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जल्द शुरू होगी अगले पेराई सत्र की तैयारी
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जल्द शुरू होगी अगले पेराई सत्र की तैयारी
बिजनौर। पेराई सत्र खत्म होते ही अगले पेराई सत्र के गन्ने का हिसाब किताब रखने का काम शुरू हो जाएगा। पेराई सत्र खत्म होने के साथ ही चीनी मिलें अगले पेराई सत्र के लिए गन्ने का सर्वे शुरू कर देंगी। सर्वे के आधार पर ही अगले पेराई सत्र में मिल चलाने की तिथि निर्धारित होगी।
कोरोना की वजह से पिछले साल लॉकडाउन लगाना पड़ा था। तब किसानों ने सब्जी या अन्य फल की खेती छोड़कर केवल गन्ने की खेती को ही पकड़ लिया था। पिछले साल गन्ना रकबा 11.5 प्रतिशत बढ़ गया था। पिछले साल गन्ने की बंपर पैदावार की वजह से गन्ना भी जून में जाकर खत्म हुआ था। चीनी मिल चलाने के लिए पहले ही शेड्यूल बनवा लिया गया था। पिछले साल मिलों का संचालन अक्तूबर के आखिर में ही शुरू करा दिया गया था। इस बार भी गन्ना रकबा पिछले साल के मुकाबले कम रहने के आसार नहीं हैं।
पिछले साल दो लाख 47 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में गन्ना था। अगर सर्वे के आधार पर मिलों को जल्दी न चलाया जाता तो किसानों को इस पेराई सत्र में भी गन्ना डालने में भारी परेशानी उठानी पड़ती। गन्ने के रकबे की जानकारी के लिए इस साल भी मई में ही सर्वे शुरू करा दिया जाएगा। सर्वे में देखा जाएगा कि किस मिल क्षेत्र में गन्ना रकबा कितना है। इस रकबे के आधार पर ही आगामी पेराई सत्र के लिए मिल चलाने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार मई से गन्ना सर्वे शुरू करा दिया जाएगा। सर्वे के आधार पर ही मिलों का पेराई सत्र शुरू कराया जाएगा।
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बिजनौर। पेराई सत्र खत्म होते ही अगले पेराई सत्र के गन्ने का हिसाब किताब रखने का काम शुरू हो जाएगा। पेराई सत्र खत्म होने के साथ ही चीनी मिलें अगले पेराई सत्र के लिए गन्ने का सर्वे शुरू कर देंगी। सर्वे के आधार पर ही अगले पेराई सत्र में मिल चलाने की तिथि निर्धारित होगी।
कोरोना की वजह से पिछले साल लॉकडाउन लगाना पड़ा था। तब किसानों ने सब्जी या अन्य फल की खेती छोड़कर केवल गन्ने की खेती को ही पकड़ लिया था। पिछले साल गन्ना रकबा 11.5 प्रतिशत बढ़ गया था। पिछले साल गन्ने की बंपर पैदावार की वजह से गन्ना भी जून में जाकर खत्म हुआ था। चीनी मिल चलाने के लिए पहले ही शेड्यूल बनवा लिया गया था। पिछले साल मिलों का संचालन अक्तूबर के आखिर में ही शुरू करा दिया गया था। इस बार भी गन्ना रकबा पिछले साल के मुकाबले कम रहने के आसार नहीं हैं।
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पिछले साल दो लाख 47 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में गन्ना था। अगर सर्वे के आधार पर मिलों को जल्दी न चलाया जाता तो किसानों को इस पेराई सत्र में भी गन्ना डालने में भारी परेशानी उठानी पड़ती। गन्ने के रकबे की जानकारी के लिए इस साल भी मई में ही सर्वे शुरू करा दिया जाएगा। सर्वे में देखा जाएगा कि किस मिल क्षेत्र में गन्ना रकबा कितना है। इस रकबे के आधार पर ही आगामी पेराई सत्र के लिए मिल चलाने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार मई से गन्ना सर्वे शुरू करा दिया जाएगा। सर्वे के आधार पर ही मिलों का पेराई सत्र शुरू कराया जाएगा।
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