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बर्बाद फसल को देख बढ़ रही किसानों की धड़कन
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बढ़ापुर के गांव चपड़ा में बारिश से खराब हुई की धान की फसल।
- फोटो : BIJNOR
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बर्बाद फसल को देख बढ़ रही किसानों की धड़कन
बढ़ापुर। दो दिन बारिश हुई और अब मौसम साफ है, लेकिन बारिश से भीगी फसल को अभी तक किसान सुखा रहे हैं। खराब हुई फसल को देख किसान परेशान हो रहे हैं। बारिश से क्षेत्र के किसानों को सर्वाधिक नुकसान खेतों पर कटी पड़ी धान, उड़द व मूंगफली की फसलों को पहुंचा है। किसानों का बारिश के पानी से खेतों पर नष्ट हुई फसलों को देख देखकर दम सूख रहा है। तैयार पड़ी फसलों के बर्बाद होने का दुख तो सभी किसानों को है, लेकिन भूमि ठेके व बटाई पर लेकर कर्ज लिए धन से खेती करने वाले किसान ज्यादा दुखी है। ऐसे किसानों को फसलें बेचकर कर्ज चुकाना था, पर अब तो उल्टे किसान और भी अधिक कर्जदार हो गए है। फसलों से उम्मीद लगाये बैठे किसानों की आस पूरी तरह टूट गई है। फसलों की तबाही से प्रभावित इन किसानों का कहना है कि अब तो सरकार को ही उनकी आर्थिक मदद करनी होगी, नहीं तो स्वाभाविक तौर पर उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
बारिश ने उम्मीदों से सींची फसल का खात्मा कर दिया : जाहिद अली
ग्राम रामजीवाला निवासी जाहिद अली का कहना है कि उसने छह बीघा धान की तैयार हुई फसल को काटकर खेत पर रखी थी कि दो दिन की भीषण बारिश ने फसल को तहस-नहस कर दिया। उसने धान की फसल को बहुत उम्मीदों से सींचा था। बारिश ने फसल का सब खात्मा कर दिया।
बारिश का पानी बहा ले गया सारी उम्मीदें : सहरवी
सहरवी निवासी चपड़ा का कहना है कि उसने ठेके पर जमीन लेकर पांच बीघा धान की फसल लगाई थी। जी जान से जुटकर फसल की देखभाल की। फसल अच्छी हुई थी। फसल बेचने पर अच्छी रकम मिलने की उम्मीद लिए फसल काटकर खेत पर रखी थी कि बेमौसम की बारिश ने धान की फसल को नष्ट कर दिया और उसकी सारी उम्मीदें बारिश के पानी के साथ बह गई है।
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सात बीघा उड़द की फसल भीगकर तहस नहस : दक्षपाल सिंह
कोटरा गांवड़ी निवासी किसान दक्षपाल सिंह ने बताया कि उसने सात बीघा भूमि पर उड़द की फसल लगायी थी। फसल बहुत अच्छी हुई थी। फसल तैयार होने पर काटकर खेत पर रखी थी कि दो दिन की भीषण बारिश में भीगकर उसकी उड़द की सारी फसल खत्म हो गयी।
धान की उम्दा फसल होने के अरमान को साथ बहा ले गया पानी : मोहम्मद आबिद
आबिद ने कहा बताया कि उसने मोजा चपड़ा में चार बीधा धान की फसल लगाई थी। फसल बहुत अच्छी हुई। फसल काटकर खेत पर रख दी गई और धान की फसल भीषण बारिश के पानी में भीगकर तबाह हो गई। उसकी नष्ट हुई फसल अभी भी खेत पर ही बिखरी पड़ी है। खेत से अभी पानी नहीं सूखा है।
फसल से अच्छी आय होने की आशा निराशा में बदली : शेर सिंह
शेर सिंह निवासी कोटरा गांवड़ी ने बताया कि इस भीषण बारिश का खेत पर खड़ी फसलों पर तो प्रतिकूल प्रभाव पड़ा ही है, पर बारिश के पानी में भीगकर उसकी खेत पर कटी पड़ी चार बीघा धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। फसल बहुत अच्छी हुई थी। इस बार धान के दाम भी अच्छे मिलने वाले थे।
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बढ़ापुर। दो दिन बारिश हुई और अब मौसम साफ है, लेकिन बारिश से भीगी फसल को अभी तक किसान सुखा रहे हैं। खराब हुई फसल को देख किसान परेशान हो रहे हैं। बारिश से क्षेत्र के किसानों को सर्वाधिक नुकसान खेतों पर कटी पड़ी धान, उड़द व मूंगफली की फसलों को पहुंचा है। किसानों का बारिश के पानी से खेतों पर नष्ट हुई फसलों को देख देखकर दम सूख रहा है। तैयार पड़ी फसलों के बर्बाद होने का दुख तो सभी किसानों को है, लेकिन भूमि ठेके व बटाई पर लेकर कर्ज लिए धन से खेती करने वाले किसान ज्यादा दुखी है। ऐसे किसानों को फसलें बेचकर कर्ज चुकाना था, पर अब तो उल्टे किसान और भी अधिक कर्जदार हो गए है। फसलों से उम्मीद लगाये बैठे किसानों की आस पूरी तरह टूट गई है। फसलों की तबाही से प्रभावित इन किसानों का कहना है कि अब तो सरकार को ही उनकी आर्थिक मदद करनी होगी, नहीं तो स्वाभाविक तौर पर उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
बारिश ने उम्मीदों से सींची फसल का खात्मा कर दिया : जाहिद अली
ग्राम रामजीवाला निवासी जाहिद अली का कहना है कि उसने छह बीघा धान की तैयार हुई फसल को काटकर खेत पर रखी थी कि दो दिन की भीषण बारिश ने फसल को तहस-नहस कर दिया। उसने धान की फसल को बहुत उम्मीदों से सींचा था। बारिश ने फसल का सब खात्मा कर दिया।
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बारिश का पानी बहा ले गया सारी उम्मीदें : सहरवी
सहरवी निवासी चपड़ा का कहना है कि उसने ठेके पर जमीन लेकर पांच बीघा धान की फसल लगाई थी। जी जान से जुटकर फसल की देखभाल की। फसल अच्छी हुई थी। फसल बेचने पर अच्छी रकम मिलने की उम्मीद लिए फसल काटकर खेत पर रखी थी कि बेमौसम की बारिश ने धान की फसल को नष्ट कर दिया और उसकी सारी उम्मीदें बारिश के पानी के साथ बह गई है।
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सात बीघा उड़द की फसल भीगकर तहस नहस : दक्षपाल सिंह
कोटरा गांवड़ी निवासी किसान दक्षपाल सिंह ने बताया कि उसने सात बीघा भूमि पर उड़द की फसल लगायी थी। फसल बहुत अच्छी हुई थी। फसल तैयार होने पर काटकर खेत पर रखी थी कि दो दिन की भीषण बारिश में भीगकर उसकी उड़द की सारी फसल खत्म हो गयी।
धान की उम्दा फसल होने के अरमान को साथ बहा ले गया पानी : मोहम्मद आबिद
आबिद ने कहा बताया कि उसने मोजा चपड़ा में चार बीधा धान की फसल लगाई थी। फसल बहुत अच्छी हुई। फसल काटकर खेत पर रख दी गई और धान की फसल भीषण बारिश के पानी में भीगकर तबाह हो गई। उसकी नष्ट हुई फसल अभी भी खेत पर ही बिखरी पड़ी है। खेत से अभी पानी नहीं सूखा है।
फसल से अच्छी आय होने की आशा निराशा में बदली : शेर सिंह
शेर सिंह निवासी कोटरा गांवड़ी ने बताया कि इस भीषण बारिश का खेत पर खड़ी फसलों पर तो प्रतिकूल प्रभाव पड़ा ही है, पर बारिश के पानी में भीगकर उसकी खेत पर कटी पड़ी चार बीघा धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। फसल बहुत अच्छी हुई थी। इस बार धान के दाम भी अच्छे मिलने वाले थे।