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खरीफ पर सितम, रबी की फसलों पर करम

Wed, 21 Sep 2022 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 11:57 PM IST
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Sitam on Kharif, Karam on Rabi crops
धामपुर तहसील क्षेत्र के रेहड़ में स्थित पीली बांध - फोटो : DHAMPUR
खरीफ पर सितम, रबी की फसलों पर करम
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धामपुर। अबकी बार क्षेत्र में बारिश कम होने से तहसील क्षेत्र के पीलीबांध के पानी का लेबल पिछले साल की तुलना में 15 फीट नीचे रह गया है। पानी की कमी से सिंचाई विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ी है। अफसरों ने पानी की कमी के कारण खरीफ की फसलों की सिंचाई के लिए पानी को रोक दिया। रबी की फसलों की सिंचाई के लिए पानी को स्टॉक करना शुरू कर दिया है। उधर, क्षेत्र के किसानों को पानी की कमी के चलते कम सिंचाई की (चना, सरसों, दाल, उड़द) फसलों की बुवाई करने को प्रेरित किया जा रहा है।
तहसील के रेहड़ क्षेत्र में पीली बांध स्थित है। इस बांध से आठ नहरों के माध्यम से किसानों को फसलों की सिंचाई करने को पानी उपलब्ध कराया जाता है। बताया गया कि अभी भी इस क्षेत्र के किसानों की खेती नहरों की सिंचाई पर ही आधारित है। करीब 61 किमी लंबी इन नहरों से लगभग चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई होती है। क्षेत्र के किसानों की ओर से बारिश कम होने पर चिंता जताई है। किसान अशोक शर्मा, मनोज कुमार का कहना है कि खरीफ की फसलों की समय से सिंचाई न होने से भारी नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। (संवाद)
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रामगंगा बांध में पिछले साल से सात मीटर पानी का लेबल कम
मुरादाबाद मंडल के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता आरपी सिंह का कहना है कि इस बार बारिश का कम होना चिंता का कारण बना है। कालागढ़ के रामगंगा बांध में भी पानी का लेबल पिछले साल की तुलना में सात मीटर नीचे है। बांध की क्षमता 2440 एमसीएम ( मिलियन क्यूबिक मीटर) है, जबकि वर्तमान में पानी का लेबल 1323 एमसीएम है। पिछले साल 1784 एमसीएम था। हालांकि कालागढ़ रामगंगा के अफजलगढ़ बैराज से भी किसानों को नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। उधर, पीली बांध की क्षमता 39.2 एमसीएम है, लेकिन 21 सितंबर तक पानी का लेबल 4.2 एमसीएम है। जो पिछले साल के पानी के लेबल की तुलना में 15 फीट नीचे है।
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किसान पानी का दुरुपयोग करने से बचें
मुख्य अभियंता का कहना है कि बांध में पानी के टोटे के कारण किसानों को सिंचाई और कृषि विभाग की ओर से गांवों में गोष्ठियां कर जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे ऐसे फसलों की बुवाई करें, जिनमें सिंचाई के लिए पानी की कम जरूरत हो और उत्पादन बढ़िया हो। किसानों को सुझाव दिया है कि वे पानी का दुरुपयोग करने से बचें।
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