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फसल को रोगों से बचाएगी गन्ने के साथ प्याज की खेती

Fri, 17 Dec 2021 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:03 AM IST
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Onion cultivation with sugarcane will save the crop from diseases
फसल को रोगों से बचाएगी गन्ने के साथ प्याज की खेती
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धामपुर। गन्ना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि क्षेत्र के किसानों ने गन्ने की फसल के साथ प्याज की खेती करने में रुचि दिखाई तो इस क्षेत्र को प्याज की महंगाई से निजात मिलेगी। साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। गन्ने में लगने वाले पिहिका रोग से भी निजात मिलेगी। ऐसा करने से गन्ने की औसत उपज में बढ़ोतरी होगी। यह सब कुछ तभी संभव है जब किसान गन्ने के साथ प्याज की खेती करेंगे।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अमित कुमार पांडेय ने बताया कि गन्ने की खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। शरदकालीन गन्ने की बुवाई नवंबर में होती है। गन्ने की पेड़ी की सिंचाई व गुड़ाई का काम जनवरी के अंत में शुरू होता है। यही समय प्याज की बुवाई का होता है। गन्ने की दो लाइनों के बीच की खाली जगह में प्याज की बुवाई करने से खरपतवार कम होंगे। अप्रैल में जब गन्ने के पौधों पर मिट्टी चढ़ाने का वक्त होता है। उस वक्त प्याज निकाली जाती है। प्याज में कुछ विशेष प्रकार के एंजाइम पाए जाते हैं, जिनकी वजह से प्याज काटते समय आंख से आंसू निकलने लगते हैं। एंजाइम की गंध से गन्ने में लगने वाले पिहिका रोग से निजात मिलती है। जिस खेत में गन्ना के साथ प्याज की बुवाई होती है, उसमें कीटनाशकों का कम प्रयोग करना पड़ता है। (संवाद)
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प्रति एकड़ साढ़े चार किलो बीज की जरूरत
एससीडीआई ने बताया कि गन्ने के साथ प्याज की बुवाई के लिए प्रति एकड़ साढ़े चार किलो बीज की जरूरत पड़ेगी। प्याज का बीज हर जगह दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। किसान प्रमाणित बीज से बुवाई करें। एक किलो बीज की कीमत 2500 रुपये से लेकर 2600 रुपये है। वहीं, प्रति एकड़ 60 से 70 क्विंटल उपज होती है। फसल तैयार होने में 135 से 145 दिन तक लगते हैं। बाजार में मांग के चलते फसल तत्काल बिक जाएगी। जिससे किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा।
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खेत की तैयारी में रखें इसका ख्याल
अंतिम जुताई के समय खेत में गोबर की खाद को मिला दें। बुवाई से पहले खेत में 75 किलोग्राम एनपीएस तथा 30 किग्रा पोटाश मिलाएं। नर्सरी में तैयार प्याज के पौधों को जनवरी के दूसरे सप्ताह से फरवरी के प्रथम सप्ताह तक रोपाई करें। दो पौधों के बीच में 10 सेमी की दूरी रखें। रोपाई के 30 से 45 दिन पर गुड़ाई कर खरपतवार निकाल दें। समय-समय पर हल्की सिंचाई करें।
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