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खेतों में सिंघाड़ा पैदा करने प्रणेता पद्म श्री किसान सेठपाल सिंह से मुलाकात
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नजीबाबाद - खेत में सिंघाड़े की खेती करते किसान।
- फोटो : NAZIBABAD
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खेतों में सिंघाड़ा पैदा करने की तकनीक, बढ़ रहा रूझान
नजीबाबाद। सिंघाड़े की फसल आमतौर पर तालाबों में पैदा होती है। कृषक सेठपाल सिंह ने करीब ढाई दशक पूर्व सिंघाड़े की फसल खेतों में पैदा करने का सिलसिला शुरू किया। सिंघाड़े की फसल खेतों में उगाने के फायदों को देखते हुए तालाबों के साथ खेतों में सिंघाड़ा उगाने के लिए किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
कृषि विविधीकरण में हाल ही में पद्मश्री अवार्ड लेने वाले नंदी फिरोजपुर सहारनपुर निवासी किसान सेठपाल सिंह ने ढाई दशक पूर्व 1997 में खेतों में सिंघाड़े की फसल उगाने का नया तरीका इजाद किया था। आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पहुंचे किसान सेठपाल सिंह ने अमर उजाला से मुलाकात में खेतों में सिंघाड़े की फसल खेतों में पैदा कर अच्छा मुनाफा कमाने की जानकारी दी। किसान का दावा है कि खेतों में सिंघाड़ा उगाकर प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल सिंघाड़ा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। खेतों में उगने वाली सिंघाड़े की फसल तालाबों की गंदगी से मुक्त होती है। इसके लिए खेतों के चारों ओर मेढ बांधकर पानी की उपलब्धता बनाने की जरूरत होती है।
धान की तर्ज पर सिंघाड़े की फसल को पानी उपलब्ध कराया जाता है। खेतों में आधा फीट से एक फीट तक पानी सिंघाड़े की फसल तैयार होने तक बनाए रखने की जरूरत होती है। सेठपाल सिंह का कहना है कि सिंघाड़े से किसान प्रति एकड़ दो से ढाई लाख रुपये तक आमदनी ले सकता है।
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खेतों में सिंघाड़ा पैदा करने के फायदे
खेतों में सिंघाड़े की फसल लेने से आसपास का वाटर लेवल ऊंचा रहता है। फसल के अवशेष खेतों में सड़ने-गलने से खेतों की उर्वरा क्षमता में वृद्धि होती है। खेतों में जीवाश्म कार्बन की बढ़ोत्तरी होती है और कीटनाशी पैदा नहीं होते।
फसल लगाने का उत्तम समय
सिंघाड़े की रोपाई जून के प्रथम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक की जाती है। 15 सितंबर से दिसंबर तक फसल बाजार में आती है। सिंघाड़े की मई में फसल लगाकर अगेती फसल के रूप में किसानों को अगस्त तक फसल बाजार में आने से अच्छा मुनाफा मिलता है।
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नजीबाबाद। सिंघाड़े की फसल आमतौर पर तालाबों में पैदा होती है। कृषक सेठपाल सिंह ने करीब ढाई दशक पूर्व सिंघाड़े की फसल खेतों में पैदा करने का सिलसिला शुरू किया। सिंघाड़े की फसल खेतों में उगाने के फायदों को देखते हुए तालाबों के साथ खेतों में सिंघाड़ा उगाने के लिए किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
कृषि विविधीकरण में हाल ही में पद्मश्री अवार्ड लेने वाले नंदी फिरोजपुर सहारनपुर निवासी किसान सेठपाल सिंह ने ढाई दशक पूर्व 1997 में खेतों में सिंघाड़े की फसल उगाने का नया तरीका इजाद किया था। आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पहुंचे किसान सेठपाल सिंह ने अमर उजाला से मुलाकात में खेतों में सिंघाड़े की फसल खेतों में पैदा कर अच्छा मुनाफा कमाने की जानकारी दी। किसान का दावा है कि खेतों में सिंघाड़ा उगाकर प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल सिंघाड़ा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। खेतों में उगने वाली सिंघाड़े की फसल तालाबों की गंदगी से मुक्त होती है। इसके लिए खेतों के चारों ओर मेढ बांधकर पानी की उपलब्धता बनाने की जरूरत होती है।
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धान की तर्ज पर सिंघाड़े की फसल को पानी उपलब्ध कराया जाता है। खेतों में आधा फीट से एक फीट तक पानी सिंघाड़े की फसल तैयार होने तक बनाए रखने की जरूरत होती है। सेठपाल सिंह का कहना है कि सिंघाड़े से किसान प्रति एकड़ दो से ढाई लाख रुपये तक आमदनी ले सकता है।
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खेतों में सिंघाड़ा पैदा करने के फायदे
खेतों में सिंघाड़े की फसल लेने से आसपास का वाटर लेवल ऊंचा रहता है। फसल के अवशेष खेतों में सड़ने-गलने से खेतों की उर्वरा क्षमता में वृद्धि होती है। खेतों में जीवाश्म कार्बन की बढ़ोत्तरी होती है और कीटनाशी पैदा नहीं होते।
फसल लगाने का उत्तम समय
सिंघाड़े की रोपाई जून के प्रथम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक की जाती है। 15 सितंबर से दिसंबर तक फसल बाजार में आती है। सिंघाड़े की मई में फसल लगाकर अगेती फसल के रूप में किसानों को अगस्त तक फसल बाजार में आने से अच्छा मुनाफा मिलता है।