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निजी लैब से डेंगू की पुष्टि, स्वास्थ्य विभाग कर रहा इंकार
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निजी लैब बता रहीं डेंगू, अफसर बोले हम नहीं मानते
बिजनौर। जिले में इस समय बुखार की बात करें तो सैकड़ों लोग चपेट में हैं। सितंबर में 10 दिवसीय सर्वे में ही तीन हजार से ज्यादा बुखार के मरीज मिले थे। अब बात डेंगू की करें तो सरकारी आंकड़ों में अभी तक डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है, उधर जिलेभर में ऐसी कई निजी लैब हैं, जिन पर रोजाना कई मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आ रही है। इन रिपोर्ट के आधार पर कुछ अस्पताल उपचार भी दे रहे हैं, पर स्वास्थ्य विभाग इन रिपोर्ट को नकारते हुए केवल एलाइजा टेस्ट ही विश्वसनीय होने का दावा कर रहा है। सवाल यह है कि जब इस तरह के टेस्ट मान्य नहीं है तो निजी लैबों में यह हो कैसे रहे हैं। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
सितंबर-अक्तूबर में मलेरिया और डेंगू काफी फैलता है। जिले में चलाए जा रहे अभियान में पांच स्थानों पर डेंगू के लार्वा मिल चुके हैं। इन्हें नष्ट कर दिया गया है। जनता से डेंगू से बचाव के लिए आसपास सफाई रखने व पानी एकत्र न होने देने की अपील की जा रही है। जिले में वायरल काफी फैल रहा है। वायरल होने पर कई ऐसे निजी चिकित्सक हैं जो मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब में टेस्ट कराने के लिए भेजते हैं। कई मरीजों की डेंगू एनएस वन एजी एंड एबी रिपोर्ट में डेंगू एनएस वन एंटीजन होने की पुष्टि हुई है। इन मरीजों की प्लेटलेट्स भी कम आ रही हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक मरीजों का डेंगू मानकर उपचार भी कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस रिपोर्ट को डेंगू मानने को तैयार नहीं हैं। चिकित्सक केवल सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध एलाइजा टेस्ट को ही डेंगू की रिपोर्ट के लिए अधिकृत मान रहे हैं।
नहीं हैं डेंगू का एक भी मरीज: सीएमओ
सीएमओ डा.विजय कुमार गोयल के अनुसार जिले में अभी डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है। एंटीजन डेंगू की संभावित रिपोर्ट होती है और इससे कोई पुष्टि नहीं होती है। किसी को अगर डेंगू के लक्षण हैं तो वे जिला अस्पताल में बुखार आने के चौथे दिन बाद एलाइजा टेस्ट करा सकता है।
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कार्रवाई के चलते चल रही अधिकारियों से वार्ता: डीएमओ
जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण सिंह कहते हैं कि यह सुनने में आया है कि कुछ लैब पर कार्ड से टेस्ट हो रहा है। यह कार्ड टेस्ट विश्वसनीय नहीं है। केवल एलाइजा टेस्ट ही विश्वसनीय है। विभागीय अधिकारियों से बात चल रही है कि इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए लैब का निरीक्षण और अनाधिकृत टेस्ट पर रोक लगाई जाए। यदि किसी में डेंगू के लक्षण मिलते हैं तो उसे जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट कराना चाहिए।
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बिजनौर। जिले में इस समय बुखार की बात करें तो सैकड़ों लोग चपेट में हैं। सितंबर में 10 दिवसीय सर्वे में ही तीन हजार से ज्यादा बुखार के मरीज मिले थे। अब बात डेंगू की करें तो सरकारी आंकड़ों में अभी तक डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है, उधर जिलेभर में ऐसी कई निजी लैब हैं, जिन पर रोजाना कई मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आ रही है। इन रिपोर्ट के आधार पर कुछ अस्पताल उपचार भी दे रहे हैं, पर स्वास्थ्य विभाग इन रिपोर्ट को नकारते हुए केवल एलाइजा टेस्ट ही विश्वसनीय होने का दावा कर रहा है। सवाल यह है कि जब इस तरह के टेस्ट मान्य नहीं है तो निजी लैबों में यह हो कैसे रहे हैं। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
सितंबर-अक्तूबर में मलेरिया और डेंगू काफी फैलता है। जिले में चलाए जा रहे अभियान में पांच स्थानों पर डेंगू के लार्वा मिल चुके हैं। इन्हें नष्ट कर दिया गया है। जनता से डेंगू से बचाव के लिए आसपास सफाई रखने व पानी एकत्र न होने देने की अपील की जा रही है। जिले में वायरल काफी फैल रहा है। वायरल होने पर कई ऐसे निजी चिकित्सक हैं जो मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब में टेस्ट कराने के लिए भेजते हैं। कई मरीजों की डेंगू एनएस वन एजी एंड एबी रिपोर्ट में डेंगू एनएस वन एंटीजन होने की पुष्टि हुई है। इन मरीजों की प्लेटलेट्स भी कम आ रही हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक मरीजों का डेंगू मानकर उपचार भी कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस रिपोर्ट को डेंगू मानने को तैयार नहीं हैं। चिकित्सक केवल सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध एलाइजा टेस्ट को ही डेंगू की रिपोर्ट के लिए अधिकृत मान रहे हैं।
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नहीं हैं डेंगू का एक भी मरीज: सीएमओ
सीएमओ डा.विजय कुमार गोयल के अनुसार जिले में अभी डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है। एंटीजन डेंगू की संभावित रिपोर्ट होती है और इससे कोई पुष्टि नहीं होती है। किसी को अगर डेंगू के लक्षण हैं तो वे जिला अस्पताल में बुखार आने के चौथे दिन बाद एलाइजा टेस्ट करा सकता है।
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कार्रवाई के चलते चल रही अधिकारियों से वार्ता: डीएमओ
जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण सिंह कहते हैं कि यह सुनने में आया है कि कुछ लैब पर कार्ड से टेस्ट हो रहा है। यह कार्ड टेस्ट विश्वसनीय नहीं है। केवल एलाइजा टेस्ट ही विश्वसनीय है। विभागीय अधिकारियों से बात चल रही है कि इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए लैब का निरीक्षण और अनाधिकृत टेस्ट पर रोक लगाई जाए। यदि किसी में डेंगू के लक्षण मिलते हैं तो उसे जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट कराना चाहिए।