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पांच लाख की क्षतिपूर्ति देने के आदेश
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पांच लाख की क्षतिपूर्ति देने के आदेश
बिजनौर। स्थायी लोक अदालत में एक किसान की विद्युत निगम की लापरवाही से करंट लगने से हुई मात के मामले में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को पांच लाख रुपये का मुआवजा मृतक किसान भूपेंद्र सिंह के परिजनों को देने का आदेश दिया है।
ग्राम अगरी निवासी मृतक किसान भूपेंद्र सिंह की पत्नी पिंकी व उसके नाबालिग बेटे हर्षित चौधरी व मां संतोष देवी की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल याचिका में कहा गया था कि 19 नवंबर 2016 को भूपेंद्र सिंह अपने खेत में नलकूप से सिंचाई करने जा रहा था। विद्युत एलटी लाइन जो लकड़ी के पोल के माध्यम से बंधी थी लकड़ी का पोल टूटने के कारण तार गिर गए जो उसे खड़ी ईख में दिखाई नहीं दिए। तारों की चपेट में आकर करंट लगने से भूपेंद्र सिंह की मौत हो गई। याचिका में यह भी कहा गया था कि विद्युत लाइन निगम द्वारा नियम खिलाफ बनाई गई थी। लकड़ी का पोल इस्तेमाल नहीं हो सकता था, विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण भूपेंद्र सिंह की मौत करंट लगने से हुई। विद्युत निगम का कहना था कि वह लकड़ी के पोल के पास से जैसे ही गुजरा उसके ऊपर तार गिर गया। इसमें विभाग की कोई लापरवाही नहीं है। इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष एससी राणा व सदस्य राजीव कुमार द्वारा दिए गए निर्णय में कहा गया है कि विद्युत निगम की लापरवाही से यह मौत हुई है। ऐसे मामलों में पांच लाख की क्षतिपूर्ति दी जाती है। क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान दो माह के अंदर कर दिया जाए।
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बिजनौर। स्थायी लोक अदालत में एक किसान की विद्युत निगम की लापरवाही से करंट लगने से हुई मात के मामले में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को पांच लाख रुपये का मुआवजा मृतक किसान भूपेंद्र सिंह के परिजनों को देने का आदेश दिया है।
ग्राम अगरी निवासी मृतक किसान भूपेंद्र सिंह की पत्नी पिंकी व उसके नाबालिग बेटे हर्षित चौधरी व मां संतोष देवी की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल याचिका में कहा गया था कि 19 नवंबर 2016 को भूपेंद्र सिंह अपने खेत में नलकूप से सिंचाई करने जा रहा था। विद्युत एलटी लाइन जो लकड़ी के पोल के माध्यम से बंधी थी लकड़ी का पोल टूटने के कारण तार गिर गए जो उसे खड़ी ईख में दिखाई नहीं दिए। तारों की चपेट में आकर करंट लगने से भूपेंद्र सिंह की मौत हो गई। याचिका में यह भी कहा गया था कि विद्युत लाइन निगम द्वारा नियम खिलाफ बनाई गई थी। लकड़ी का पोल इस्तेमाल नहीं हो सकता था, विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण भूपेंद्र सिंह की मौत करंट लगने से हुई। विद्युत निगम का कहना था कि वह लकड़ी के पोल के पास से जैसे ही गुजरा उसके ऊपर तार गिर गया। इसमें विभाग की कोई लापरवाही नहीं है। इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष एससी राणा व सदस्य राजीव कुमार द्वारा दिए गए निर्णय में कहा गया है कि विद्युत निगम की लापरवाही से यह मौत हुई है। ऐसे मामलों में पांच लाख की क्षतिपूर्ति दी जाती है। क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान दो माह के अंदर कर दिया जाए।
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