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Bijnor News: रिटायर्ड शिक्षिका से ठगे 29 लाख रुपये
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बिजनाैर। डिजिटल अरेस्ट करके साइबर ठगी के तमाम मामले देशभर में आ चुके हैं। बिजनौर में भी मनी लाॅन्डि्रंग के झूठे मामले में सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने का झांसा देकर बैंक खाते के सत्यापन की एवज में रिटायर्ड शिक्षिका से 29 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज करते हुए जांच पड़ताल चालू कर दी है।
नजीबाबाद के मोहल्ला हवेलीतला की रहने वालीं तोजीहा सुल्ताना सेवानिवृत्त शिक्षिका है। उन्होंने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि 24 दिसंबर उनके पास एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को टेलीकाम कंपनी का अधिकारी बताते हुए उनके नाम पर एक और मोबाइल सिम चलने की बात कही। साथ ही उक्त मामले को दिल्ली पुलिस काे ट्रांसफर करने की बात कही। 25 दिसंबर को वीडियो कॉल आई। वीडियो कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी और नाम गोपेश बताया। उसने कहा कि तुम्हारे खाते में मनी लान्ड्रिंग का पैसा आया है।
दिल्ली पुलिस का अधिकारी बता रहे साइबर ठग ने बताया कि सीबीआई का मामला है। कुछ ही देर के बाद एक और कॉल आई, कॉलर ने अपना नाम अनिल सिंह और सीबीआई का अधिकारी बताया। उसने कहा कि आपके बैंक आफ बड़ौदा के खाते में मनी लाॅन्डि्रंग का पैसा पहुंचा है। अब उन्हें सीबीआई के दिल्ली ऑफिस में आना होगा। इसी बीच रिटायर्ड शिक्षिका ने डरते हुए कहा कि मामला कैसे निपट सकता है। आरोपी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दिलवाने का प्रयास करते हैं। अगर जमानत मिली तो सीबीआई के दफ्तर में नहीं आना पड़ेगा।
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26 दिसंबर को फिर से फोन आया और सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका निरस्त होने की बात कही। फिर से कहा गया कि खाता का सत्यापन करा लो तो राहत मिल जाएगी। खाते का सत्यापन कराने की एवज में 29 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसमें 26 से 30 दिसंबर तक पांच बार में करीब तीन लाख 95 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए।
जबकि 29 दिसंबर को चेक के माध्यम से 25 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। एएसपी सिटी कृष्ण गोपाल ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। साइबर ठगी कहां से और किसने की है, उसकी जांच शुरू कर दी गई है।
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नजीबाबाद के मोहल्ला हवेलीतला की रहने वालीं तोजीहा सुल्ताना सेवानिवृत्त शिक्षिका है। उन्होंने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि 24 दिसंबर उनके पास एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को टेलीकाम कंपनी का अधिकारी बताते हुए उनके नाम पर एक और मोबाइल सिम चलने की बात कही। साथ ही उक्त मामले को दिल्ली पुलिस काे ट्रांसफर करने की बात कही। 25 दिसंबर को वीडियो कॉल आई। वीडियो कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी और नाम गोपेश बताया। उसने कहा कि तुम्हारे खाते में मनी लान्ड्रिंग का पैसा आया है।
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दिल्ली पुलिस का अधिकारी बता रहे साइबर ठग ने बताया कि सीबीआई का मामला है। कुछ ही देर के बाद एक और कॉल आई, कॉलर ने अपना नाम अनिल सिंह और सीबीआई का अधिकारी बताया। उसने कहा कि आपके बैंक आफ बड़ौदा के खाते में मनी लाॅन्डि्रंग का पैसा पहुंचा है। अब उन्हें सीबीआई के दिल्ली ऑफिस में आना होगा। इसी बीच रिटायर्ड शिक्षिका ने डरते हुए कहा कि मामला कैसे निपट सकता है। आरोपी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दिलवाने का प्रयास करते हैं। अगर जमानत मिली तो सीबीआई के दफ्तर में नहीं आना पड़ेगा।
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26 दिसंबर को फिर से फोन आया और सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका निरस्त होने की बात कही। फिर से कहा गया कि खाता का सत्यापन करा लो तो राहत मिल जाएगी। खाते का सत्यापन कराने की एवज में 29 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसमें 26 से 30 दिसंबर तक पांच बार में करीब तीन लाख 95 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए।
जबकि 29 दिसंबर को चेक के माध्यम से 25 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। एएसपी सिटी कृष्ण गोपाल ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। साइबर ठगी कहां से और किसने की है, उसकी जांच शुरू कर दी गई है।