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नोटबंदी से एक चौथाई रह गया कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Dec 2016 11:58 PM IST
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बिजनौर के नींदडू़ में नोटबंदी के बाद से शहर से ज्यादा देहाती क्षेत्र का कारोबार प्रभावित हुआ और आम लोगों की दिक्कतें बढ़ी हैं। परचून की दुकानों से लेकर मेडिकल स्टोर तक पर बिक्री एक चौथाई ही रह गई है। दुकानदारों के साथ ही ग्राहक भी कैश की किल्लत के कारण परेशान हैं।
मेडिकल स्टोर स्वामी नदीम अहमद के मुताबिक नोटबंदी का प्रभाव मेडिकल स्टोरों पर भी पड़ा है। डायबिटीज, हार्ट, लीवर और थायराइड जैसे जटिल रोगाें के जो मरीज नियमित रूप से दवाएं लेते थे, वे भी अब कम दवाएं ले रहे हैं। कुछ ग्राहक 2000 रुपये के नोट के साथ आते हैं। लेकिन छुट्टों की कमी में उससे भी काम नहीं चलता।
जनरल स्टोर चलाने वाले हाजी यासीन मलिक बताते हैं कि पिछले 26 दिनों से धंधा बेहद प्रभावित है। बैंक से समय पर भुगतान नहीं होने या फिर दो-दो हजार रुपये के नोटों के खुले उपलब्ध नहीं होने से ग्राहक अपनी जरूरतों को सीमित कर रहे हैं। इसके चलते बिक्री घटकर 30-35 प्रतिशत ही रह गई है। सब्जी विक्रेता ईदरीस अहमद और नसीम माहेगीर ने बताया कि नोटबंदी के चलते धंधा आधे से कम रह गया है। उपभोक्ता उधार में ही सामान खरीदने पहुंचते हैं।
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बेकरी उत्पाद विक्रेता बुंदू का कहना है कि नोटबंदी की वजह से ग्रामीण बेकरी का सामान बेहद कम खरीद रहे हैं। बिस्कुट, चिप्स की बजाय अब लोग पहले घर के लिए जरूरी सब्जी, आटा, दाल खरीदते हैं। यदि इस हफ्ते में हालात नहीं सुधरे तो दिक्कत बढ़ जाएगी। हेयर ड्रेसर अनीस सलमानी ने बताया कि इस समय शादियों का सीजन में कटिंग, मसाज, मालिश आदि के लिए युवा काफी संख्या में पहुंचते थे। इस बार सजने संवरने पर भी युवा कम खर्च कर रहे हैं।
परचून दुकानदार रेहान, मिठाई विक्रेता गुलफाम के अनुसार नोटबंदी से आम आदमी परेशान हैं। मिठाई-नमकीन की बिक्री पर असर पड़ा है। मेहमानों की खातिर मात्र चाय पिलाकर की जा रही है।
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मेडिकल स्टोर स्वामी नदीम अहमद के मुताबिक नोटबंदी का प्रभाव मेडिकल स्टोरों पर भी पड़ा है। डायबिटीज, हार्ट, लीवर और थायराइड जैसे जटिल रोगाें के जो मरीज नियमित रूप से दवाएं लेते थे, वे भी अब कम दवाएं ले रहे हैं। कुछ ग्राहक 2000 रुपये के नोट के साथ आते हैं। लेकिन छुट्टों की कमी में उससे भी काम नहीं चलता।
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जनरल स्टोर चलाने वाले हाजी यासीन मलिक बताते हैं कि पिछले 26 दिनों से धंधा बेहद प्रभावित है। बैंक से समय पर भुगतान नहीं होने या फिर दो-दो हजार रुपये के नोटों के खुले उपलब्ध नहीं होने से ग्राहक अपनी जरूरतों को सीमित कर रहे हैं। इसके चलते बिक्री घटकर 30-35 प्रतिशत ही रह गई है। सब्जी विक्रेता ईदरीस अहमद और नसीम माहेगीर ने बताया कि नोटबंदी के चलते धंधा आधे से कम रह गया है। उपभोक्ता उधार में ही सामान खरीदने पहुंचते हैं।
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बेकरी उत्पाद विक्रेता बुंदू का कहना है कि नोटबंदी की वजह से ग्रामीण बेकरी का सामान बेहद कम खरीद रहे हैं। बिस्कुट, चिप्स की बजाय अब लोग पहले घर के लिए जरूरी सब्जी, आटा, दाल खरीदते हैं। यदि इस हफ्ते में हालात नहीं सुधरे तो दिक्कत बढ़ जाएगी। हेयर ड्रेसर अनीस सलमानी ने बताया कि इस समय शादियों का सीजन में कटिंग, मसाज, मालिश आदि के लिए युवा काफी संख्या में पहुंचते थे। इस बार सजने संवरने पर भी युवा कम खर्च कर रहे हैं।
परचून दुकानदार रेहान, मिठाई विक्रेता गुलफाम के अनुसार नोटबंदी से आम आदमी परेशान हैं। मिठाई-नमकीन की बिक्री पर असर पड़ा है। मेहमानों की खातिर मात्र चाय पिलाकर की जा रही है।