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जागरूकता से बढ़ रही रक्तदाताओं की तादाद
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अजय कुमार सिंह।
- फोटो : BIJNOR
जागरूकता से बढ़ रही रक्तदाताओं की तादाद
बिजनौर। रक्तदान करने के प्रति भ्रांतियों को छोड़ अब बिना डरे ही रक्तदाता स्वेच्छा से रक्तदान करने चले आते हैं। हमें अपना रक्त देकर गर्भवती, महिलाओं, थैलेसीमिया और दुर्घटना में घायल आदि गंभीर रोगियों की जान बचाने से गुरेज नहीं करना चाहिए। सभी 18 से 60 साल तक स्वस्थ लोगों को इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविरों के आयोजन कराने का उद्देश्य सिर्फ लोगों को रक्तदान की महत्ता और इसके होने वाले फायदों के बारे में जागरूक करना है। चिकित्सकों के अनुसार एक रक्तदान से चार जान बचाई जा सकती हैं यानी एक आदमी का खून चार लोगों के काम आ सकता है। इसलिए हर तीन माह पर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए।
दिव्यांगता को नहीं आने दिया आड़े
वेब शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बिजनौर के प्रशासनिक अधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि वे सात साल से रक्तदान करते आ रहे हैं। अब तक अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बिजनौर में जितनी बार भी रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। उन्होंने रक्तदान करने का पुण्य कार्य किया। अजय बताते हैं कि उनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। रक्तदान में उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कभी आड़े नहीं आने दिया, बल्कि ऐसे लोगों को सीख देने का काम किया है, जो पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर भी रक्तदान करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमारा खून की किसी जरूरतमंद के काम आए तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है।
मां की बीमारी से मिली प्रेरणा
राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा का कहना है कि वे अब तक चार बार रक्तदान कर चुके हैं। कूल्हे में परेशानी होने पर उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर मेरठ में अपनी माता जी का ऑपरेशन कराया। जब ब्लड की आवश्यकता पड़ी तो वे पूरी रात मेरठ के विभिन्न ब्लड बैंकों में ब्लड के लिए परेशान घूमते रहे। मगर समस्या का समाधान नहीं हुआ। फिर उन्होंने सीएमओ कार्यालय मेरठ में कार्यरत एक परिचित को फोन किया तो उन्होंने रक्त के बदले रक्त दिलाने की बात कही। तब से वे हर बार अमर उजाला के रक्तदान शिविर में रक्तदान करते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं।
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खून देकर बचाई थी सहपाठी की जान
भारतीय किसान यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह का कहना है कि अब तक वे करीब 15 बार रक्तदान कर चुके हैं। सबसे पहले उन्होंने बीएससी में पढ़ते समय अपने एक सहपाठी की खून देकर जान बचाई थी। तभी से उन्हें लगा कि उन्हें समय समय पर रक्तदान अवश्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि खून एक ऐसी चीज है, जिसका निर्माण के केवल शरीर में ही होता है। इसलिए किसी को भी रक्तदान करने से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सभी लोगों को पूरी दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ रक्तदान करना चाहिए।
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बिजनौर। रक्तदान करने के प्रति भ्रांतियों को छोड़ अब बिना डरे ही रक्तदाता स्वेच्छा से रक्तदान करने चले आते हैं। हमें अपना रक्त देकर गर्भवती, महिलाओं, थैलेसीमिया और दुर्घटना में घायल आदि गंभीर रोगियों की जान बचाने से गुरेज नहीं करना चाहिए। सभी 18 से 60 साल तक स्वस्थ लोगों को इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविरों के आयोजन कराने का उद्देश्य सिर्फ लोगों को रक्तदान की महत्ता और इसके होने वाले फायदों के बारे में जागरूक करना है। चिकित्सकों के अनुसार एक रक्तदान से चार जान बचाई जा सकती हैं यानी एक आदमी का खून चार लोगों के काम आ सकता है। इसलिए हर तीन माह पर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए।
दिव्यांगता को नहीं आने दिया आड़े
वेब शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बिजनौर के प्रशासनिक अधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि वे सात साल से रक्तदान करते आ रहे हैं। अब तक अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बिजनौर में जितनी बार भी रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। उन्होंने रक्तदान करने का पुण्य कार्य किया। अजय बताते हैं कि उनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। रक्तदान में उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कभी आड़े नहीं आने दिया, बल्कि ऐसे लोगों को सीख देने का काम किया है, जो पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर भी रक्तदान करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमारा खून की किसी जरूरतमंद के काम आए तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है।
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मां की बीमारी से मिली प्रेरणा
राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा का कहना है कि वे अब तक चार बार रक्तदान कर चुके हैं। कूल्हे में परेशानी होने पर उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर मेरठ में अपनी माता जी का ऑपरेशन कराया। जब ब्लड की आवश्यकता पड़ी तो वे पूरी रात मेरठ के विभिन्न ब्लड बैंकों में ब्लड के लिए परेशान घूमते रहे। मगर समस्या का समाधान नहीं हुआ। फिर उन्होंने सीएमओ कार्यालय मेरठ में कार्यरत एक परिचित को फोन किया तो उन्होंने रक्त के बदले रक्त दिलाने की बात कही। तब से वे हर बार अमर उजाला के रक्तदान शिविर में रक्तदान करते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं।
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खून देकर बचाई थी सहपाठी की जान
भारतीय किसान यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह का कहना है कि अब तक वे करीब 15 बार रक्तदान कर चुके हैं। सबसे पहले उन्होंने बीएससी में पढ़ते समय अपने एक सहपाठी की खून देकर जान बचाई थी। तभी से उन्हें लगा कि उन्हें समय समय पर रक्तदान अवश्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि खून एक ऐसी चीज है, जिसका निर्माण के केवल शरीर में ही होता है। इसलिए किसी को भी रक्तदान करने से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सभी लोगों को पूरी दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ रक्तदान करना चाहिए।

राकेश शर्मा।- फोटो : BIJNOR

दिगम्बर सिंह।- फोटो : BIJNOR