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नारी का सम्मान करना सीखें तो समाज की सूरत बदल जाएगी
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नारी का सम्मान करना सीखें तो समाज की सूरत बदल जाएगी
चांदपुर (बिजनौर)। अमर उजाला के मिशन अपराजिता अभियान के अंतर्गत विवेकानंद इंटर कॉलेज दरवाड़ा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य टीकमसिंह ने छात्राओं को नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ दिलाई।
प्रधानाचार्य टीकम सिंह ने कहा कि अगर छात्र जीवन में ही नारी का सम्मान करना सीख लिया जाए तो समाज की सूरत ही बदल जाएगी और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर खुद के खुद लगाम लग जाएगी। माता-पिता को बचपन से ही लड़कों को लड़कियों की इज्जत करना सिखाना चाहिए।
एनसीसी व रासेयो के परियोजनाधिकारी विकास चौधरी ने कहा कि लड़कियों को परिवार, समाज व देश की शक्ति बनाओ न कि परिवार, समाज व देश पर बोझ समझें। बेटियां बढ़ेगी तभी देश भी बढ़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि भारत की बेटियों ने पूरी दुनिया में नाम कमाया है। अगर उन्हें खुलकर पढ़ने लिखने की आजादी दी जाएगी तभी वे आगे बढ़ने और दूसरों को बढ़ाने की हिम्मत करेंगी।
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नियम कानून पर करें अमल
शिक्षिका नीलमणि शर्मा ने कहा कि जब तक हम अपने अंदर बेटियों को बचाने व पढ़ाने के लिए नियम, कानून पर अमल नहीं करेंगे, तब तक कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लड़कियां स्कूल में पढ़ने आती हैं जबकि लड़के मौज मस्ती करने आते हैं। उसके बाद भी लड़कों को पढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
सोच बदलनी जरूरी
शिक्षिका पूनम चौधरी ने कहा कि महिलाओं के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आने के बावजूद भी एक बड़ा तबका नहीं बदला है। उस तबके को जागरुक करना होगा। बेटियों के प्रति लोगों के सोच को बदलने की जरूरत है।
प्राचीन काल से ही मिल रही शिक्षा
शिक्षिका पूजा त्यागी ने पूर्व में महान विदुषी महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारतवासी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्राचीन काल से ही जागरूक हैं। बेटियां प्राचीन काल से ही पढ़ रही हैं और पुरुषों के समान अधिकार मिले हैं। लेकिन उसके बाद भी महिलाओं के प्रति मानसिकता को बदलना होगा।
संकल्प लेना होगा
शिक्षिका तिलक देवी ने कहा कि बेटियां बोझ नहीं हैं, बेटियों को खुला आसमान दें जिससे वे अपनी इच्छाओं को उड़ान देकर माता पिता का सपना पूरा कर सकें। अमर उजाला ने बेटियों को अपराजिता बनाने का जो बीड़ा उठाया है उससे पूरा करने के लिए हमें संकल्प लेना होगा।
शिक्षा जरूरी
छात्रा इकरा परवीन ने कहा कि लड़के को स्कूल भेजकर खूब उच्च शिक्षा ग्रहण कराते हैं जबकि लड़की को घर में रखकर बर्तन साफ कराते हैं। इसी गलत मानसिकता को बदलने के लिए बेटियों का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है।
फूलों सा कोमल हृदय
छात्रा आंशी चौहान ने कहा कि फूलों सी कोमल हृदय वाली होती हैं। बेटियां, मां-बाप की एक आह पर ही रोती हैं। बेटियां फिर भी गर्भ में जान खोती हैं। लोगों को इसके लिए जागरूक करने की आवश्यकता है।
बेटी सुख दुख की साथी
छात्र रितूल चौधरी ने कविता के माध्यम से कहा कि बेटे धन, दौलत के लोभी, बेटी दुख सुख की साथी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ क्यों नहीं बात समझ आती। बेटे तो मां बाप की दौलत के आगे पीछे भागे, सदा रहे खुशहाल माता पिता बेटी यही दुआ मांगे।
अधिकारों का ज्ञान जरूरी
छात्रा रिया राणा ने इंग्लिश में स्पीच देकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए सभी को प्रेरित किया। कहा कि बेटियों को अपने अधिकारों की जानकारी होना बहुत जरूरी है, इसके लिए शिक्षित होना जरूरी है।
माता-पिता हों जागरूक
छात्रा रक्षिका गहलौत ने कविता के माध्यम से कहा कि लड़कों को पढ़ा-लिखा कर नौकरी उसकी लगवाते हैं , लड़की को घर में रखकर जल्दी शादी कराते हैं इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है। इसके लिए माता-पिता को जागरूक होना जरूरी है।
बेटी के बगैर कैसा घर
छात्रा कनु सिसौदिया ने कहा कि जिस घर में बेटी ही ना हो, उस घर को घर क्या कहना, बेटी ही तो सिखाती है आपस में मिलकर रहना। लिंग अनुपात में निरंतर आ रही गिरावट की प्रवृत्ति के उन्मूलन के लिए मानसिक सोच को बदलने की बहुत आवश्यकता है।
बेटियों को बढ़ाएं आगे
छात्रा आयुषी चौहान ने कहा कि मेरी दुनिया यह बता दे लड़की क्या इंसान नहीं, लड़के का मान जगत में लड़की का कोई मान नहीं। हम सभी को इस दुनिया में बेटियों के महत्व को पहचानना चाहिए तथा बेटियों को आगे बढ़ाने में सहयोग करना चाहिए।
सौभाग्य से होती हैं बेटियां
छात्रा नेहा चौहान ने कहा कि बेटे भाग्य से होते हैं पर बिटिया सौभाग्य से होती हैं। बेटा एक घर बनाता है तो बेटी दो घर चलाती हैं।
अमर उजाला की सराहना की
छात्रा दिव्या चौहान ने अपने गीत के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए प्रेरित किया और अमर उजाला को इस तरह के प्रोग्राम के लिए धन्यवाद किया।
बेटियों से है जीवन
छात्रा शिवानी ने कहा कि जब मां ही जग में ना होगी तो तुम जन्म किससे पाओगे, जब बहन ना होगी घर के आंगन में तो किससे रुठोगे किसे मनाओगे। बेटियां हैं तभी जीवन है।
घर को आगे बढ़ाती है बेटी
छात्रा कनिका शर्मा ने कहा कि कैसे खाओगे उसके हाथ की रोटी जब पैदा ही नहीं होगी बेटी। एक बेटी ही घर को आगे बढ़ाती है।
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चांदपुर (बिजनौर)। अमर उजाला के मिशन अपराजिता अभियान के अंतर्गत विवेकानंद इंटर कॉलेज दरवाड़ा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य टीकमसिंह ने छात्राओं को नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ दिलाई।
प्रधानाचार्य टीकम सिंह ने कहा कि अगर छात्र जीवन में ही नारी का सम्मान करना सीख लिया जाए तो समाज की सूरत ही बदल जाएगी और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर खुद के खुद लगाम लग जाएगी। माता-पिता को बचपन से ही लड़कों को लड़कियों की इज्जत करना सिखाना चाहिए।
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एनसीसी व रासेयो के परियोजनाधिकारी विकास चौधरी ने कहा कि लड़कियों को परिवार, समाज व देश की शक्ति बनाओ न कि परिवार, समाज व देश पर बोझ समझें। बेटियां बढ़ेगी तभी देश भी बढ़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि भारत की बेटियों ने पूरी दुनिया में नाम कमाया है। अगर उन्हें खुलकर पढ़ने लिखने की आजादी दी जाएगी तभी वे आगे बढ़ने और दूसरों को बढ़ाने की हिम्मत करेंगी।
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नियम कानून पर करें अमल
शिक्षिका नीलमणि शर्मा ने कहा कि जब तक हम अपने अंदर बेटियों को बचाने व पढ़ाने के लिए नियम, कानून पर अमल नहीं करेंगे, तब तक कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लड़कियां स्कूल में पढ़ने आती हैं जबकि लड़के मौज मस्ती करने आते हैं। उसके बाद भी लड़कों को पढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
सोच बदलनी जरूरी
शिक्षिका पूनम चौधरी ने कहा कि महिलाओं के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आने के बावजूद भी एक बड़ा तबका नहीं बदला है। उस तबके को जागरुक करना होगा। बेटियों के प्रति लोगों के सोच को बदलने की जरूरत है।
प्राचीन काल से ही मिल रही शिक्षा
शिक्षिका पूजा त्यागी ने पूर्व में महान विदुषी महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारतवासी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्राचीन काल से ही जागरूक हैं। बेटियां प्राचीन काल से ही पढ़ रही हैं और पुरुषों के समान अधिकार मिले हैं। लेकिन उसके बाद भी महिलाओं के प्रति मानसिकता को बदलना होगा।
संकल्प लेना होगा
शिक्षिका तिलक देवी ने कहा कि बेटियां बोझ नहीं हैं, बेटियों को खुला आसमान दें जिससे वे अपनी इच्छाओं को उड़ान देकर माता पिता का सपना पूरा कर सकें। अमर उजाला ने बेटियों को अपराजिता बनाने का जो बीड़ा उठाया है उससे पूरा करने के लिए हमें संकल्प लेना होगा।
शिक्षा जरूरी
छात्रा इकरा परवीन ने कहा कि लड़के को स्कूल भेजकर खूब उच्च शिक्षा ग्रहण कराते हैं जबकि लड़की को घर में रखकर बर्तन साफ कराते हैं। इसी गलत मानसिकता को बदलने के लिए बेटियों का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है।
फूलों सा कोमल हृदय
छात्रा आंशी चौहान ने कहा कि फूलों सी कोमल हृदय वाली होती हैं। बेटियां, मां-बाप की एक आह पर ही रोती हैं। बेटियां फिर भी गर्भ में जान खोती हैं। लोगों को इसके लिए जागरूक करने की आवश्यकता है।
बेटी सुख दुख की साथी
छात्र रितूल चौधरी ने कविता के माध्यम से कहा कि बेटे धन, दौलत के लोभी, बेटी दुख सुख की साथी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ क्यों नहीं बात समझ आती। बेटे तो मां बाप की दौलत के आगे पीछे भागे, सदा रहे खुशहाल माता पिता बेटी यही दुआ मांगे।
अधिकारों का ज्ञान जरूरी
छात्रा रिया राणा ने इंग्लिश में स्पीच देकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए सभी को प्रेरित किया। कहा कि बेटियों को अपने अधिकारों की जानकारी होना बहुत जरूरी है, इसके लिए शिक्षित होना जरूरी है।
माता-पिता हों जागरूक
छात्रा रक्षिका गहलौत ने कविता के माध्यम से कहा कि लड़कों को पढ़ा-लिखा कर नौकरी उसकी लगवाते हैं , लड़की को घर में रखकर जल्दी शादी कराते हैं इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है। इसके लिए माता-पिता को जागरूक होना जरूरी है।
बेटी के बगैर कैसा घर
छात्रा कनु सिसौदिया ने कहा कि जिस घर में बेटी ही ना हो, उस घर को घर क्या कहना, बेटी ही तो सिखाती है आपस में मिलकर रहना। लिंग अनुपात में निरंतर आ रही गिरावट की प्रवृत्ति के उन्मूलन के लिए मानसिक सोच को बदलने की बहुत आवश्यकता है।
बेटियों को बढ़ाएं आगे
छात्रा आयुषी चौहान ने कहा कि मेरी दुनिया यह बता दे लड़की क्या इंसान नहीं, लड़के का मान जगत में लड़की का कोई मान नहीं। हम सभी को इस दुनिया में बेटियों के महत्व को पहचानना चाहिए तथा बेटियों को आगे बढ़ाने में सहयोग करना चाहिए।
सौभाग्य से होती हैं बेटियां
छात्रा नेहा चौहान ने कहा कि बेटे भाग्य से होते हैं पर बिटिया सौभाग्य से होती हैं। बेटा एक घर बनाता है तो बेटी दो घर चलाती हैं।
अमर उजाला की सराहना की
छात्रा दिव्या चौहान ने अपने गीत के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए प्रेरित किया और अमर उजाला को इस तरह के प्रोग्राम के लिए धन्यवाद किया।
बेटियों से है जीवन
छात्रा शिवानी ने कहा कि जब मां ही जग में ना होगी तो तुम जन्म किससे पाओगे, जब बहन ना होगी घर के आंगन में तो किससे रुठोगे किसे मनाओगे। बेटियां हैं तभी जीवन है।
घर को आगे बढ़ाती है बेटी
छात्रा कनिका शर्मा ने कहा कि कैसे खाओगे उसके हाथ की रोटी जब पैदा ही नहीं होगी बेटी। एक बेटी ही घर को आगे बढ़ाती है।