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अपनी जान दांव पर लगा बचाई सात की जान

Sat, 25 Aug 2018 12:29 AM IST
अमर उजाला/बिजनौर
अमर उजाला/बिजनौर Updated Sat, 25 Aug 2018 12:29 AM IST
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Seven lives saved at stake
बिजनौर में गंगा में डूबने वालों की नाव से तलाश करते ग्रामीण। - फोटो : बिजनौर में गंगा में डूबने वालों की नाव से तलाश करते ग्रामीण।
बिजनौर में गंगा में डूबे लोगों को बचाने के लिए प्रशासन की मदद नहीं पहुंची। गजब तो यह है कि अफसरों की गाड़ी बस तटबंध पर इधर से उधर घूमती रही। गंगा में बह रहे लोगों को बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीण आगे आए और अपनी जान की परवाह किए बगैर कूद पड़े। सात लोगों की जान इन्होंने बचाई। इस हादसे के बाद प्रशासन की बाढ़ राहत की व्यवस्था की पोल भी खुल गई है। तटीय गांव के लोग प्रशासन को जी भरकर कोस रहे हैं।
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गांव डेबलगढ़ (राजारामपुर) के गांव के लोगों की नाव गांव चाहड़वाला के सामने गंगा की लहरों में पलटने के बाद प्रशासन की आंख खुली। अफसरों की टीम रावली से बैराज तक गंगा में डूबे लोगों की ढूंढ़भाली में निकल पड़ी। गजब तो यह रहा कि अफसरों की गाड़ी केवल गंगा के तटबंध पर इधर से उधर घूमती रही। वहां मौजूद गांव वालों से जानकारी लेती रही, लेकिन फौरी तौर पर गांव वालों की कोई मदद नहीं की। नाव पलटने के दौरान चार लोगों को चाहड़वाला के सामने ही गंगा में कूदे गांव वालों ने निकाल लिया। शहजादपुर निवासी गुड्डू, रावली के तटबंध के पास पशुओं को चरा रहा था। उसने देखा कि घास की गठरी के सहारे कुछ लोग गंगा में बहकर आ रहे हैं। गुड्डू ने शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया और अपनी जान की परवाह किए बगैर ये लोग डूबने वालों को बचाने के लिए गंगा में कूद पड़े। सात लोगों को ये लोग सकुशल गंगा से निकाल लाए। रावली बैराज के बीच तटबंध पर नरोल्लापुर गुरुद्वारे के सामने बाकी लोगों को गांव वालों ने बाहर निकाला। जो लोग गंगा से सकुशल बाहर निकाले गए वे उन सबको गांव वालों ने ही निकाला है। प्रशासन की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की गई। इसे लेकर गांव वालों में भारी गुस्सा रहा। गांव वालों का कहना था कि अफसरों ने उनकी कोई मदद नहीं की। ऐसा पहली बार ही नहीं हुआ। इससे पहले भी प्रशासन यही करता आया है।
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महिलाओं के हड़बड़ाने से पलटी ओवरलोड नाव
बिजनौर में मंडावर क्षेत्र में चारा लेकर लौट रहे लोगों की नाव ओवर लोड    होने व नाव में सवार महिलाओं के घबराने से पलटी। गंगा के उफान को पार करके पशुओं के लिए चारा लेने जाना गांव के लोगों का रोज का काम है। राजारामपुर, रघुनाथपुर व डैबलगढ़ के लोग रोज एक साथ नाव में सवार   होकर जाते हैं। गंगा में दो तरह की नाव चलती हैं। एक तो सामान्य नाव होती है। इसमे 15 से 20 लोग सवार हो जाते हैं। दूसरंी नाव जोड़े वाली नाव होती है। इसमें दो नावों को लकड़ी के एक बड़े फ्रेम से जोड़कर एक किया जाता है। किसान जोड़े वाली नाव पर ट्रैक्टर ट्राली और 50 क्विंटल गन्ना तक भरकर ले आते हैं। गंगा उफान पर न हो तो जोड़े वाली नाव से ही किसान बुग्गी, ट्रैक्टर आदि सामान गंगा पार ले जाते हैं। खादर क्षेत्र में नाव ही खेती का सबसे बड़ा जरिया है। सबसे अधिक मौत में गंगा की लहरों में नाव पर हादसों के दौरान होती है। शुक्रवार को जो नाव गंगा में डूबी उसमें क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। इसके अलावा घास की भी काफी गठरी नाव में लाद दी गई थी। गंगा से बाहर निकाले गए सूबे समेत बाकी लोगों ने बताया कि नाव जब गंगा की लहरों के बीच में आई तो लहरों से नाव में पानी भर गया। यह देखकर नाव में सवार महिलाएं हड़बड़ा गईं। महिलाओं की चीख पुकार निकली और वे इधर-उधर खिसकीं तो नाव डगमगा गई और पलट गई।
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आज हेलीकाप्टर से ढूंढे जाएंगे लोग : डीएम
बिजनौर में डीएम अटल कुमार राय के मुताबिक नाव पलटने से 28 लोग गंगा में बह गए थे। इनमें से 17 को सकुशल गंगा से निकाल लिया गया है। इनमें छह महिलाएं व 11 पुरुष हैं, जबकि एक महिला का शव मिला है। बाकी लोग लापता हैं। इनकी तलाश के लिए पीएसी व एनडीआरएफ की गाजियाबाद से टीम बुलाई गई है। 24 घंटे के अंदर पीड़ितों को दैवीय आपदा की धनराशि देने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम खराब होने की वजह से शुक्रवार को गंगा में डूबे लोगों को ढूंढने के लिए हेलीकाप्टर नहीं आ सका। शनिवार को हेलीकाप्टर आ जाएगा। उन्होंने इस बात को गलत बताया कि बाढ़ चौकी पर कर्मचारी तैनात नहीं रहते हैं। जहां ऐसा हो रहा है वहां दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार को बाढ़ राहत चौकी से ही गंगा में डूबने वालों की सूचना क्षेत्रीय लेखपाल ने दी। सभी चौकी काम कर रही हैं। प्रशासन की मदद नहीं करने के आरोपों को भी उन्होंने गलत बताया। कहा कि प्रशासन ने भरपूर मदद की है। वह मुरादाबाद कमिश्नर की बैठक में थे। जैसे ही सूचना गई अफसरों की टीम को दौड़ा दिया गया। कमिश्नर खुद शाम के समय बिजनौर पहुंचे और बैराज से रावली तक तटबंध पर जाकर घटना का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि नाव में सवार होकर लोग खुद अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा पार कर रहे हैं जो कि गलत है। लोगों को भी ऐसे नहीं जाना चाहिए। ऐसा लोग खुद कर रहे हैं।

रावली तट पर लगी रही भीड़
बिजनौर। मंडावर क्षेत्र में नाव पलटने के बाद गंगा में समाए लोगों को ढूंढने के लिए आसपास के गांव के लोगों की भीड़ रावली के पास तटबंध पर लग गई। रावली से लेकर बैराज तक तटबंध पर लोगों की भारी भीड़ रही। बिजनौर तक से लोग दौड़कर वहां पहुंचे। आसपास के गांव के लोग वहां डेरा डाले रहे। विधायक सुचि मौसम चौधरी के ससुर राजेंद्र सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी, रालोद नेता आशु राणा भी रावली के तटबंध पर पहुंच गईं व लोगों से पूरे हादसे की जानकारी ली।

उफान पर तैराक भी हो जाते हैं फेल
गांव वालों की मानें तो गंगा के उफान के दौरान गंगा में तैरने वाला भी अपनी जान नहीं बचा सकता है। गंगा की लहरें इतनी तेज होती हैं कि तैरने वाले के भी हाथ पांव फूल जाते हैं। लहरों के बीच में वह खुद उलट पलट होकर गंगा में समा जाता है। गंगा में सामान्य पानी होने के दौरान तो तैराक अपनी जान बचा सकता है। बरसात के दिनों में ऐसा नहीं हो सकता है। गांव वालों के मुताबिक गंगा के तटीय गांव के महिलाओं को छोड़कर सभी लोग तैरना जानते हैं। कुछ महिलाएं भी तैरना सीख गई हैं। बच्चों को भी तैरना सिखाया जा रहा है।

जान बचाने के लिए महिलाओं ने चिल्लाते हुए पुरुषों को जकड़ा
गांव चाहड़वाला के सामने नाव डूबने के दौरान अपनी जान बचाने के लिए महिलाओं ने गठरी के सहारे बह रहे पुरूषों को कसकर पकड़ लिया। उन्हें इतनी बुरी तरह जकड़ा कि महिलाओं ने छोड़ा नहीं। कई लोगों की डूबने की नौबत आ गई। अपनी जान बचाने के लिए इन्होंने महिलाओं से अपने आपको छुड़ाया। तब जाकर उनकी जान बच पाई। इनमें से अधिकतर   महिलाएं गंगा की लहरों में समा गईं।
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