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महात्मा गांधी की मौत का दर्द बन गया अब्दुल शकूर की रागनी
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महात्मा गांधी की मौत का दर्द बन गया शकूर की रागिनी
बिजनौर। महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के विचारों से प्रेरित होकर अब्दुल शकूर जीवन भर गांधीवादी रहे। उन्हें कई बार महात्मा गांधी के दर्शन का अवसर मिला। गांधीजी की मृत्यु वाले दिन को याद करके वह आज भी सिहर उठते हैं। गांधीजी की मौत का दर्द अब्दुल शकूर की रागिनी बन गया था, जिसे जगह-जगह जाकर दर्दभरे अंदाज में सुनाते थे।
कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के ग्राम हरियावाला निवासी अब्दुल शकूर के मन में आज भी गांधीवाद की लौ प्रज्वलित है। जीवन के 102 बसंत देख चुके अब्दुल शकूर आर्य समाज से जुड़े रहे, साथ ही वह रागनी के माध्यम से आज भी सक्रिय हैं। अब्दुल शकूर बताते हैं कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी के गोली लगने की खबर जैसे ही रेडियो पर प्रसारित हुई थी वैसे ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। वह कहते हैं कि उन्होंने कई बार महात्मा गांधी की मृत्यु को रागिनी के माध्यम से सुनाया। अब्दुल शकूर बताते हैं कि ‘कर दिए खत्म दो रतन वतन से हाय-हाय दिन धौली, दिया दयानंद को जहर, मार दी गांधी के गोली’ उनके मन में गांधीजी को लेकर ऐसी दीवानगी थी कि वह गांधीजी के भाषण सुनने दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ भी गए। वह गांधी जी के सत्य और अहिंसा व्रत के बारे में लोगों को बताते हैं। वह रागिनी सुनाते हैं ‘नाम के कारण गांधी जी ने इतनी भरी तबाही थी, सिर पर टोकरी ढो ढोकर भरी भारी कठिनाई थी। राज लिया था अंग्रेजों से ना करनी पड़ी लड़ाई थी, धीमे पन से काम निकाल कर आजादी दिलवाई थी’।
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हल्दौर की दो बेटियां बनी थीं महात्मा गांधी के परिवार की बहू
बिजनौर। बिजनौर के हल्दौर कस्बे की दो लड़कियों का विवाह महात्मा गांधी के कुटुंब में हुआ था। हल्दौर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाला ठाकुर दास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे। उनके परम मित्र हल्दौर निवासी लाला डालचंद थे। महात्मा गांधी ने लाला डालचंद को अपने वर्धा स्थित आश्रम में आमंत्रित किया। दोनों की बातचीत हुई और महात्मा गांधी के चाचा उत्तमचंद के वंशज प्रभुदास गांधी के साथ उनकी पुत्री अंबा देवी का विवाह हो गया। कुछ वर्षों बाद प्रभुदास गांधी के छोटे भाई कृष्णदास गांधी के विवाह की बात चली तो अंबा देवी ने अपने पिता के मित्र सेठ हीरालाल की पुत्री मनोज्ञा देवी से रिश्ता तय कर दिया। इस प्रकार हल्दौर की दो बेटियां महात्मा गांधी के परिवार की बहू बनीं।
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तुंगल सिंह और उनकी पत्नी उनके आदर्शों को अपनाया
बिजनौर। जनपद के ग्राम उदयपुर के निवासी रहे तुंगल सिंह और उनकी पत्नी भागीरथी देवी ने जीवन पर्यंत महात्मा गांधी के विचारों पर चलते हुए उनके आदर्शों को अपनाया। तुंगल सिंह के पुत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे भारत भूषण बताते हैं कि तुंगल सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में जहां अपना योगदान दिया वहीं उन्होंने महात्मा गांधी के सामाजिक आंदोलन को भी आगे बढ़ाया। तुंगल सिंह और भागीरथी देवी ने अछूतोद्धार आंदोलन में भाग लिया। तुंगल सिंह द्वारा बेगारी के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा गया और अंग्रेजों द्वारा कराई जाने वाली बेगारी प्रथा को जनपद में समाप्त करने का प्रयास किया। भारत भूषण बताते हैं कि विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में भी तुंगल सिंह ने अपनी जमीन भी दान दी।
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- आज रखा जाएगा दो मिनट का मौन
बिजनौर। महात्मा गांधी का निधन हुए 74 वर्ष हो चुके हैं लेकिन महात्मा गांधी के विचार आज भी पूरे विश्व को सत्य और अहिंसा की राह दिखा रहे हैं। युवाओं के मन में महात्मा गांधी को लेकर बेहद श्रद्धा है। आज दोपहर 11:00 बजे महात्मा गांधी को नमन करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा जाएगा।
- महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चल रहे युवा
बिजनौर। युवा अनुज चौहान कहते हैं कि महात्मा गांधी आज भी पूरे विश्व को शांति का संदेश देते हैं। उनकी मृत्यु के 74 वर्ष बाद भी आज भी गांधी दिलों में जीवित हैं। छात्र आकाश चौधरी बताते हैं कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के साथ आंदोलन करने की जो सीख दी थी वह आज भी बेहद कारगर है। किसान आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और अहिंसात्मक आंदोलन का हल भी निकला।
युवा लेखराज सिंह का कहना है कि महात्मा गांधी ने सत्य के साथ जीवन जिया। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा को घर घर तक पहुंचाया, साथ ही जीवन भर जन सेवा करते रहे। उनके आदर्शों से शिक्षा लेने की जरूरत है। छात्र सुमित कुमार ने बताया कि महात्मा गांधी ने चंपारण में नील उगाने वाले मजदूरों के साथ मिलकर जो आंदोलन किया था वह देश की स्वतंत्रता का आंदोलन बन गया। महात्मा गांधी आज भी पूरे विश्व में एक महामानव की तरह पूजे जाते हैं।
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बिजनौर। महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के विचारों से प्रेरित होकर अब्दुल शकूर जीवन भर गांधीवादी रहे। उन्हें कई बार महात्मा गांधी के दर्शन का अवसर मिला। गांधीजी की मृत्यु वाले दिन को याद करके वह आज भी सिहर उठते हैं। गांधीजी की मौत का दर्द अब्दुल शकूर की रागिनी बन गया था, जिसे जगह-जगह जाकर दर्दभरे अंदाज में सुनाते थे।
कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के ग्राम हरियावाला निवासी अब्दुल शकूर के मन में आज भी गांधीवाद की लौ प्रज्वलित है। जीवन के 102 बसंत देख चुके अब्दुल शकूर आर्य समाज से जुड़े रहे, साथ ही वह रागनी के माध्यम से आज भी सक्रिय हैं। अब्दुल शकूर बताते हैं कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी के गोली लगने की खबर जैसे ही रेडियो पर प्रसारित हुई थी वैसे ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। वह कहते हैं कि उन्होंने कई बार महात्मा गांधी की मृत्यु को रागिनी के माध्यम से सुनाया। अब्दुल शकूर बताते हैं कि ‘कर दिए खत्म दो रतन वतन से हाय-हाय दिन धौली, दिया दयानंद को जहर, मार दी गांधी के गोली’ उनके मन में गांधीजी को लेकर ऐसी दीवानगी थी कि वह गांधीजी के भाषण सुनने दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ भी गए। वह गांधी जी के सत्य और अहिंसा व्रत के बारे में लोगों को बताते हैं। वह रागिनी सुनाते हैं ‘नाम के कारण गांधी जी ने इतनी भरी तबाही थी, सिर पर टोकरी ढो ढोकर भरी भारी कठिनाई थी। राज लिया था अंग्रेजों से ना करनी पड़ी लड़ाई थी, धीमे पन से काम निकाल कर आजादी दिलवाई थी’।
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हल्दौर की दो बेटियां बनी थीं महात्मा गांधी के परिवार की बहू
बिजनौर। बिजनौर के हल्दौर कस्बे की दो लड़कियों का विवाह महात्मा गांधी के कुटुंब में हुआ था। हल्दौर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाला ठाकुर दास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे। उनके परम मित्र हल्दौर निवासी लाला डालचंद थे। महात्मा गांधी ने लाला डालचंद को अपने वर्धा स्थित आश्रम में आमंत्रित किया। दोनों की बातचीत हुई और महात्मा गांधी के चाचा उत्तमचंद के वंशज प्रभुदास गांधी के साथ उनकी पुत्री अंबा देवी का विवाह हो गया। कुछ वर्षों बाद प्रभुदास गांधी के छोटे भाई कृष्णदास गांधी के विवाह की बात चली तो अंबा देवी ने अपने पिता के मित्र सेठ हीरालाल की पुत्री मनोज्ञा देवी से रिश्ता तय कर दिया। इस प्रकार हल्दौर की दो बेटियां महात्मा गांधी के परिवार की बहू बनीं।
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तुंगल सिंह और उनकी पत्नी उनके आदर्शों को अपनाया
बिजनौर। जनपद के ग्राम उदयपुर के निवासी रहे तुंगल सिंह और उनकी पत्नी भागीरथी देवी ने जीवन पर्यंत महात्मा गांधी के विचारों पर चलते हुए उनके आदर्शों को अपनाया। तुंगल सिंह के पुत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे भारत भूषण बताते हैं कि तुंगल सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में जहां अपना योगदान दिया वहीं उन्होंने महात्मा गांधी के सामाजिक आंदोलन को भी आगे बढ़ाया। तुंगल सिंह और भागीरथी देवी ने अछूतोद्धार आंदोलन में भाग लिया। तुंगल सिंह द्वारा बेगारी के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा गया और अंग्रेजों द्वारा कराई जाने वाली बेगारी प्रथा को जनपद में समाप्त करने का प्रयास किया। भारत भूषण बताते हैं कि विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में भी तुंगल सिंह ने अपनी जमीन भी दान दी।
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- आज रखा जाएगा दो मिनट का मौन
बिजनौर। महात्मा गांधी का निधन हुए 74 वर्ष हो चुके हैं लेकिन महात्मा गांधी के विचार आज भी पूरे विश्व को सत्य और अहिंसा की राह दिखा रहे हैं। युवाओं के मन में महात्मा गांधी को लेकर बेहद श्रद्धा है। आज दोपहर 11:00 बजे महात्मा गांधी को नमन करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा जाएगा।
- महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चल रहे युवा
बिजनौर। युवा अनुज चौहान कहते हैं कि महात्मा गांधी आज भी पूरे विश्व को शांति का संदेश देते हैं। उनकी मृत्यु के 74 वर्ष बाद भी आज भी गांधी दिलों में जीवित हैं। छात्र आकाश चौधरी बताते हैं कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के साथ आंदोलन करने की जो सीख दी थी वह आज भी बेहद कारगर है। किसान आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और अहिंसात्मक आंदोलन का हल भी निकला।
युवा लेखराज सिंह का कहना है कि महात्मा गांधी ने सत्य के साथ जीवन जिया। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा को घर घर तक पहुंचाया, साथ ही जीवन भर जन सेवा करते रहे। उनके आदर्शों से शिक्षा लेने की जरूरत है। छात्र सुमित कुमार ने बताया कि महात्मा गांधी ने चंपारण में नील उगाने वाले मजदूरों के साथ मिलकर जो आंदोलन किया था वह देश की स्वतंत्रता का आंदोलन बन गया। महात्मा गांधी आज भी पूरे विश्व में एक महामानव की तरह पूजे जाते हैं।

शकूर अहमद- फोटो : BIJNOR

अनुज चौहान।- फोटो : BIJNOR

लेखराज सिंह।- फोटो : BIJNOR

सुमित।- फोटो : BIJNOR

आकाश चौधरी।- फोटो : BIJNOR

मनोज्ञा देवी उनका पुत्र शरद गांधी तथा महात्मा गांधी।- फोटो : BIJNOR