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लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति ने सुरभि सिंह के सपनों को दी उड़ान
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पशुओं को चारा देतीं डेयरी व्यवसाय से जुड़ीं सुरभि सिंह।
- फोटो : NAZIBABAD
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लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति ने सुरभि सिंह के सपनों को दी उड़ान
नजीबाबाद। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में उड़ान होती है। सुरभि सिंह ने मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से डेयरी व्यवसाय को अपनाकर यह साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं है।
सुभाषनगर निवासी सुरभि सिंह काफी समय से डेयरी व्यवसाय चला रहीं हैं। कोरोना से सुरभि के पति विजय प्रताप की एक वर्ष पूर्व मृत्यु हुई। सुरभि का रुझान यूं तो मीडियाकर्मी के रूप में समाज का मार्गदर्शन करना था। पत्रकारिता का कोर्स भी किया लेकिन बाद में डेयरी व्यवसाय को आत्मनिर्भरता का साधन बनाया। वर्ष 2013-14 से डेयरी व्यवसाय से जुड़ीं सुरभि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में कृषि विभाग और ब्लॉक स्तर से पुरस्कृत की जा चुकीं हैं। वर्तमान में सुभाषनगर स्थित उनके आवास पर तीन दर्जन से अधिक पशु हैं जिसमें भैंस और गोवंश शामिल हैं।
सुरभि डेयरी व्यवसाय के आरंभ से ही पशुओं को नहलाने, चारा उपलब्ध कराने, दूध निकालने का कार्य एक सहयोगी के साथ करतीं हैं। बेटा अस्मित देशवाल और बिटिया अक्षिता पशु सेवा में सहभागी बनते हैं। सुरभि कहतीं हैं कि महिलाओं के लिए कोई भी ऐसा काम नहीं है, जिसे वह नहीं कर सकतीं। बस जरूरत है तो दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत की। उनका कहना है कि इसी इच्छाशक्ति ने उन्हें सफल आत्मनिर्भर महिला बनाया।
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कोरोना काल में झेलीं चुनौतियां
नजीबाबाद। कोरोना काल में करीब तीन दर्जन पशुओं को चारा उपलब्ध कराना सुरभि के लिए चुनौती बना। कोरोना काल में ही पति को गंवाया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। सुरभि को पशुओं के गोबर से धूपबत्ती, मूत्र से फिनायल बनाने की भी महारथ हासिल है।
अच्छे पशु पालना बना शौक
नजीबाबाद। अच्छी नस्ल के पशुओं को पालना सुरभि का शौक रहा है। वह बताती हैं कि अधिकतम 20 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली भैंस और 14 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली गाय ने उन्हें पहचान दिलाई। दूध उत्पादन के क्षेत्र में दो बार पुरस्कृत हो चुकीं सुरभि ने डेयरी व्यवसाय के साथ पनीर, मावा, कढ़े दूध का मट्ठा तथा अन्य दुग्ध व्यंजन डेयरी व्यवसाय के साथ विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
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नजीबाबाद। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में उड़ान होती है। सुरभि सिंह ने मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से डेयरी व्यवसाय को अपनाकर यह साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं है।
सुभाषनगर निवासी सुरभि सिंह काफी समय से डेयरी व्यवसाय चला रहीं हैं। कोरोना से सुरभि के पति विजय प्रताप की एक वर्ष पूर्व मृत्यु हुई। सुरभि का रुझान यूं तो मीडियाकर्मी के रूप में समाज का मार्गदर्शन करना था। पत्रकारिता का कोर्स भी किया लेकिन बाद में डेयरी व्यवसाय को आत्मनिर्भरता का साधन बनाया। वर्ष 2013-14 से डेयरी व्यवसाय से जुड़ीं सुरभि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में कृषि विभाग और ब्लॉक स्तर से पुरस्कृत की जा चुकीं हैं। वर्तमान में सुभाषनगर स्थित उनके आवास पर तीन दर्जन से अधिक पशु हैं जिसमें भैंस और गोवंश शामिल हैं।
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सुरभि डेयरी व्यवसाय के आरंभ से ही पशुओं को नहलाने, चारा उपलब्ध कराने, दूध निकालने का कार्य एक सहयोगी के साथ करतीं हैं। बेटा अस्मित देशवाल और बिटिया अक्षिता पशु सेवा में सहभागी बनते हैं। सुरभि कहतीं हैं कि महिलाओं के लिए कोई भी ऐसा काम नहीं है, जिसे वह नहीं कर सकतीं। बस जरूरत है तो दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत की। उनका कहना है कि इसी इच्छाशक्ति ने उन्हें सफल आत्मनिर्भर महिला बनाया।
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कोरोना काल में झेलीं चुनौतियां
नजीबाबाद। कोरोना काल में करीब तीन दर्जन पशुओं को चारा उपलब्ध कराना सुरभि के लिए चुनौती बना। कोरोना काल में ही पति को गंवाया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। सुरभि को पशुओं के गोबर से धूपबत्ती, मूत्र से फिनायल बनाने की भी महारथ हासिल है।
अच्छे पशु पालना बना शौक
नजीबाबाद। अच्छी नस्ल के पशुओं को पालना सुरभि का शौक रहा है। वह बताती हैं कि अधिकतम 20 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली भैंस और 14 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली गाय ने उन्हें पहचान दिलाई। दूध उत्पादन के क्षेत्र में दो बार पुरस्कृत हो चुकीं सुरभि ने डेयरी व्यवसाय के साथ पनीर, मावा, कढ़े दूध का मट्ठा तथा अन्य दुग्ध व्यंजन डेयरी व्यवसाय के साथ विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।