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कार्बेट की तर्ज पर अमानगढ़ में भी कर सकेंगे वन्यजीवों का दीदार
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प्रस्ताव मंजूर, अमानगढ़ बनेगा पर्यटन जोन
बिजनौर। कार्बेट पार्क की तर्ज पर अमानगढ़ में भी वन्य जीवों का दीदार कर सकेंगे। वन्यजीव बाहुल्य इस वन रेंज में सैर सपाटा करने और वन्यजीवों को देखने का सपना नवंबर में पूरा हो सकता है। अमानगढ़ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के वन विभाग के प्रस्ताव को वन निगम ने मंजूरी दे दी है। जल्दी ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। सब कुछ सही रहा तो इसी साल नवंबर में पर्यटन का काम शुरू हो सकता है। पर्यटकों के खाने पीने से जुड़ी व अन्य सुविधाओं का इंतजाम पीली बांध के पास किए जाने की संभावना है।
अमानगढ़ की गोद प्रकृति ने पेड़-पौधों व सुंदर वन्यजीवों से भरी है। अमानगढ़ का रकबा एक लाख बीघा जमीन से अधिक है। उत्तराखंड बनने से पहले यह जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का ही हिस्सा था। यहां बाघ, गुलदार, हाथी, चीतल आदि बहुत संख्या में हैं। अमानगढ़ में आम जनता को घूमने की अनुमति नहीं रहती है, जबकि उत्तराखंड के वन क्षेत्र में बहुत पर्यटक आते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग भी इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा था। इसका प्रस्ताव वन निगम के सामने रखा था। वन निगम ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यहां पर अब पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो नवंबर में अमानगढ़ में पर्यटन शुरू हो सकता है। तब आम लोगों को भी अमानगढ़ में प्रकृति की सुंदरता निहारने का अवसर मिलेगा।
पीली बांध में होगी बोटिंग
अमानगढ़ के पास में ही पीली बांध है। यहां पर बोटिंग की सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा सफारी यानि घूमने के लिए जीप आदि की व्यवस्था की जाएगी। होटल, शौचालय आदि की व्यवस्था पीली बांध के पास ही करने पर विचार किया जा रहा है।
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अमानगढ़ एक नजर में
रकबा 9580 हेक्टेयर
बाघ 27
गुलदार 45
चिकारा 06
काला हिरन 50
सांभर 226
बारहसिंगा 37
भालू 9
मोर 1074
नोट: आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं।
दुर्लभ प्रजाति के लकड़बग्घे मिले
अमानगढ़ के एरिया के पास में सफेद धारी वाले लकड़बग्घे भी मिले थे। ये दुर्लभ प्रजाति के होते हैं। इनके होने का पहले पता तक नहीं था। दो साल पहले किसी वाहन की चपेट में आकर एक लकड़बग्घे की मौत हो गई थी। तब पहली बार यहां लकड़बग्घा होने का पता चला था। इसके कुछ दिन बाद एक लकड़बग्घे ने किसानों पर भी हमला बोल दिया था और किसानों ने उसे मार दिया था।
मंजूरी मिली, पर्यटन का केंद्र बनेगा अमानगढ़: डीएफओ
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार अमानगढ़ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने को मंजूरी मिल गई है। जल्दी ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा। इस बात का ध्यान रखा जाएगा पर्यटन का मकसद पूरा हो जाए और वन्य जीवों के जीवन पर कोई असर भी न पड़े।
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बिजनौर। कार्बेट पार्क की तर्ज पर अमानगढ़ में भी वन्य जीवों का दीदार कर सकेंगे। वन्यजीव बाहुल्य इस वन रेंज में सैर सपाटा करने और वन्यजीवों को देखने का सपना नवंबर में पूरा हो सकता है। अमानगढ़ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के वन विभाग के प्रस्ताव को वन निगम ने मंजूरी दे दी है। जल्दी ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। सब कुछ सही रहा तो इसी साल नवंबर में पर्यटन का काम शुरू हो सकता है। पर्यटकों के खाने पीने से जुड़ी व अन्य सुविधाओं का इंतजाम पीली बांध के पास किए जाने की संभावना है।
अमानगढ़ की गोद प्रकृति ने पेड़-पौधों व सुंदर वन्यजीवों से भरी है। अमानगढ़ का रकबा एक लाख बीघा जमीन से अधिक है। उत्तराखंड बनने से पहले यह जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का ही हिस्सा था। यहां बाघ, गुलदार, हाथी, चीतल आदि बहुत संख्या में हैं। अमानगढ़ में आम जनता को घूमने की अनुमति नहीं रहती है, जबकि उत्तराखंड के वन क्षेत्र में बहुत पर्यटक आते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग भी इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा था। इसका प्रस्ताव वन निगम के सामने रखा था। वन निगम ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यहां पर अब पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो नवंबर में अमानगढ़ में पर्यटन शुरू हो सकता है। तब आम लोगों को भी अमानगढ़ में प्रकृति की सुंदरता निहारने का अवसर मिलेगा।
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पीली बांध में होगी बोटिंग
अमानगढ़ के पास में ही पीली बांध है। यहां पर बोटिंग की सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा सफारी यानि घूमने के लिए जीप आदि की व्यवस्था की जाएगी। होटल, शौचालय आदि की व्यवस्था पीली बांध के पास ही करने पर विचार किया जा रहा है।
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अमानगढ़ एक नजर में
रकबा 9580 हेक्टेयर
बाघ 27
गुलदार 45
चिकारा 06
काला हिरन 50
सांभर 226
बारहसिंगा 37
भालू 9
मोर 1074
नोट: आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं।
दुर्लभ प्रजाति के लकड़बग्घे मिले
अमानगढ़ के एरिया के पास में सफेद धारी वाले लकड़बग्घे भी मिले थे। ये दुर्लभ प्रजाति के होते हैं। इनके होने का पहले पता तक नहीं था। दो साल पहले किसी वाहन की चपेट में आकर एक लकड़बग्घे की मौत हो गई थी। तब पहली बार यहां लकड़बग्घा होने का पता चला था। इसके कुछ दिन बाद एक लकड़बग्घे ने किसानों पर भी हमला बोल दिया था और किसानों ने उसे मार दिया था।
मंजूरी मिली, पर्यटन का केंद्र बनेगा अमानगढ़: डीएफओ
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार अमानगढ़ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने को मंजूरी मिल गई है। जल्दी ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा। इस बात का ध्यान रखा जाएगा पर्यटन का मकसद पूरा हो जाए और वन्य जीवों के जीवन पर कोई असर भी न पड़े।