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आय का साधन भी बन रहे तालाब
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आय का साधन भी बन रहे तालाब
बिजनौर। शासन ने एक साल तक जल संचयन अभियान चलाया। अभियान में 27 नए तालाबों का निर्माण हुआ। तालाब पंचायत की आय का माध्यम बन रहे हैं। तालाबों से लोगों की रोजगार मिल रहा है और पंचायत आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
जिले में तालाबों के जीर्णोद्धार के साथ नए तालाबों का निर्माण हुआ। छह ब्लॉक में एक साल में 27 नए तालाब बने, इसमें 37.14 लाख रुपये खर्च किए गए। तालाबों से जल संचयन हुआ, पानी की बरबादी रुकी और भूमिगत जल स्तर बढ़ाने में मदद मिली। इतना ही नहीं गांवों में बने तालाब पंचायतों की आय का स्थायी माध्यम बन गए हैं। ग्राम पंचायत नांगल जट के पूर्व प्रधान चौधरी हुकुम सिंह तथा मोहनपुर चांदा नंगली के बाबूराम आर्य बताते हैं की तालाबों का आवंटन सिंघाड़ा बेल डालने के लिए किया जाता है। मछली पालन हो रहा है। लोगों को गांव में ही काम मिला, इससे लोग अच्छी कमाई कर रहे हैं। जिन पंचायत या गांवों में तालाब नहीं थे। वहां जल संचयन के लिए नए तालाब बनाए गए हैं। सबसे अधिक तालाबों का निर्माण हल्दौर ब्लॉक में हुआ है। अफजलगढ़, स्योहारा, कोतवाली, मोहम्मदपुर देवमल तथा नहटौर ब्लॉक में कोई नया तालाब निर्माण नहीं हुआ है।
तालाबों से मिल रहा रोजगार
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि तालाबों से पंचायतों की आमदनी बढ़ी है। एक साल में 27 नए तालाब बने हैं। जिनकी लंबाई 20 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर तथा गहराई डेढ़ से दो मीटर है। 334 तालाब पुरानी शक्ल में लाए गए। योजना में तालाबों के किनारे फलदार एवं छायादार पौधरोपण किया गया है। तालाबों की बाउंड्री पर बांस का पौधरोपण हो रहा है। बांस पर्यावरण शुद्धीकरण के साथ कम लागत में पंचायत की कमाई का अच्छा माध्यम है। तालाबों से ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। तालाब मछली पालन के लिए आवंटित हैं।
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ये है तालाबों का निर्माण खर्च
बताया गया कि हल्दौर ब्लॉक में 13 तालाबों के निर्माण पर 14.54 लाख, जलीलपुर ब्लॉक के चार तालाबों पर 08.71 लाख, किरतपुर ब्लॉक में चार तालाब के निर्माण पर छह लाख, नूरपुर ब्लॉक में दो तालाबों के निर्माण में 03.65 लाख, धामपुर ब्लॉक में दो तालाब पर 02.74 लाख तथा नजीबाबाद ब्लॉक में दो तालाब के निर्माण में सबसे कम डेढ़ लाख खर्च हुआ है।
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बिजनौर। शासन ने एक साल तक जल संचयन अभियान चलाया। अभियान में 27 नए तालाबों का निर्माण हुआ। तालाब पंचायत की आय का माध्यम बन रहे हैं। तालाबों से लोगों की रोजगार मिल रहा है और पंचायत आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
जिले में तालाबों के जीर्णोद्धार के साथ नए तालाबों का निर्माण हुआ। छह ब्लॉक में एक साल में 27 नए तालाब बने, इसमें 37.14 लाख रुपये खर्च किए गए। तालाबों से जल संचयन हुआ, पानी की बरबादी रुकी और भूमिगत जल स्तर बढ़ाने में मदद मिली। इतना ही नहीं गांवों में बने तालाब पंचायतों की आय का स्थायी माध्यम बन गए हैं। ग्राम पंचायत नांगल जट के पूर्व प्रधान चौधरी हुकुम सिंह तथा मोहनपुर चांदा नंगली के बाबूराम आर्य बताते हैं की तालाबों का आवंटन सिंघाड़ा बेल डालने के लिए किया जाता है। मछली पालन हो रहा है। लोगों को गांव में ही काम मिला, इससे लोग अच्छी कमाई कर रहे हैं। जिन पंचायत या गांवों में तालाब नहीं थे। वहां जल संचयन के लिए नए तालाब बनाए गए हैं। सबसे अधिक तालाबों का निर्माण हल्दौर ब्लॉक में हुआ है। अफजलगढ़, स्योहारा, कोतवाली, मोहम्मदपुर देवमल तथा नहटौर ब्लॉक में कोई नया तालाब निर्माण नहीं हुआ है।
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तालाबों से मिल रहा रोजगार
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि तालाबों से पंचायतों की आमदनी बढ़ी है। एक साल में 27 नए तालाब बने हैं। जिनकी लंबाई 20 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर तथा गहराई डेढ़ से दो मीटर है। 334 तालाब पुरानी शक्ल में लाए गए। योजना में तालाबों के किनारे फलदार एवं छायादार पौधरोपण किया गया है। तालाबों की बाउंड्री पर बांस का पौधरोपण हो रहा है। बांस पर्यावरण शुद्धीकरण के साथ कम लागत में पंचायत की कमाई का अच्छा माध्यम है। तालाबों से ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। तालाब मछली पालन के लिए आवंटित हैं।
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ये है तालाबों का निर्माण खर्च
बताया गया कि हल्दौर ब्लॉक में 13 तालाबों के निर्माण पर 14.54 लाख, जलीलपुर ब्लॉक के चार तालाबों पर 08.71 लाख, किरतपुर ब्लॉक में चार तालाब के निर्माण पर छह लाख, नूरपुर ब्लॉक में दो तालाबों के निर्माण में 03.65 लाख, धामपुर ब्लॉक में दो तालाब पर 02.74 लाख तथा नजीबाबाद ब्लॉक में दो तालाब के निर्माण में सबसे कम डेढ़ लाख खर्च हुआ है।