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सर्पों की दहशत, खेत में जाने से भी डर रहे ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jun 2017 12:15 AM IST
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इलाके के गांवों में ऐसे नजारे अक्सर दिखते हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के नजीबाबाद में गांव बाजोपुर के ग्रामीणों में सांपों की दहशत में जी रहे है। जून माह में ही यहां सर्पदंश से दो की मौत हो चुकी है जबकि रविवार को ही महिला समेत चार अन्य को सांप ने डस लिया। उनका इलाज कराया जा रहा है।
गांव वालों ने सपेरे को बुलाकर एक सांप को पकड़वाया, लेकिन सर्पदंश की घटनाएं लगातार जारी हैं। ग्राम प्रधान ने वन विभाग के अधिकारियों से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
कोतवाली मार्ग स्थित ग्राम बाजोपुर में सात जून को सांप के डंसने से राजीव (25) की मौत हो गई थी। 17 जून को गांव के ही विकास (14) को भी सांप ने डस लिया। उसकी भी मौत हो गई। परिजनों ने दोनों के शवों को पानी में बहा दिया।
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इन मौतों को परिजन और गांव वाले भूले भी नहीं थे कि रविवार की शाम सांपों ने गांव में अलग-अलग जगहों पर तीन महिलाओं और एक युवक को डस लिया। इनमें अफसाना (35), नीतू (30), शाकिर (25) और सर्पदंश से मरे राजीव की मां को भी डस लिया। इनका इलाज कराया जा रहा है।
ग्राम प्रधान खुशनूदा ने बताया कि गांव के लोगों में सर्पदंश की घटनाओं को लेकर दहशत है। गांव में दो की मौत होने के बाद एक सपेरे को बुलवाकर एक सांप को पकड़वा गया। मगर, लगातार सर्पदंश की घटनाएं जारी है। हालात यह है कि ग्रामीण खेतों पर जाने से भी डरने लगे है।
वन विभाग के कर्मचारी आबादी से पकड़ेेंगे सांप
वन विभाग ने सांपों को बचाने की कवायद शुरू कर दी है। घरों में घुसकर जनता के कोप का शिकार होने वाले सांपों को बचाने के लिए अब पहल की है। घर में घुसने वाले सांपों को जल्द ही वन विभाग के अधिकारी पकड़ेंगे। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रैफिक इंडिया वन विभाग के कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगी।
90 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते हैं। हालांकि पब्लिक को बिना या कम जहर वाले सांपों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। घरों के आंगन आदि में आने वाले हर सांप को जहरीला समझ लिया जाता है। कभी-कभी सांप भी डरकर हमला कर देते हैं। नतीजतन सांप को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
हर साल ऐसे ही सैकड़ों सांप मारे जाते हैं। यहां तक कि जंगल में भी किसान सांपों को नहीं छोड़ते हैं। अब वन विभाग ने ऐसे सांपों को बचाने के लिए पहल की है। वन विभाग के कर्मचारियों को वन्य जीवों के संरक्षण में लगी एनजीओ ट्रैफिक इंडिया द्वारा 15 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद ये कर्मचारी सूचना मिलने पर आबादी वाले इलाके से सांप पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ेंगे। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं। वन विभाग के कर्मचारी प्रशिक्षण लेकर आबादी क्षेत्र से सांप पकड़ेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सांप के काटने पर ये हैं उपाय
- जिस जगह सांप कांटे, उससे ऊपर की ओर दो-दो इंच की दूरी पर तीन मजबूत बंद लगाएं।
- डसने वाले स्थान पर ब्लेड से कट लगाकर खून के साथ सांप का जहर निकालें।
- प्रेशर के साथ साफ पानी से पांच से 10 मिनट तक शरीर में बने जख्म को धोएं।
- एक बार डसने के बाद सांप में जहर खत्म हो जाता है। उसे तुरंत पकड़ लें या मार दें।
- सांप को चिकित्सक तक ले जाने पर उसके जहर के संबंध में सटीक जानकारी मिल जाती है।
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गांव वालों ने सपेरे को बुलाकर एक सांप को पकड़वाया, लेकिन सर्पदंश की घटनाएं लगातार जारी हैं। ग्राम प्रधान ने वन विभाग के अधिकारियों से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
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कोतवाली मार्ग स्थित ग्राम बाजोपुर में सात जून को सांप के डंसने से राजीव (25) की मौत हो गई थी। 17 जून को गांव के ही विकास (14) को भी सांप ने डस लिया। उसकी भी मौत हो गई। परिजनों ने दोनों के शवों को पानी में बहा दिया।
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इन मौतों को परिजन और गांव वाले भूले भी नहीं थे कि रविवार की शाम सांपों ने गांव में अलग-अलग जगहों पर तीन महिलाओं और एक युवक को डस लिया। इनमें अफसाना (35), नीतू (30), शाकिर (25) और सर्पदंश से मरे राजीव की मां को भी डस लिया। इनका इलाज कराया जा रहा है।
ग्राम प्रधान खुशनूदा ने बताया कि गांव के लोगों में सर्पदंश की घटनाओं को लेकर दहशत है। गांव में दो की मौत होने के बाद एक सपेरे को बुलवाकर एक सांप को पकड़वा गया। मगर, लगातार सर्पदंश की घटनाएं जारी है। हालात यह है कि ग्रामीण खेतों पर जाने से भी डरने लगे है।
वन विभाग के कर्मचारी आबादी से पकड़ेेंगे सांप
वन विभाग ने सांपों को बचाने की कवायद शुरू कर दी है। घरों में घुसकर जनता के कोप का शिकार होने वाले सांपों को बचाने के लिए अब पहल की है। घर में घुसने वाले सांपों को जल्द ही वन विभाग के अधिकारी पकड़ेंगे। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रैफिक इंडिया वन विभाग के कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगी।
90 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते हैं। हालांकि पब्लिक को बिना या कम जहर वाले सांपों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। घरों के आंगन आदि में आने वाले हर सांप को जहरीला समझ लिया जाता है। कभी-कभी सांप भी डरकर हमला कर देते हैं। नतीजतन सांप को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
हर साल ऐसे ही सैकड़ों सांप मारे जाते हैं। यहां तक कि जंगल में भी किसान सांपों को नहीं छोड़ते हैं। अब वन विभाग ने ऐसे सांपों को बचाने के लिए पहल की है। वन विभाग के कर्मचारियों को वन्य जीवों के संरक्षण में लगी एनजीओ ट्रैफिक इंडिया द्वारा 15 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद ये कर्मचारी सूचना मिलने पर आबादी वाले इलाके से सांप पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ेंगे। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं। वन विभाग के कर्मचारी प्रशिक्षण लेकर आबादी क्षेत्र से सांप पकड़ेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सांप के काटने पर ये हैं उपाय
- जिस जगह सांप कांटे, उससे ऊपर की ओर दो-दो इंच की दूरी पर तीन मजबूत बंद लगाएं।
- डसने वाले स्थान पर ब्लेड से कट लगाकर खून के साथ सांप का जहर निकालें।
- प्रेशर के साथ साफ पानी से पांच से 10 मिनट तक शरीर में बने जख्म को धोएं।
- एक बार डसने के बाद सांप में जहर खत्म हो जाता है। उसे तुरंत पकड़ लें या मार दें।
- सांप को चिकित्सक तक ले जाने पर उसके जहर के संबंध में सटीक जानकारी मिल जाती है।