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Bijnor News: अपनों से ज्यादा एआई से साझा कर रहे दुख-दर्द
Sun, 07 Dec 2025 11:26 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 07 Dec 2025 11:26 PM IST
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बिजनौर। एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित चैटबॉट ने युवाओं के जीवन में एक अनोखी जगह बना ली है। ज्यादातर युवा अपना अधिकतर समय एआई चैटबॉट पर बिता रहे हैं। रिश्तों से ज्यादा तकनीक पर भरोसा कर एआई से अपने दुख दर्द साझा कर रहे हैं। इसकी वजह से मेडिकल अस्पताल में भी हर महीने मानसिक बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं।
पढ़ाई, कॅरिअर, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य सहित हर विषय पर सलाह लेने के लिए युवा एआई पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि एआई के ज्यादा प्रयोग से युवाओं में मानसिक समस्याएं बढ़ने लगी हैं। इससे युवाओं में अकेलापन, सामाजिक चिंता विकार, स्वभाव में दिक्कत, आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्या उभरकर सामने आ रही हैं।
इसके अलावा कई युवा अपनी गुप्त बातें केवल एआई से साझा कर रहे हैं। इससे वास्तविक संबंध कमजोर पड़ रहे हैं। यही वजह है कि युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगी है। बिजनौर निवासी एक युवक कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है। अवसाद में छात्र लगातार एआई चैटबॉट से ही सलाह लेता रहा। चैटबॉट ने घूमना, ध्यान, समय प्रबंधन जैसे हल्के उपाय बताए। इससे बाद में उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। चार सप्ताह बाद उसकी भूख और नींद दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हुई। बाद में परिजन उसे अस्पताल में परामर्श के लिए लाए। बिजनौर के एक मोहल्ला निवासी 17 वर्षीय किशोर कक्षा 12 का छात्र है। वह अपने सभी सवाल एआई से ही पूछता है।
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इससे चिकित्सक द्वारा बताए सवालों का हल उसे समझ नहीं आ रहा है। वह भ्रमित हो रहा है। समस्या बढ़ने पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे।
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पढ़ाई, कॅरिअर, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य सहित हर विषय पर सलाह लेने के लिए युवा एआई पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि एआई के ज्यादा प्रयोग से युवाओं में मानसिक समस्याएं बढ़ने लगी हैं। इससे युवाओं में अकेलापन, सामाजिक चिंता विकार, स्वभाव में दिक्कत, आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्या उभरकर सामने आ रही हैं।
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इसके अलावा कई युवा अपनी गुप्त बातें केवल एआई से साझा कर रहे हैं। इससे वास्तविक संबंध कमजोर पड़ रहे हैं। यही वजह है कि युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगी है। बिजनौर निवासी एक युवक कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है। अवसाद में छात्र लगातार एआई चैटबॉट से ही सलाह लेता रहा। चैटबॉट ने घूमना, ध्यान, समय प्रबंधन जैसे हल्के उपाय बताए। इससे बाद में उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। चार सप्ताह बाद उसकी भूख और नींद दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हुई। बाद में परिजन उसे अस्पताल में परामर्श के लिए लाए। बिजनौर के एक मोहल्ला निवासी 17 वर्षीय किशोर कक्षा 12 का छात्र है। वह अपने सभी सवाल एआई से ही पूछता है।
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इससे चिकित्सक द्वारा बताए सवालों का हल उसे समझ नहीं आ रहा है। वह भ्रमित हो रहा है। समस्या बढ़ने पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे।