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उप निबंधक और कर्मचारियों को भाकियू ने बनाया बंधक
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Updated Thu, 03 May 2018 12:02 AM IST
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उपनिबंधक कार्यालय पर बैठे भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के नजीबाबाद के उप निबंधक कार्यालय में बैनामों पर दो प्रतिशत सुविधा शुल्क लेने का आरोप लगाते हुए किसानों ने जमकर हंगामा किया। महिला उप निबंधक सहित कर्मचारियों को कार्यालय में ही दो घंटे तक बंधक बनाए रखा। एसडीएम और सीओ ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया। करीब दो घंटे किसानों ने कार्यालय में बंद कर्मचारी छोड़े।
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भाकियू के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह, किरतपुर ब्लॉक अध्यक्ष देवदत्त शर्मा के नेतृत्व में बुधवार को करीब तीन बजे उप निबंधक कार्यालय पर पहुंचे किसानों ने जमकर हंगामा किया। आरोप था कि कार्यालय पर किसानों सहित बैनामा कराने आने वालों से सरकारी फीस के अतिरिक्त कार्यालय कर्मचारी दो प्रतिशत सुविधा शुल्क वसूल करते हैं। बुधवार को किरतपुर के गांव कसौर निवासी दिनेश कुमार के साथ आईं महिलाओं दीपा और किरन से कृषि भूमि के लिए 50 हजार रुपये की सुविधा शुल्क मांगी गई।
मंगलवार को भी नांगलसोती के किसान परिवार की फरजाना, रिहाना और शाहबुद्दीन से साढ़े दस हजार रुपये वसूल किए गए थे।
इसके बाद किसानों ने उप निबंधक प्रीति विक्रम सहित सभी कर्मचारियों को कार्यालय में बंद कर नारेबाजी की। उप निबंधक और कार्यालय के कर्मचारियों को बंधक बनाने की सूचना पर पहुंचे एसडीएम सत्येंद्र कुमार सिंह, सीओ अरुण कुमार सिंह ने किसानों से वार्ता की। उप निबंधक प्रीति विक्रम ने आरोप को निराधार बताते हुए कनेक्टीविटी न आने के कारण बैनामा न हो पाने का तर्क दिया।
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किसानों ने उस बाबू की पहचान कराई जिसने एक दिन पूर्व किसान परिवार से सुविधा शुल्क लिया था। एसडीएम ने किसानों को जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया। हंगामे के बाद उप निबंधक कार्यालय ने किसान का बैनामा तुरंत कर दिया। एसडीएम के आश्वासन पर दो घंटे बाद किसानों ने उप निबंधक और कर्मचारियों को बंधकों को मुक्त किया। प्रदर्शन करने वाले किसानों में विनोद परमार, मदन चौहान, नरदेव सिंह, मो. आफाक, देवदत्त शर्मा, डार्विन, सतपाल सिंह, प्रमोद कुमार, पंकज कुमार, राजकुमार आदि शामिल रहे।
कृषि कार्ड धारक किसानों का होता है जमकर शोषण
नजीबाबाद। कृषि कार्ड धारकों का आर्थिक और मानसिक शोषण का मामला भी किसानों ने उठाया। भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अधिकांश किसानों के पास कृषि क्रेडिट कार्ड हैं। लोन अदा न कर पाने वाले किसान जब लोन अदायगी के लिए अपनी जमीन बेचने जाते हैं तो दो प्रतिशत सुविधा शुल्क वसूल किया जाता है। सुविधा शुल्क न दे पाने वाले किसानों की जमीन का लोन होने का तर्क देकर बैनामा रोक दिया जाता है।
दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई : डीएम
डीएम अटल राय ने उप निबंधक कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का भाकियू को आश्वासन दिया। किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष द्वारा फोन पर जानकारी देने पर डीएम ने भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने का भी आश्वासन दिया।
बैनामे पर पूरे जिले में होता है दो प्रतिशत का खेल
बिजनौर। रजिस्ट्री कार्यालय में दो प्रतिशत की रिश्वत का खेल पूरे जिले में चल रहा है। बिना रिश्वत लिए किसी भी बैनामे को पूरा नहीं किया जाता है। अधिकारी बैनामा कराने के लिए दो प्रतिशत का चढ़ावा मांगते हैं। रजिस्ट्री कार्यालय पहले से ही बदनाम चला आ रहा है। यहां आने वालों से विभाग के अधिकारी प्रापर्टी की कीमत के दो प्रतिशत के बराबर रुपये रिश्वत में लेते हैं। बिना रिश्वत कोई बैनामा पूरा नहीं किया जाता है। रुपये न देने वालों के कागजों में कमी निकाल दी जाती है। रजिस्ट्री कार्यालय का आलम यह रहा है कि प्रॉपर्टी डीलरों की मिली भगत से रात के अंधेरे में भी किसी जमीन का बैनामा कर देते थे। रात भर रजिस्ट्री कार्यालय पैसों के दम पर खुला रहता था। सब कुछ कंप्यूटरीकृत होने के बाद इतना फर्क तो आया है कि अब रात में बैनामा करने से कार्यालय के अफसर व कर्मचारी हिककिचाते हैं पर रिश्वत का यह खेल अब भी चल रहा है।
कोई भी बैनामा होने पर खुलेआम इस कार्यालय में रिश्वत मांगी जाती है। कर्मचारी से लेकर अफसरों का हिस्सा तय रहता है। बिना हिस्सा लिए कोई भी बैनामा नहीं हो पाता है। बैनामा कराने वाले कातिब तक से सेटिंग रखते हैं। बैनामे कम होने पर अफसर व कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं।
भाकियू के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि रिजिस्ट्री में बैनामों पर धड़ल्ले से दो प्रतिशत रिश्वत ली जा रही है। कोई सुनवाई नहीं है। 27 अप्रैल केेे उन्होंने जिलाधिकारी को इस बारे में ज्ञापन भी दिया था। पर कोई सुधार नहीं हो रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस रिश्वत पर रोक न लगी तो पूरे जिले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा ।
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