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शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे: 103 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। उत्तर प्रदेश में शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण मार्ग में आने वाले 103 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। राज्य भूमि अध्याप्ति, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन नीति (एसएलओ) विभाग ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इससे इन गांवों में किसी भी संपत्ति के बैनामे पर पूरी तरह पाबंदी लग गई है। यह रोक उन गांवों पर लागू है, जिनकी जमीनें एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जानी हैं।
एसएलओ विभाग ने नजीबाबाद, धामपुर और बिजनौर के उप-पंजीयक कार्यालयों को एक सूची भेजी है। इस सूची के अनुसार, बिजनौर जिले के 32 गांवों की जमीनों पर रोक लगी है। नजीबाबाद तहसील के 16 गांवों और धामपुर तहसील के 55 गांवों में भी बैनामे पर पाबंदी है। कुल मिलाकर, यह रोक 103 गांवों को प्रभावित करेगी। माना जा रहा है कि यह पहली सूची है, जल्द ही दूसरी सूची भी जारी हो सकती है। यह बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ेगा। इसका मार्ग मंडावर-चंदक क्षेत्र से होकर गुजरेगा। यह विशेष रूप से धामपुर तहसील क्षेत्र से निकलेगा।
रोक का मुख्य उद्देश्य
जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का मुख्य उद्देश्य भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारू और निष्पक्ष बनाना है। जब किसी बड़ी परियोजना के लिए अधिग्रहण शुरू होता है, तो जमीन की कीमतों में असामान्य वृद्धि की आशंका रहती है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। अनधिकृत खरीद-फरोख्त से भविष्य में कानूनी जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। सरकार इस रोक से सट्टेबाजी और मूल्य वृद्धि को रोकना चाहती है।
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मुआवजा मिलने के बाद हटेगी रोक
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने और प्रभावित भू-स्वामियों को उचित मुआवजा मिलने के बाद ही रोक हटेगी। इस एक्सप्रेसवे परियोजना से क्षेत्र में आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों का आवागमन सुगम बनेगा। हालांकि, वर्तमान में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी यह रोक स्थानीय निवासियों के लिए असुविधाजनक साबित हो सकती है। संपत्ति डीलरों को भी कुछ समय के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अभी एक लिस्ट और जारी होने की उम्मीद
अभी जो तीन तहसीलों को लिस्ट दी गई हैं, उनमें मात्र 103 गांव ही है। इससे पहले जो एनएचएआई की ओर से एसएलओ को सूची भेजी गई थी, उसमें 131, दूसरी लिस्ट में 116 गांव थे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अभी कुछ और गांवों की सूची निबंधन विभाग को सौंपी जा सकती है, ताकि वहां भी रोक लगाई जा सके।
एसएलओ विभाग से सीधे तहसीलों पर सब रजिस्ट्रार को गांवों की सूची दी गई है। अभी तक जो सूची दी गई है, उनमें 103 गांव हैं। इन गांवों में संबंधित गाटा संख्या पर बैनामे नहीं हो रहे हैं। - आशुतोष जोशी, एआईजी स्टांप, बिजनौर
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश में शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण मार्ग में आने वाले 103 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। राज्य भूमि अध्याप्ति, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन नीति (एसएलओ) विभाग ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इससे इन गांवों में किसी भी संपत्ति के बैनामे पर पूरी तरह पाबंदी लग गई है। यह रोक उन गांवों पर लागू है, जिनकी जमीनें एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जानी हैं।
एसएलओ विभाग ने नजीबाबाद, धामपुर और बिजनौर के उप-पंजीयक कार्यालयों को एक सूची भेजी है। इस सूची के अनुसार, बिजनौर जिले के 32 गांवों की जमीनों पर रोक लगी है। नजीबाबाद तहसील के 16 गांवों और धामपुर तहसील के 55 गांवों में भी बैनामे पर पाबंदी है। कुल मिलाकर, यह रोक 103 गांवों को प्रभावित करेगी। माना जा रहा है कि यह पहली सूची है, जल्द ही दूसरी सूची भी जारी हो सकती है। यह बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ेगा। इसका मार्ग मंडावर-चंदक क्षेत्र से होकर गुजरेगा। यह विशेष रूप से धामपुर तहसील क्षेत्र से निकलेगा।
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रोक का मुख्य उद्देश्य
जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का मुख्य उद्देश्य भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारू और निष्पक्ष बनाना है। जब किसी बड़ी परियोजना के लिए अधिग्रहण शुरू होता है, तो जमीन की कीमतों में असामान्य वृद्धि की आशंका रहती है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। अनधिकृत खरीद-फरोख्त से भविष्य में कानूनी जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। सरकार इस रोक से सट्टेबाजी और मूल्य वृद्धि को रोकना चाहती है।
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मुआवजा मिलने के बाद हटेगी रोक
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने और प्रभावित भू-स्वामियों को उचित मुआवजा मिलने के बाद ही रोक हटेगी। इस एक्सप्रेसवे परियोजना से क्षेत्र में आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों का आवागमन सुगम बनेगा। हालांकि, वर्तमान में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी यह रोक स्थानीय निवासियों के लिए असुविधाजनक साबित हो सकती है। संपत्ति डीलरों को भी कुछ समय के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अभी एक लिस्ट और जारी होने की उम्मीद
अभी जो तीन तहसीलों को लिस्ट दी गई हैं, उनमें मात्र 103 गांव ही है। इससे पहले जो एनएचएआई की ओर से एसएलओ को सूची भेजी गई थी, उसमें 131, दूसरी लिस्ट में 116 गांव थे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अभी कुछ और गांवों की सूची निबंधन विभाग को सौंपी जा सकती है, ताकि वहां भी रोक लगाई जा सके।
एसएलओ विभाग से सीधे तहसीलों पर सब रजिस्ट्रार को गांवों की सूची दी गई है। अभी तक जो सूची दी गई है, उनमें 103 गांव हैं। इन गांवों में संबंधित गाटा संख्या पर बैनामे नहीं हो रहे हैं। - आशुतोष जोशी, एआईजी स्टांप, बिजनौर