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जीआईएस प्रणाली से निकाय परिसंपत्तियों का होगा सर्वे
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जीआईएस प्रणाली से निकाय परिसंपत्तियों का होगा सर्वे
धामपुर। शेरकोट नगर पालिका में निकाय परिसंपत्तियों को अभिलेखों के अनुसार पूरी तरह से अपडेट करने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) से सर्वे होगा। पालिका के अधिकारियों की ओर से योजना तैयार कर ली गई है। पालिका बोर्ड से सहमति मिलते ही सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
पालिका के ईओ धर्मराज राम ने बताया कि पालिका की ओर से अब तक विभिन्न रिकार्ड 1359 फसली, चकबंदी प्रपत्र 41-42, राजस्व खतौनियों से खसरा नंबर के हिसाब से मिलान कर अब 50 बीघा निकाय की संपत्ति को अतिक्रमण और अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा चुका है।
बताया गया कि इसकी जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक की थी। अनुमान है कि अभी और निकाय की कुछ ऐसी संपत्तियां हैं, जिन पर लोगों ने अतिक्रमण और अवैध तौर पर कब्जे कर रखे हैं। इसका पता केवल जीआईएस सर्वे से ही लगाया जा सकता है। पालिका की ओर से निकाय परिसंपत्तियों का सही प्रकार से पता लगाने को जीआईएस सर्वे कराया जाएगा। योजना तैयार है। पालिका बोर्ड से सहमति मिलते ही पालिका की ओर से सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
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संरचनात्मक डाटाबेस पर होता है आधारित
पालिका के ईओ ने बताया कि भूगोलीय निर्देशांक प्रणाली को तीन तरीकों से देखा जा सकता है। एक तरीका डेटाबेस है। एक तरह से यह भूज्ञान की सूचना प्रणाली होती है। बुनियादी तौर पर जीआईएस प्रणाली मुख्य रूप से संरचनात्मक डाटाबेस पर आधारित होती है, जो भौगोलिक सूचकों पर आधारित होती है। दूसरा तरीका है मानचित्र, यह ऐसे मानचित्रों का समूह होता है जो पृथ्वी की सतह संबंधी बातें विस्तार से बताते हैं। यह डेटाबेस के लिए इंटरफेस का कार्य भी करते हैं। इनके जरिये स्थानिक पृच्छा (spatial query) की जा सकती है। तीसरा तरीका है प्रतिरूप, यह सूचना परिवर्तन उपकरणों का समूह होता है, जिसके माध्यम से वर्तमान डाटाबेस द्वारा नया डाटाबेस बनाया जाता है।
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धामपुर। शेरकोट नगर पालिका में निकाय परिसंपत्तियों को अभिलेखों के अनुसार पूरी तरह से अपडेट करने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) से सर्वे होगा। पालिका के अधिकारियों की ओर से योजना तैयार कर ली गई है। पालिका बोर्ड से सहमति मिलते ही सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
पालिका के ईओ धर्मराज राम ने बताया कि पालिका की ओर से अब तक विभिन्न रिकार्ड 1359 फसली, चकबंदी प्रपत्र 41-42, राजस्व खतौनियों से खसरा नंबर के हिसाब से मिलान कर अब 50 बीघा निकाय की संपत्ति को अतिक्रमण और अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा चुका है।
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बताया गया कि इसकी जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक की थी। अनुमान है कि अभी और निकाय की कुछ ऐसी संपत्तियां हैं, जिन पर लोगों ने अतिक्रमण और अवैध तौर पर कब्जे कर रखे हैं। इसका पता केवल जीआईएस सर्वे से ही लगाया जा सकता है। पालिका की ओर से निकाय परिसंपत्तियों का सही प्रकार से पता लगाने को जीआईएस सर्वे कराया जाएगा। योजना तैयार है। पालिका बोर्ड से सहमति मिलते ही पालिका की ओर से सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
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संरचनात्मक डाटाबेस पर होता है आधारित
पालिका के ईओ ने बताया कि भूगोलीय निर्देशांक प्रणाली को तीन तरीकों से देखा जा सकता है। एक तरीका डेटाबेस है। एक तरह से यह भूज्ञान की सूचना प्रणाली होती है। बुनियादी तौर पर जीआईएस प्रणाली मुख्य रूप से संरचनात्मक डाटाबेस पर आधारित होती है, जो भौगोलिक सूचकों पर आधारित होती है। दूसरा तरीका है मानचित्र, यह ऐसे मानचित्रों का समूह होता है जो पृथ्वी की सतह संबंधी बातें विस्तार से बताते हैं। यह डेटाबेस के लिए इंटरफेस का कार्य भी करते हैं। इनके जरिये स्थानिक पृच्छा (spatial query) की जा सकती है। तीसरा तरीका है प्रतिरूप, यह सूचना परिवर्तन उपकरणों का समूह होता है, जिसके माध्यम से वर्तमान डाटाबेस द्वारा नया डाटाबेस बनाया जाता है।