{"_id":"5807c3894f1c1b103070372c","slug":"paddy-rice-from-bali-was-not","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलालाबाद में किसानों को खेतों में खड़ी फसल से चावल ही नसीब नहीं हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलालाबाद में किसानों को खेतों में खड़ी फसल से चावल ही नसीब नहीं हुआ
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Thu, 20 Oct 2016 03:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर के जलालाबाद में राजकीय कृषि बीज भंडार से धान का बीज और कीटनाशक लेने वाले किसान उस समय हतप्रभ रह गए, जब उनके खेतों में खड़ी फसल से चावल ही नसीब नहीं हुआ। लाखों रुपये की क्षति झेलने वाले किसानों ने प्रशासन से मुआवजा दिलाने और किसानों को हुई परेशानी के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
हुसैनपुर तीरगर और उसके आसपास के क्षेत्रों के कई किसान तहसील पहुंचे। क्षेत्रीय किसानों के साथ ग्राम प्रधान के पति आरिफ, शकील, अतीकुर्रहमान, उस्मान, ओमप्रकाश, मुन्ना, यूसुफ, मुखराम, भूरा, असद, जयपाल आदि का कहना है कि धान की फसल की रोपाई के लिए उन्होंने राजकीय कृषि बीज भंडार नजीबाबाद से धान का बीज और जरूरत पड़ने पर कीटनाशक खरीदा था। किसानों ने बताया कि करीब तीन माह बाद जब धान की फसल तैयार हुई और किसानों ने अपने-अपने खेतों पर पहुंचकर धान की फसल को काटना शुरू किया, तो उस समय उनके पांव तले जमीन खिसक गई जब धान की पौध पर आई बाली से चावल गायब था। बाली फोड़ने पर उसमें से राख निकल रही थी।
किसानों ने तहसीलदार भान सिंह को शिकायती पत्र सौंपकर बताया कि राजकीय कृषि बीज भंडार नजीबाबाद से धान का बीज एवं कीटनाशक खरीदने के लिए उन पर बार-बार दबाव बनाया गया। इसके चलते विवश होकर उन्होंने बीज एवं कीटनाशक खरीदकर उसका इस्तेमाल किया। किसानों ने धान की फसल में आई लागत और तीन माह तक फसल पर खर्च हुई धनराशि मुआवजे के तौर पर वापस दिलाने की मांग की। साथ ही उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। तहसीलदार ने ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हुसैनपुर तीरगर और उसके आसपास के क्षेत्रों के कई किसान तहसील पहुंचे। क्षेत्रीय किसानों के साथ ग्राम प्रधान के पति आरिफ, शकील, अतीकुर्रहमान, उस्मान, ओमप्रकाश, मुन्ना, यूसुफ, मुखराम, भूरा, असद, जयपाल आदि का कहना है कि धान की फसल की रोपाई के लिए उन्होंने राजकीय कृषि बीज भंडार नजीबाबाद से धान का बीज और जरूरत पड़ने पर कीटनाशक खरीदा था। किसानों ने बताया कि करीब तीन माह बाद जब धान की फसल तैयार हुई और किसानों ने अपने-अपने खेतों पर पहुंचकर धान की फसल को काटना शुरू किया, तो उस समय उनके पांव तले जमीन खिसक गई जब धान की पौध पर आई बाली से चावल गायब था। बाली फोड़ने पर उसमें से राख निकल रही थी।
विज्ञापन
किसानों ने तहसीलदार भान सिंह को शिकायती पत्र सौंपकर बताया कि राजकीय कृषि बीज भंडार नजीबाबाद से धान का बीज एवं कीटनाशक खरीदने के लिए उन पर बार-बार दबाव बनाया गया। इसके चलते विवश होकर उन्होंने बीज एवं कीटनाशक खरीदकर उसका इस्तेमाल किया। किसानों ने धान की फसल में आई लागत और तीन माह तक फसल पर खर्च हुई धनराशि मुआवजे के तौर पर वापस दिलाने की मांग की। साथ ही उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। तहसीलदार ने ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन