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, दत्तियाना, स्याली, मुजफ्फरपुर खादर, सुजातपुर खादर, कुमरिया आदि 10 गांव के चारों ओर पानी ही पानी है। चारों ओर पानी होने से गांव के हालात टापू जैसे हो गए हैं। इन गांव की सभी संपर्क व मुख्य सड़कों परकार से छह फीट तक पानी चल रहा हैं। जिसके चलते सड़कों पर वाहन चलाना संभव ही नहीं है।