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इस्लामनगर मे सिंचाई विभाग से भूमि वापस करने का प्रस्ताव पारित
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सिंचाई विभाग से भूमि वापस लेने का प्रस्ताव पारित
कालागढ़(बिजनौर)। ग्राम पंचायत इस्लामनगर की निष्प्रोज्य भूमि को सिंचाई विभाग से वापस लेने का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की तरफ से किया गया है। ग्राम प्रधान सहित गांव के लोगों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम सिंचाई विभाग से परेशान होकर उठाना बताया गया है।
ग्राम पंचायत इस्लामनगर की प्रधान राखी काला ने बताया कि 1951 में क्षेत्र में 12 पूर्व सैनिक कालोनियों को बसाया था। जिनमें इस्लामनगर पंचायत में मुरीवाला, जामनवाला और भिक्कावाला को शामिल किया गया था। 1957 में रामगंगा बांध परियोजना के निर्माण के समय इस्लामनगर की 30 एकड़ भूमि सरकारी आवासों के लिए और 69.40 एकड़ अन्य सरकारी कामों के लिए ली गई थी। जिसमें से 14.73 एकड़ भूमि पर भिक्कावाला पंप हाउस बना जबकि 54.67 एकड़ भूमि आज तक निष्प्रयोज्य है। 1969 में जमींदारी प्रथा के समाप्त होने के बाद पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई। सिंचाई विभाग की कालोनी में सड़कों का रख-रखाव और पेयजल की सुविधा के लिए पंचायत की ओर से हैंडपंप लगवाए गए हैं, लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा जनता को परेशान किया जा रहा है। बांध परियोजना से कई विभाग अन्य स्थानों के लिए स्थानांतरित हो गए हैं। ऐसे में पंप हाउस की 14.73 एकड़ भूमि को छोड़कर अन्य समस्त भूमि ग्राम पंचायत को वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव पर ग्राम प्रधान के पति विनोद काला, अनिल राजौरा, हरकेश सिंह, राकेश कुमार, राजकुमार के अलावा 53 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए हैं।
लोगों को मिलने चाहिए अधिकार
नागरिक मुकेश कुमार, सुशील और मदनचंद आदि का कहना है कि यहां की जनता पंचायत चुनाव में इस्लामनगर के लिए, विधानसभा में बढ़ापुर के लिए और लोकसभा में मुरादाबाद के लिए मतदान करती है। यहां की जनता को उनके अधिकार मिलने चाहिए, उत्पीड़न बंद होना चाहिए।
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विभाग का नजरिया जनसहयोगी : अग्रवाल
रामगंगा बांध परियोजना के अधीक्षण अभियंता आरके अग्रवाल का कहना है कि विभाग का नजरिया जनसहयोग का है। इस विषय में जिलाधिकारी के साथ बैठक हुई है। विचार विमर्श चल रहा है। भूमि को लेकर आवश्यक जानकारी राजस्व विभाग से मांगी गई है।
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कालागढ़(बिजनौर)। ग्राम पंचायत इस्लामनगर की निष्प्रोज्य भूमि को सिंचाई विभाग से वापस लेने का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की तरफ से किया गया है। ग्राम प्रधान सहित गांव के लोगों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम सिंचाई विभाग से परेशान होकर उठाना बताया गया है।
ग्राम पंचायत इस्लामनगर की प्रधान राखी काला ने बताया कि 1951 में क्षेत्र में 12 पूर्व सैनिक कालोनियों को बसाया था। जिनमें इस्लामनगर पंचायत में मुरीवाला, जामनवाला और भिक्कावाला को शामिल किया गया था। 1957 में रामगंगा बांध परियोजना के निर्माण के समय इस्लामनगर की 30 एकड़ भूमि सरकारी आवासों के लिए और 69.40 एकड़ अन्य सरकारी कामों के लिए ली गई थी। जिसमें से 14.73 एकड़ भूमि पर भिक्कावाला पंप हाउस बना जबकि 54.67 एकड़ भूमि आज तक निष्प्रयोज्य है। 1969 में जमींदारी प्रथा के समाप्त होने के बाद पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई। सिंचाई विभाग की कालोनी में सड़कों का रख-रखाव और पेयजल की सुविधा के लिए पंचायत की ओर से हैंडपंप लगवाए गए हैं, लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा जनता को परेशान किया जा रहा है। बांध परियोजना से कई विभाग अन्य स्थानों के लिए स्थानांतरित हो गए हैं। ऐसे में पंप हाउस की 14.73 एकड़ भूमि को छोड़कर अन्य समस्त भूमि ग्राम पंचायत को वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव पर ग्राम प्रधान के पति विनोद काला, अनिल राजौरा, हरकेश सिंह, राकेश कुमार, राजकुमार के अलावा 53 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए हैं।
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लोगों को मिलने चाहिए अधिकार
नागरिक मुकेश कुमार, सुशील और मदनचंद आदि का कहना है कि यहां की जनता पंचायत चुनाव में इस्लामनगर के लिए, विधानसभा में बढ़ापुर के लिए और लोकसभा में मुरादाबाद के लिए मतदान करती है। यहां की जनता को उनके अधिकार मिलने चाहिए, उत्पीड़न बंद होना चाहिए।
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विभाग का नजरिया जनसहयोगी : अग्रवाल
रामगंगा बांध परियोजना के अधीक्षण अभियंता आरके अग्रवाल का कहना है कि विभाग का नजरिया जनसहयोग का है। इस विषय में जिलाधिकारी के साथ बैठक हुई है। विचार विमर्श चल रहा है। भूमि को लेकर आवश्यक जानकारी राजस्व विभाग से मांगी गई है।