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मिनी बैंक घोटाले में अधिकारियों की संलिप्तता
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मिनी बैंक घोटाले में अधिकारियों की संलिप्तता
बिजनौर। किसान सेवा सहकारी समिति फीना के मिनी बैंक घोटाले में जांच समिति ने रिपोर्ट सहायक निबंधक सहकारी समितियां को सौंप दी है। पैसे का घोटाला डेढ़ करोड़ से अधिक का है। बैंक के एक हजार से अधिक किसान खातेदार गबन के शिकार हैं। समिति ने ऑडिटर, सहकारी बैंक मैनेजर व समिति एमडी समेत एक दर्जन अधिकारियों की घोटाले में संलिप्तता पाई गई है। अब सभी आरोपियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी है।
मामला करीब सात साल पुराना वर्ष 2014-15 का है। घोटाला नियोजित तरीके से हुआ। बताया गया कि बैंक के किसान खातेदार पैसा जमा करते रहे। परंतु पैसा किसानों के खातों में जमा नहीं किया गया था। बैंक का रुटीन ऑडिट भी हुआ। सहकारी बैंक के नामित बैंक प्रबंधकों द्वारा लेखा-जोखा का नियमित परीक्षण भी होता रहा। अधिकारियों ने भी निरीक्षण किए, परंतु घोटाले का पता नहीं चला। मामले का खुलासा तत्कालीन एमडी के रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2019 में हुआ। इसके बाद जब सहकारिता विभाग ने स्पेशल ऑडिट कराया तो घोटाले की साल दर साल पर्त खुली। सहायक निबंधक अर्थात एआर सहकारी समितियां अमित कुमार त्यागी ने बताया कि गबन एक करोड़ 59 लाख का है। मामले की जांच के लिए दो एडीसीओ तथा सहकारी बैंक बिजनौर के डीजीएम की तीन सदस्यीय टीम बनी थी। जांच समिति ने घपले की बिंदुवार रिपोर्ट दे दी है।
जांच समिति ने तत्कालीन एमडी लक्ष्य कुमार, मिनि बैंक के खातों की जांच करने व बेलैंस सीट का मिलान करने वाले सहकारी बैंक के पांच मैनेजर, समिति व बैंक का ऑडिट करने वाले ऑडिटर, सुपरविजन करने वाले विभागीय अधिकारियों समेत एक दर्जन की संलिप्तता मानी है। एआर ने बताया कि घोटाले की फाइनल फिगर आ गई है। आरोपियों पर पैसा जमा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा। मामले में लिप्त अधिकारियों से वसूली होगी। इसके लिए संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। बताया कि आरोपियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
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अधिकारियों ने तथ्य छिपाकर किया गुमराह
बिजनौर। एआर अमित कुमार त्यागी ने बताया कि अधिकारियों ने विभाग को तथ्यों की जानकारी देने में गुमराह किया है। बताया कि आरोपी एमडी समिति में लेखाकार थे। उन्हें समिति का एमडी नियुक्त करने के लिए उनसे पूर्व के एमडी से गोपनीय आख्या तत्कालीन एआर ने मांगी थी। आरोप है कि तथ्यों को छिपाकर रिपोर्ट आरोपी के पक्ष में दी गई थी। जबकि आरोपी पहले गबन के मामले में सस्पेंड रहा था।
सहकारिता विभाग के जानकारों का कहना है कि सहकारी समितियों तथा मिनी बैंक की जांच के लिए भारी भरकम अमला है। नियमित चेकिंग के लिए तहसीलों पर एडीसीओ हैं। सहकारी बैंक मैनेजर तिमाही व छमाही एकाउंट जांच करते हैं। लेनदेन का मिलान होता है। सहायक निबंधक सहकारी समिति सालाना निरीक्षण करते हैं। इतनी बड़ी टीम होने के बाद भी सात साल तक घोटाला पकड़ में नहीं आना गहरी साजिश की ओर इशारा कराता है।
ऑडिटर की चूक से चलता रहा पैसा डकारने का खेल
बिजनौर। एआर अमित कुमार त्यागी का कहना है कि ऑडिटर की चूक से घपले का खेल चलता रहा है यदि ऑडिटर उसी समय रिपोर्ट विभाग को दे देता तो सैकड़ों किसानों का लाखों रुपया का गबन होने से बच जाता। आरोप है कि ऑडिटर ने आडिट रिपोर्ट करीब एक साल बाद विभाग को दी। ऑडिट वर्ष 2013-14 में हुआ था। घपले का खुलासा वर्ष 2018-19 में हुआ। सहकारी समिति फीना के चेयरमैन घोटाले की रिपोर्ट थाना शिवाला कलां में दर्ज करा चुके हैं। रिपोर्ट में तत्कालीन एमडी लक्ष्य कुमार पर गबन का आरोप है। अब जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों के खिलाफ दूसरी एफआईआर की तैयारी है।
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बिजनौर। किसान सेवा सहकारी समिति फीना के मिनी बैंक घोटाले में जांच समिति ने रिपोर्ट सहायक निबंधक सहकारी समितियां को सौंप दी है। पैसे का घोटाला डेढ़ करोड़ से अधिक का है। बैंक के एक हजार से अधिक किसान खातेदार गबन के शिकार हैं। समिति ने ऑडिटर, सहकारी बैंक मैनेजर व समिति एमडी समेत एक दर्जन अधिकारियों की घोटाले में संलिप्तता पाई गई है। अब सभी आरोपियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी है।
मामला करीब सात साल पुराना वर्ष 2014-15 का है। घोटाला नियोजित तरीके से हुआ। बताया गया कि बैंक के किसान खातेदार पैसा जमा करते रहे। परंतु पैसा किसानों के खातों में जमा नहीं किया गया था। बैंक का रुटीन ऑडिट भी हुआ। सहकारी बैंक के नामित बैंक प्रबंधकों द्वारा लेखा-जोखा का नियमित परीक्षण भी होता रहा। अधिकारियों ने भी निरीक्षण किए, परंतु घोटाले का पता नहीं चला। मामले का खुलासा तत्कालीन एमडी के रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2019 में हुआ। इसके बाद जब सहकारिता विभाग ने स्पेशल ऑडिट कराया तो घोटाले की साल दर साल पर्त खुली। सहायक निबंधक अर्थात एआर सहकारी समितियां अमित कुमार त्यागी ने बताया कि गबन एक करोड़ 59 लाख का है। मामले की जांच के लिए दो एडीसीओ तथा सहकारी बैंक बिजनौर के डीजीएम की तीन सदस्यीय टीम बनी थी। जांच समिति ने घपले की बिंदुवार रिपोर्ट दे दी है।
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जांच समिति ने तत्कालीन एमडी लक्ष्य कुमार, मिनि बैंक के खातों की जांच करने व बेलैंस सीट का मिलान करने वाले सहकारी बैंक के पांच मैनेजर, समिति व बैंक का ऑडिट करने वाले ऑडिटर, सुपरविजन करने वाले विभागीय अधिकारियों समेत एक दर्जन की संलिप्तता मानी है। एआर ने बताया कि घोटाले की फाइनल फिगर आ गई है। आरोपियों पर पैसा जमा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा। मामले में लिप्त अधिकारियों से वसूली होगी। इसके लिए संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। बताया कि आरोपियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
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अधिकारियों ने तथ्य छिपाकर किया गुमराह
बिजनौर। एआर अमित कुमार त्यागी ने बताया कि अधिकारियों ने विभाग को तथ्यों की जानकारी देने में गुमराह किया है। बताया कि आरोपी एमडी समिति में लेखाकार थे। उन्हें समिति का एमडी नियुक्त करने के लिए उनसे पूर्व के एमडी से गोपनीय आख्या तत्कालीन एआर ने मांगी थी। आरोप है कि तथ्यों को छिपाकर रिपोर्ट आरोपी के पक्ष में दी गई थी। जबकि आरोपी पहले गबन के मामले में सस्पेंड रहा था।
सहकारिता विभाग के जानकारों का कहना है कि सहकारी समितियों तथा मिनी बैंक की जांच के लिए भारी भरकम अमला है। नियमित चेकिंग के लिए तहसीलों पर एडीसीओ हैं। सहकारी बैंक मैनेजर तिमाही व छमाही एकाउंट जांच करते हैं। लेनदेन का मिलान होता है। सहायक निबंधक सहकारी समिति सालाना निरीक्षण करते हैं। इतनी बड़ी टीम होने के बाद भी सात साल तक घोटाला पकड़ में नहीं आना गहरी साजिश की ओर इशारा कराता है।
ऑडिटर की चूक से चलता रहा पैसा डकारने का खेल
बिजनौर। एआर अमित कुमार त्यागी का कहना है कि ऑडिटर की चूक से घपले का खेल चलता रहा है यदि ऑडिटर उसी समय रिपोर्ट विभाग को दे देता तो सैकड़ों किसानों का लाखों रुपया का गबन होने से बच जाता। आरोप है कि ऑडिटर ने आडिट रिपोर्ट करीब एक साल बाद विभाग को दी। ऑडिट वर्ष 2013-14 में हुआ था। घपले का खुलासा वर्ष 2018-19 में हुआ। सहकारी समिति फीना के चेयरमैन घोटाले की रिपोर्ट थाना शिवाला कलां में दर्ज करा चुके हैं। रिपोर्ट में तत्कालीन एमडी लक्ष्य कुमार पर गबन का आरोप है। अब जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों के खिलाफ दूसरी एफआईआर की तैयारी है।