{"_id":"629fa30befc65d795662d7d3","slug":"now-affluent-people-will-be-able-to-adopt-tb-patients-bijnor-news-mrt5919704189","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब टीबी मरीजों को गोद ले सकेंगे संपन्न लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब टीबी मरीजों को गोद ले सकेंगे संपन्न लोग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब टीबी मरीजों को गोद ले सकेंगे संपन्न लोग
बिजनौर। सरकार ने भारत में टीबी को खत्म करने का 2025 का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार काम कर रही है। अब टीबी मरीजों को गोद लेने की योजना चलाई गई है। जिसे ‘एडॉब्ट पीपल विद टीबी’ नाम दिया गया है। इसमें संपन्न लोग और संस्थान किसी भी ब्लॉक व वार्ड के टीबी मरीजों को गोद ले सकते हैं।
पुरानी व्यवस्था के तहत टीबी के मरीजों को व्यक्तिगत या एनजीओ के माध्यम से ही गोद लिया जाता है, लेकिन अब संपन्न व्यक्तियों की मदद से एक-दो नहीं बल्कि पूरे वार्ड, ब्लॉक या गांव के टीबी के मरीजों को गोद लेने का काम किया जाएगा। इसके लिए जिले के बड़े शैक्षिक संस्थान, औद्योगिक संगठन के मालिक, जन प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठन से संपर्क कर उन्हें शहरी वार्ड, गांव, ब्लॉक या जिलों के टीबी के मरीज को गोद लेनेे के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद इन्हें उस क्षेत्र के टीबी के मरीजों की सूची दी जाएगी। इसके बाद टीबी मरीजों को पोषण, उपचार और व्यवसायिक सहायता देनी होगी।
योजना से टीबी मरीजों को मिलेगी मदद : डॉ. बीएस रावत
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि इस मिशन को ‘टीबी मरीजों को सामुदायिक सहायता देना’ नाम दिया गया है। मरीज को इस कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन कराने या न कराने का ऑप्शन दिया जाएगा। इससे मरीजों को उपलब्ध मौजूदा सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी उनसे सहमतिपत्र भरवाएंगे और इसे संबंधित स्वास्थ्यकर्मी जमा कराएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। सरकार ने भारत में टीबी को खत्म करने का 2025 का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार काम कर रही है। अब टीबी मरीजों को गोद लेने की योजना चलाई गई है। जिसे ‘एडॉब्ट पीपल विद टीबी’ नाम दिया गया है। इसमें संपन्न लोग और संस्थान किसी भी ब्लॉक व वार्ड के टीबी मरीजों को गोद ले सकते हैं।
पुरानी व्यवस्था के तहत टीबी के मरीजों को व्यक्तिगत या एनजीओ के माध्यम से ही गोद लिया जाता है, लेकिन अब संपन्न व्यक्तियों की मदद से एक-दो नहीं बल्कि पूरे वार्ड, ब्लॉक या गांव के टीबी के मरीजों को गोद लेने का काम किया जाएगा। इसके लिए जिले के बड़े शैक्षिक संस्थान, औद्योगिक संगठन के मालिक, जन प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठन से संपर्क कर उन्हें शहरी वार्ड, गांव, ब्लॉक या जिलों के टीबी के मरीज को गोद लेनेे के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद इन्हें उस क्षेत्र के टीबी के मरीजों की सूची दी जाएगी। इसके बाद टीबी मरीजों को पोषण, उपचार और व्यवसायिक सहायता देनी होगी।
विज्ञापन
योजना से टीबी मरीजों को मिलेगी मदद : डॉ. बीएस रावत
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि इस मिशन को ‘टीबी मरीजों को सामुदायिक सहायता देना’ नाम दिया गया है। मरीज को इस कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन कराने या न कराने का ऑप्शन दिया जाएगा। इससे मरीजों को उपलब्ध मौजूदा सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी उनसे सहमतिपत्र भरवाएंगे और इसे संबंधित स्वास्थ्यकर्मी जमा कराएगा।
विज्ञापन