{"_id":"6a1b386153d637e1100ee9cc","slug":"talibs-bail-plea-rejected-bijnor-news-c-27-1-smrt1004-181003-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: तालिब की जमानत याचिका निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: तालिब की जमानत याचिका निरस्त
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह पर हमले के बाद जमीन घोटाले में घिरे तालिब की अदालत ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। करीब 50 करोड़ रुपये के इस जमीन घोटाले में पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी की पुलिस तलाश कर रही है।
थाना शेरकोट में 27 अप्रैल को सहकारी आवास समिति की जमीन हड़पने के आरोप में तालिब और उनके समधी पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी समेत 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जिसमें शेरकोट सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष और सचिव समेत पूर्व विधायक के तीन भाइयों को भी आरोपी बनाया गया था।
समिति के सदस्य शाहिद अली ने रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 1989 में शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड ने अब्दुल अजीज से 25 बीघा जमीन खरीदने के लिए इकरारनामा 3.45 लाख रुपये में कराया और पूरी धनराशि अदा कर दी गई थी लेकिन बैनामा होने से पहले विक्रेता की मृत्यु हो गई। आरोप है कि इसके बाद समिति के तत्कालीन सचिव शौकत अली ने विक्रेता के वारिसों से मिलीभगत कर केवल 12.50 बीघा जमीन ही समिति के नाम कराई। बाकी साढ़े बीघा जमीन समिति के नौ फर्जी सदस्य बनाते हुए उनके नाम करा दी। सदस्य बनाने के लिए रसीद भी फर्जी काटी गई। तालिब ने अपने रिश्तेदारों व सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आपसी बैनामों के जरिए जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप था कि सभी आरोपी संगठित गिरोह बनाकर अवैध कब्जे में शामिल हैं।
विज्ञापन
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से पुलिस आरोपियों की तलाश में लगी है। हालांकि तालिब, आबिद और खालिद पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह पर हमले के आरोप में दो अप्रैल से जेल में बंद हैं। इसके बाद शेरकोट में जमीन घोटाले का मामला दर्ज हुआ तो पुलिस ने रिमांड हासिल कर ली थी। अब तालिब की ओर से जमीन संबंधी मामले में जमानत याचिका अदालत में दाखिल की गई।
अपर सत्र न्यायाधीश अलका चौधरी ने तालिब के जमानत प्रार्थना पत्र पर कहा कि आरोपी के विरुद्ध गंभीर प्रकृति के आरोप हैं, जो आजीवन कारावास तक से दंडनीय हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी प्राथमिकी में नामजद है और उसके विरुद्ध अपराधिक इतिहास भी दर्ज है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
थाना शेरकोट में 27 अप्रैल को सहकारी आवास समिति की जमीन हड़पने के आरोप में तालिब और उनके समधी पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी समेत 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जिसमें शेरकोट सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष और सचिव समेत पूर्व विधायक के तीन भाइयों को भी आरोपी बनाया गया था।
विज्ञापन
समिति के सदस्य शाहिद अली ने रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 1989 में शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड ने अब्दुल अजीज से 25 बीघा जमीन खरीदने के लिए इकरारनामा 3.45 लाख रुपये में कराया और पूरी धनराशि अदा कर दी गई थी लेकिन बैनामा होने से पहले विक्रेता की मृत्यु हो गई। आरोप है कि इसके बाद समिति के तत्कालीन सचिव शौकत अली ने विक्रेता के वारिसों से मिलीभगत कर केवल 12.50 बीघा जमीन ही समिति के नाम कराई। बाकी साढ़े बीघा जमीन समिति के नौ फर्जी सदस्य बनाते हुए उनके नाम करा दी। सदस्य बनाने के लिए रसीद भी फर्जी काटी गई। तालिब ने अपने रिश्तेदारों व सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आपसी बैनामों के जरिए जमीन पर कब्जा कर लिया। आरोप था कि सभी आरोपी संगठित गिरोह बनाकर अवैध कब्जे में शामिल हैं।
विज्ञापन
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से पुलिस आरोपियों की तलाश में लगी है। हालांकि तालिब, आबिद और खालिद पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह पर हमले के आरोप में दो अप्रैल से जेल में बंद हैं। इसके बाद शेरकोट में जमीन घोटाले का मामला दर्ज हुआ तो पुलिस ने रिमांड हासिल कर ली थी। अब तालिब की ओर से जमीन संबंधी मामले में जमानत याचिका अदालत में दाखिल की गई।
अपर सत्र न्यायाधीश अलका चौधरी ने तालिब के जमानत प्रार्थना पत्र पर कहा कि आरोपी के विरुद्ध गंभीर प्रकृति के आरोप हैं, जो आजीवन कारावास तक से दंडनीय हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी प्राथमिकी में नामजद है और उसके विरुद्ध अपराधिक इतिहास भी दर्ज है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।