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गन्ने के बजाए गैस के दाम बढ़ने से रोष
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गन्ने के बजाए गैस के दाम बढ़ने से रोष
बिजनौर। गन्ने के दाम बढ़ाने के बजाए सरकार ने सिलिंडर के दाम महीने में लगातार दो बार बढ़ने से किसान परिवारों की महिलाओं में रोष है। पिछले महीने सिलिंडर के दाम 707.50 रुपये थे, एक फरवरी को दाम बढ़ाकर 732 रुपये कर दिए गए। अब फिर से दाम पर 50 रुपये की एकमुश्त वृद्धि की गई है। सिलेंडर के दाम 782.50 रुपये हो गए हैं।
किसान परिवार की निगम चौधरी का कहना है कि किसान गन्ने के दाम बढ़ाने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार सिलिंडर के दाम बढ़ा रही है। किसानों को तो फसल का सही दाम वैसे ही नहीं मिल रहा है। अब किसान के घर की रसोई भी महंगी कर दी गई है।
मालतीनगर निवासी संयोगिता त्यागी का कहना है कि वे शहर में बच्चों को पढ़ाने के लिए आई हैं। शहर में वैसे ही बहुत खर्चा है। सरकार से इस बार आस थी कि गन्ने के दाम बढ़ेंगे, लेकिन तीन साल में गन्ने पर एक रुपये न बढ़ाने वाली सरकार ने सिलिंडर पर एक ही महीने में 75 रुपये बढ़ा दिए हैं।
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गांव करनपुर गांवड़ी निवासी सुदेशना देवी का कहना है कि गन्ने की फसल बेचकर ही किसान के घर का खर्च चलता है। जिस तरह सरकार ने तीन साल में सिलिंडर के रेट बढ़ाए हैं उसी हिसाब से गन्ने के दाम भी बढ़ाए जाने चाहिए।
मालतीनगर निवासी मृणालिनी शर्मा के पति सरकारी कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि सिलिंडर के दाम बढ़ने से रसोई खर्च बढ़ जाएगा। सरकार ने एकदम से इतने रेट बढ़ाकर सही नहीं किया है। इतने रुपये तो एक साल में बढ़ने चाहिए थे।
गांव स्वाहेड़ी निवासी नीरज चौधरी का कहना है कि सरकार सिलिंडर, खाद पर किसानों की जेब ढीली कर रही है लेकिन किसान को फसल का मूल्य देने को तैयार नहीं है। किसान बहुत उम्मीद से फसल उगाता है लेकिन सही दाम नहीं मिल रहा। सरकार को किसान की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
और बिक्री हुई कम
गैस सिलिंडर कम बिकने का असर कुछ गैस एजेंसियों पर देखने को मिला है। मंगलवार को देहात में सिलिंडर की बिक्री कम बताई जा रही है। कुच्छल इंडेन सेवा के प्रोपराइटर मनोज कुच्छल का कहना है कि देहात में रोज औसतम 60 से 70 सिलिंडर बिक जाते हैं लेकिन मंगलवार को केवल 10 सिलिंडर ही बिके। सिलेंडर पर महंगाई का असर देखने को मिला है।
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बिजनौर। गन्ने के दाम बढ़ाने के बजाए सरकार ने सिलिंडर के दाम महीने में लगातार दो बार बढ़ने से किसान परिवारों की महिलाओं में रोष है। पिछले महीने सिलिंडर के दाम 707.50 रुपये थे, एक फरवरी को दाम बढ़ाकर 732 रुपये कर दिए गए। अब फिर से दाम पर 50 रुपये की एकमुश्त वृद्धि की गई है। सिलेंडर के दाम 782.50 रुपये हो गए हैं।
किसान परिवार की निगम चौधरी का कहना है कि किसान गन्ने के दाम बढ़ाने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार सिलिंडर के दाम बढ़ा रही है। किसानों को तो फसल का सही दाम वैसे ही नहीं मिल रहा है। अब किसान के घर की रसोई भी महंगी कर दी गई है।
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मालतीनगर निवासी संयोगिता त्यागी का कहना है कि वे शहर में बच्चों को पढ़ाने के लिए आई हैं। शहर में वैसे ही बहुत खर्चा है। सरकार से इस बार आस थी कि गन्ने के दाम बढ़ेंगे, लेकिन तीन साल में गन्ने पर एक रुपये न बढ़ाने वाली सरकार ने सिलिंडर पर एक ही महीने में 75 रुपये बढ़ा दिए हैं।
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गांव करनपुर गांवड़ी निवासी सुदेशना देवी का कहना है कि गन्ने की फसल बेचकर ही किसान के घर का खर्च चलता है। जिस तरह सरकार ने तीन साल में सिलिंडर के रेट बढ़ाए हैं उसी हिसाब से गन्ने के दाम भी बढ़ाए जाने चाहिए।
मालतीनगर निवासी मृणालिनी शर्मा के पति सरकारी कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि सिलिंडर के दाम बढ़ने से रसोई खर्च बढ़ जाएगा। सरकार ने एकदम से इतने रेट बढ़ाकर सही नहीं किया है। इतने रुपये तो एक साल में बढ़ने चाहिए थे।
गांव स्वाहेड़ी निवासी नीरज चौधरी का कहना है कि सरकार सिलिंडर, खाद पर किसानों की जेब ढीली कर रही है लेकिन किसान को फसल का मूल्य देने को तैयार नहीं है। किसान बहुत उम्मीद से फसल उगाता है लेकिन सही दाम नहीं मिल रहा। सरकार को किसान की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
और बिक्री हुई कम
गैस सिलिंडर कम बिकने का असर कुछ गैस एजेंसियों पर देखने को मिला है। मंगलवार को देहात में सिलिंडर की बिक्री कम बताई जा रही है। कुच्छल इंडेन सेवा के प्रोपराइटर मनोज कुच्छल का कहना है कि देहात में रोज औसतम 60 से 70 सिलिंडर बिक जाते हैं लेकिन मंगलवार को केवल 10 सिलिंडर ही बिके। सिलेंडर पर महंगाई का असर देखने को मिला है।