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धार्मिक स्थल तोड़ने पहुंची टीम को दौड़ाया

Mon, 17 Sep 2018 12:00 AM IST
अमर उजाला/बिजनौर
अमर उजाला/बिजनौर Updated Mon, 17 Sep 2018 12:00 AM IST
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Ran the team reached the breaking point of religious place
एसडीएम कोटद्वार का घेराव कर विरोध जताते नागरिक। - फोटो : अमर उजाला
कालागढ़ में एनजीटी के आदेशों के तहत रामगंगा बांध परियोजना की कालोनियों की भूमि को वन विभाग सौंपे जाने को लेकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही। दूसरे दिन जब प्रशासन की टीम ने धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण की कोशिश की तो जनता ने टीम को दौड़ लिया। विरोध के बाद टीम को मौके से बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि प्रशासन की टीम ने आवास व भवनों को तोड़ने में अपनी मनमानी दिखाई। सरकारी आवासों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में जनता ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। लेकिन जब मामला धार्मिक स्थलों पर पहुंचा तो विरोध खड़ा हो गया।  
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रविवार को दूसरे दिन भी कालागढ़ में प्रशासन का महाबली भी जमकर गरजा। प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में सहायक अभियंताओं की करोड़ों की लागत से बनी कोठियों को जमींदोज कर दिया। प्रशासन ने अड़ियल रूख अपनाते हुए श्रीरामलीला का मंच भी ध्वस्त कर दिया। इसके बाद जैसे ही महाबली मंदिर परिसर को ध्वस्त करने पहुंचा तो जनता के गुस्सा फूट गया। जनता ने हंगामा करते हुए प्रशासन की टीम को दौड़ लिया। पुलिस प्रशासन की टीम देवालय मंदिर के परिसर को तोड़ने के लिए गई थी। जिसकी सूचना पर बड़ी संख्या में नागरिक मौके पर पहुंच गए। मंदिर तोड़ने को लेकर जनता की एसडीएम कमलेश मेहता से तीखी नोक झोक हो गई। जनता ने धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाने से साफ मना कर दिया। जनता ने चेताया यदि धार्मिक स्थलों को तोड़ने की जरा भी कोशिश की गई तो सरकार की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। जनता के विरोध को देख मौके पर भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष राजकुमार भी पहुंच गए। उन्होंने प्रशासन से जनता की भावनाओं का ख्याल रखने की अपील की। जनता के विरोध के बाद एसडीएम टीम के साथ मौके से वापिस चले गए। इसके अलावा सी आवासीय क्षेत्र, डी आवासीय क्षेत्र में ध्वस्तीकरण दिनभर जारी रहा।  दोपहर तक लगभग एक सौ पचास इमारतों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका था। देर शाम तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी थी।  
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आवासों को ध्वस्तीकरण से न बचा सकी सरकार
कालागढ़। कालागढ़ की रामगंगा बांध परियोजना की कालोनियों में दो दिनों से करोड़ों रुपये से निर्मित सरकारी आवासों का ध्वस्तीकरण एनजीटी के आदेश का प्रशासन कर रहा है। एनजीटी के फैसले के बारे में विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूर्व काबीना मंत्री व क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, व पूर्व भाजपा विधायक शैलेंद्र सिंह रावत का कहना है कि कालागढ़ के राजकीय आवासों में गरीब जनता किसी तरह सिर छिपाए हैं। कालागढ़ की भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने के मामले में जनता के हितों के लिए राज्य सरकार को एनजीटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए थी। वहीं जनता के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को विधानसभा से बिल पारित कर उसे केंद्र को भेजा जाना चाहिए था। तीन माह पूर्व राज्य सरकार को सुझाव के लिए काबीना मंत्री ने पत्र भी लिखा था, जिसका कोई उत्तर नहीं मिला है। दोनों ही विधायकों ने कालागढ़ की इस कार्रवाई को राज्य सरकार की उदासीनता बताया है।
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