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बैंक के बाहर टंग गए नो कैश के बोर्ड, रोष
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 14 Nov 2016 12:04 AM IST
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बिजनौर में रविवार को एसबीआई में उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में पांचवें दिन भी बैंकों में 500 और एक हजार के नोट बदलने तथा कैश निकालने के लिए ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। बैंकों में उपभोक्ताओं ने एक और दो रुपये के सिक्के लेने से भी गुरेज नहीं किया। इलाहाबाद बैंक के बाहर नौ कैश का बोर्ड लगा दिया गया है। उपभोक्ता नोट जमा करने के लिए लाइन लगाकर खड़े हैं।
करीब पांच दिन से बैंक उपभोक्ताओं को दो सेे चार हजार का भुगतान कर रहे हैं। बैंकों का खजाना अब खाली होने लगा है। जिला सहकारी बैंक, इलाहाबाद बैंक में कैश बिल्कुल खत्म हो गया है। हालांकि 500 और एक हजार के नोट जमा करने वाले अभी भी यहां पर लाइन लगाकर खड़े हैं। अरबन कोआपरेटिव बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, एचडीएफसी, पीएनबी की शाखाओं में कैश आने पर उपभोक्ताओं की भीड़ इन शाखाओं में आ रही है। हालांकि ये बैंक 500 व एक हजार के नोट बदलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। आईडीबीआई में कैश खत्म होने पर कुछ उपभोक्ता एक व दो रुपये के सिक्के ही ले गए। एचडीएफसी बैंक के एटीएम में तीसरे दिन भी कैश रखा गया, तो वहां पर फिर से लाइन लगी रही। लोग काफी परेशान रहे। वहीं 500 और 1000 के नोट बंद होने के डाकघर के उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली है। डाकघर में रविवार को कैश बांटा गया है। अभी तक डाकघर में उपभोक्ताओं ने करीब दस करोड़ रुपया जमा किया है।
500 और 1000 के नोट बंद होने के कारण डाकघर के उपभोक्ताओं को तीन दिन तक परेशान होना पड़ा। तीनों दिन उपभोक्ता घंटों तक लाइन में लगे रहे। घंटो तक लाइन में खड़े होने के बाद उपभोक्ताओं को खाली हाथ ही जाना पड़ा था। रविवार को उपभोक्ताओं को एक बजे जब राहत की सांस जब उनको रुपये मिले। एसबीआई ने डाकघर को दोपहर एक बजे चार लाख रुपये दिए । डाकघर ने 150 उपभोक्ताओं को यह रकम बांटी है। 500 व 1000 के नोट बंद होने से रविवार तक करीब दस करोड़ रुपया जमा हुआ है, लेकिन इसके मुकाबले अभी उपभोक्ताओं को बहुत की कम रकम दी गई है। पोस्टमास्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि एसबीआई ने डाकघर को चार लाख रुपये दिए थे।
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करीब पांच दिन से बैंक उपभोक्ताओं को दो सेे चार हजार का भुगतान कर रहे हैं। बैंकों का खजाना अब खाली होने लगा है। जिला सहकारी बैंक, इलाहाबाद बैंक में कैश बिल्कुल खत्म हो गया है। हालांकि 500 और एक हजार के नोट जमा करने वाले अभी भी यहां पर लाइन लगाकर खड़े हैं। अरबन कोआपरेटिव बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, एचडीएफसी, पीएनबी की शाखाओं में कैश आने पर उपभोक्ताओं की भीड़ इन शाखाओं में आ रही है। हालांकि ये बैंक 500 व एक हजार के नोट बदलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। आईडीबीआई में कैश खत्म होने पर कुछ उपभोक्ता एक व दो रुपये के सिक्के ही ले गए। एचडीएफसी बैंक के एटीएम में तीसरे दिन भी कैश रखा गया, तो वहां पर फिर से लाइन लगी रही। लोग काफी परेशान रहे। वहीं 500 और 1000 के नोट बंद होने के डाकघर के उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली है। डाकघर में रविवार को कैश बांटा गया है। अभी तक डाकघर में उपभोक्ताओं ने करीब दस करोड़ रुपया जमा किया है।
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500 और 1000 के नोट बंद होने के कारण डाकघर के उपभोक्ताओं को तीन दिन तक परेशान होना पड़ा। तीनों दिन उपभोक्ता घंटों तक लाइन में लगे रहे। घंटो तक लाइन में खड़े होने के बाद उपभोक्ताओं को खाली हाथ ही जाना पड़ा था। रविवार को उपभोक्ताओं को एक बजे जब राहत की सांस जब उनको रुपये मिले। एसबीआई ने डाकघर को दोपहर एक बजे चार लाख रुपये दिए । डाकघर ने 150 उपभोक्ताओं को यह रकम बांटी है। 500 व 1000 के नोट बंद होने से रविवार तक करीब दस करोड़ रुपया जमा हुआ है, लेकिन इसके मुकाबले अभी उपभोक्ताओं को बहुत की कम रकम दी गई है। पोस्टमास्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि एसबीआई ने डाकघर को चार लाख रुपये दिए थे।
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