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सजायाफ्ता मुलजिम को तलाश रही पुलिस टीम
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सजायाफ्ता मुलजिम को तलाश रही पुलिस टीम
स्योहारा। जमानत पर रिहा हुए सजायाफ्ता एक मुलजिम ने स्योहारा समेत जिलेभर की पुलिस की सांस अटका दी है। मुलजिम कब लापता हो गया खुद पुलिस को भी नहीं पता चल सका। अता, पता और लापता के फेर में उलझी इस पूरी कहानी में नया मोड़ तब आया, जब 29 साल बाद अदालत ने मुलजिम को तलब कर लिया। तलाश में जुटी पुलिस ने शहर से गांव तक की खाक छानी, दीवारों पर इस्तेहार भी चस्पा किए, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। अधूरी इस तलाश को पूरा करने में जुटी स्योहारा पुलिस अब आला अफसरों की फटकार झेल रही है।
नगर के मोहल्ला बसंतगढ़ निवासी धर्मपाल सैनी का अफजलगढ़ पुलिस ने 1991 में दुष्कर्म के प्रयास के मुक़दमे में चालान किया था। जिस पर न्यायालय बिजनौर ने 31 मार्च 1991 को आरोपी धर्मपाल सैनी को दो वर्ष की सजा सुनाई। धर्मपाल सैनी ने 21 माह चौदह दिन की सजा काट कर 26 अप्रैल 1993 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद धर्मपाल सैनी ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक अपील हाईकोर्ट में डाली। हाईकोर्ट ने धर्मपाल सैनी को अपने समक्ष प्रस्तुत होने के लिए कई बार नोटिस व एनबीडब्ल्यू भी भेजे, लेकिन उसका कुछ अता पता नहीं चल रहा है।
18 जुलाई को एक बार फिर हाईकोर्ट ने धर्मपाल को प्रस्तुत करने के लिए कहा था, धर्मपाल के नहीं मिलने पर पुलिस अधीक्षक को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से हाईकोर्ट को जवाब देना पड़ा। अब फिर से पांच सितंबर की तारीख लगी है। थानाध्यक्ष राजीव चौधरी का कहना है कि धर्मपाल की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान पंचायत सचिव, लेखपाल, वोटर लिस्ट और राजस्व रिकॉर्ड आदि भी खंगाल लिए हैं, मगर अभी तक धर्मपाल सैनी का कोई सुराग नहीं लग सका है।
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स्योहारा। जमानत पर रिहा हुए सजायाफ्ता एक मुलजिम ने स्योहारा समेत जिलेभर की पुलिस की सांस अटका दी है। मुलजिम कब लापता हो गया खुद पुलिस को भी नहीं पता चल सका। अता, पता और लापता के फेर में उलझी इस पूरी कहानी में नया मोड़ तब आया, जब 29 साल बाद अदालत ने मुलजिम को तलब कर लिया। तलाश में जुटी पुलिस ने शहर से गांव तक की खाक छानी, दीवारों पर इस्तेहार भी चस्पा किए, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। अधूरी इस तलाश को पूरा करने में जुटी स्योहारा पुलिस अब आला अफसरों की फटकार झेल रही है।
नगर के मोहल्ला बसंतगढ़ निवासी धर्मपाल सैनी का अफजलगढ़ पुलिस ने 1991 में दुष्कर्म के प्रयास के मुक़दमे में चालान किया था। जिस पर न्यायालय बिजनौर ने 31 मार्च 1991 को आरोपी धर्मपाल सैनी को दो वर्ष की सजा सुनाई। धर्मपाल सैनी ने 21 माह चौदह दिन की सजा काट कर 26 अप्रैल 1993 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद धर्मपाल सैनी ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक अपील हाईकोर्ट में डाली। हाईकोर्ट ने धर्मपाल सैनी को अपने समक्ष प्रस्तुत होने के लिए कई बार नोटिस व एनबीडब्ल्यू भी भेजे, लेकिन उसका कुछ अता पता नहीं चल रहा है।
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18 जुलाई को एक बार फिर हाईकोर्ट ने धर्मपाल को प्रस्तुत करने के लिए कहा था, धर्मपाल के नहीं मिलने पर पुलिस अधीक्षक को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से हाईकोर्ट को जवाब देना पड़ा। अब फिर से पांच सितंबर की तारीख लगी है। थानाध्यक्ष राजीव चौधरी का कहना है कि धर्मपाल की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान पंचायत सचिव, लेखपाल, वोटर लिस्ट और राजस्व रिकॉर्ड आदि भी खंगाल लिए हैं, मगर अभी तक धर्मपाल सैनी का कोई सुराग नहीं लग सका है।
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