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छोटी सी बात पर उठा रहे आत्मघाती कदम
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छोटी सी बात पर उठा रहे आत्मघाती कदम
बिजनौर। आए दिन घरों में होने वाली जिन छोटी-छोटी तकरार और विवादों को बैठकर सुलटाया जा सकता है, उन्हें लोग इस कदर दिल पर लगा बैठते हैं कि आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। आप कल्पना किजिए जो मां अपने बच्चे का जरा सा दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह गुस्से में उसी की जान ले रही है और अपनी। कुछ देर के लिए आने वाले इस गुस्से को यदि बर्दाश्त कर लिया जो तो शायद अपने परिवार को उजड़ने से बचाया जा सकता है।
जिले में पिछले दिनों से खुदकशी के मामले बढ़े है जरा सी बात पर गुस्सा आने पर लोग मौत को गले लगा लेते हैं। ये नहीं देख रहे कि उनकी जान जाने से परिवार को क्या हाल होगा। परिजन मौत होने पर रोते बिलखते रह जाते हैं। महिलाएं तो आत्महत्या से पहले मासूम बच्चों की भी जान ले रही हैं। अपने कलेजे के टुकड़ों की जान लेते हुए इन महिलाओं के हाथ नहीं कांप रहे हैं। सात अगस्त को नजीबाबाद गांव सौपुरी निवासी पप्पू की पत्नी लक्ष्मी ने पति से विवाद होने पर अपने पांच साल के बेटे आनंद व पांच साल के बेटे मानव की पहले गला घोंटकर हत्या की और फिर खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार को किरतपुर थाने के ग्राम भरैकी निवासी गौरव की पत्नी सुनीता अपने मासूम बेटे ललित व दीपक को नहर में फेंकने के बाद तीन माह के आकांशु के साथ नहर में छलांग लगा दी। दीपक को नहर से निकालकर बचा लिया गया। महिला का शव मिल गया पर दो मासूम अभी तक नहीं मिले। सुनीता भी अपने पति से झगड़ कर पूरे परिवार का खात्मा करने के इरादे से घर से निकली थी। 23 अगस्त को नांगल थाने के गांव तिसोतरा के जंगल में राजेश फांसी के फंदे पर झूल गया था।
एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के मुताबिक सामंजस्य व विश्वास के अभाव के वजह से लोग खुदकशी जैसे कदम उठा रहे हैं। जरा से गुस्से को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। पति पत्नी में विवाद होने पर भी खुदकशी की जा रही है। ऐसे विवादों को आपस में निपटाया जा सकता है।
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जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राधेश्याम वर्मा के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान लोग घर में खाली रहे हैं। परिजनों से कलह वाजी होती रही है। गुस्सा बर्दाश्त न होने पर लोग यह कदम उठा रहे। लोग घरों में अकेले न रहें और किसी विवाद को दिल पर न लें। यदि ऐसा कोई मामला हो तो उसे बैठकर निपटाएं।
पिछले दो महीने में इन लोगाें ने दी जान
- आठ जून मंडावर थाने के गांव खुड़ाहेड़ी में विरेंद्र ने आर्थिक तंगी से फांसी लगाकर जान दी।
- 23 मई स्योहारा थाने के गांव बुडेरन में रूचि ने पत्नी से विवाद होने पर खुदकशी की।
- एक जुलाई को अफजलगढ़ के गांव रसूलपुर में घरेेलू कलह में नसीरन ने फांसी लगाकर खुदकशी।
- 13 अप्रैल को थाना शेरकोट के गांव बाजीदपुर में शारिक ने पेड़ से लटकर खुदकशी की।
- सात अप्रैल को मंडावर थाने गांव करीमपुर में प्रमोद ने दुकान में फांसी लगाकर खुदकशी की।
- सात अगस्त को नजीबाबाद के गांव सौपुरी में लक्ष्मी ने दो मासूम बच्चों की हत्या करने के बाद खुदकशी की।
- 25 अगस्त को गांव भरैकी में सुनीता ने तीन बच्चों के साथ नहर में कूदकर जान दी।
- 27 अगस्त को नहटौर थाने के गांव कादीपुरा एक महिला ने जहर खाकर जान दी।
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बिजनौर। आए दिन घरों में होने वाली जिन छोटी-छोटी तकरार और विवादों को बैठकर सुलटाया जा सकता है, उन्हें लोग इस कदर दिल पर लगा बैठते हैं कि आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। आप कल्पना किजिए जो मां अपने बच्चे का जरा सा दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह गुस्से में उसी की जान ले रही है और अपनी। कुछ देर के लिए आने वाले इस गुस्से को यदि बर्दाश्त कर लिया जो तो शायद अपने परिवार को उजड़ने से बचाया जा सकता है।
जिले में पिछले दिनों से खुदकशी के मामले बढ़े है जरा सी बात पर गुस्सा आने पर लोग मौत को गले लगा लेते हैं। ये नहीं देख रहे कि उनकी जान जाने से परिवार को क्या हाल होगा। परिजन मौत होने पर रोते बिलखते रह जाते हैं। महिलाएं तो आत्महत्या से पहले मासूम बच्चों की भी जान ले रही हैं। अपने कलेजे के टुकड़ों की जान लेते हुए इन महिलाओं के हाथ नहीं कांप रहे हैं। सात अगस्त को नजीबाबाद गांव सौपुरी निवासी पप्पू की पत्नी लक्ष्मी ने पति से विवाद होने पर अपने पांच साल के बेटे आनंद व पांच साल के बेटे मानव की पहले गला घोंटकर हत्या की और फिर खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार को किरतपुर थाने के ग्राम भरैकी निवासी गौरव की पत्नी सुनीता अपने मासूम बेटे ललित व दीपक को नहर में फेंकने के बाद तीन माह के आकांशु के साथ नहर में छलांग लगा दी। दीपक को नहर से निकालकर बचा लिया गया। महिला का शव मिल गया पर दो मासूम अभी तक नहीं मिले। सुनीता भी अपने पति से झगड़ कर पूरे परिवार का खात्मा करने के इरादे से घर से निकली थी। 23 अगस्त को नांगल थाने के गांव तिसोतरा के जंगल में राजेश फांसी के फंदे पर झूल गया था।
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एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के मुताबिक सामंजस्य व विश्वास के अभाव के वजह से लोग खुदकशी जैसे कदम उठा रहे हैं। जरा से गुस्से को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। पति पत्नी में विवाद होने पर भी खुदकशी की जा रही है। ऐसे विवादों को आपस में निपटाया जा सकता है।
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जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राधेश्याम वर्मा के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान लोग घर में खाली रहे हैं। परिजनों से कलह वाजी होती रही है। गुस्सा बर्दाश्त न होने पर लोग यह कदम उठा रहे। लोग घरों में अकेले न रहें और किसी विवाद को दिल पर न लें। यदि ऐसा कोई मामला हो तो उसे बैठकर निपटाएं।
पिछले दो महीने में इन लोगाें ने दी जान
- आठ जून मंडावर थाने के गांव खुड़ाहेड़ी में विरेंद्र ने आर्थिक तंगी से फांसी लगाकर जान दी।
- 23 मई स्योहारा थाने के गांव बुडेरन में रूचि ने पत्नी से विवाद होने पर खुदकशी की।
- एक जुलाई को अफजलगढ़ के गांव रसूलपुर में घरेेलू कलह में नसीरन ने फांसी लगाकर खुदकशी।
- 13 अप्रैल को थाना शेरकोट के गांव बाजीदपुर में शारिक ने पेड़ से लटकर खुदकशी की।
- सात अप्रैल को मंडावर थाने गांव करीमपुर में प्रमोद ने दुकान में फांसी लगाकर खुदकशी की।
- सात अगस्त को नजीबाबाद के गांव सौपुरी में लक्ष्मी ने दो मासूम बच्चों की हत्या करने के बाद खुदकशी की।
- 25 अगस्त को गांव भरैकी में सुनीता ने तीन बच्चों के साथ नहर में कूदकर जान दी।
- 27 अगस्त को नहटौर थाने के गांव कादीपुरा एक महिला ने जहर खाकर जान दी।